जाति की धौंस दिखाकर क्यों मारने दौड़ी बैंक कर्मचारी? सामने आई वीडियो की सच्चाई !

ठाकुर हूं मैं ठाकुर हूं मत करना मेरे साथ दी चिल्लाई जातिवाद की गर्मी दिखाकर मारने के लिए दौड़ती नजर आई यह बैंक कर्मचारी है बैंक कर्मचारी पिछले 24 घंटे घंटे से इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को यह कहकर वायरल किया जा रहा है कि बैंक की कर्मचारी किसीग्राहक से ना सिर्फ बहस कर रही है बल्कि गालियां देकर अपनी जाति बताकर खुलेआम धमका भी रही है। लैपटॉप उठाकर मारने की कोशिश करती भी नजर आ रही है।

इस वीडियो को वायरल कर लोग इस बैंक कर्मचारी को ना सिर्फ तमाम तरह की बातें कह रहे हैं बल्कि उसके बिहेवियर पर सवाल भी उठा रहे हैं। आरोप लगा रहे हैं। देखिए कैसे जाति का खेल खेलकर ग्राहक को और दबाया जा रहा है। अब वाकई में गलती सिर्फ बैंक कर्मचारी की है या फिर ग्राहक ने कुछ ऐसा कियाकि वो इतना भड़क गई। शायद यह कोई नहीं जानता कि आखिर बैंक में हुआ क्या? क्यों एक महिला के इस कदर भड़कने की नौबत आ गई। क्यों वो अपना आपा खो बैठी? और जिस व्यक्ति पर वो भड़क रही है, आखिर वो कौन है? चलिए तो विस्तार से इस पूरे वीडियो के पीछे की कहानी सुनिए। यह वायरल वीडियो आजकल का नहीं बल्कि 6 जनवरी यानी 1 महीने पुराना है। कानपुर के एक निजी बैंक का है। बैंक कर्मचारी आस्था सिंह की जिस व्यक्ति से बहसlहो रही है, वह कोई ग्राहक नहीं बल्कि बैंक की ही महिला कर्मचारी ऋतू त्रिपाठी के पति ऋषि त्रिपाठी हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब बैंक में कैशियर के तौर पर काम करने वाली ऋतु रिजाइन करने आई थी। यानी नौकरी छोड़ने आई थी। उन्हें रिजाइन के तुरंत बाद रिलीविंग लेटरभी चाहिए था। लेकिन बैंक में और काम की वजह से उन्हें वक्त लगा। इस दौरान ऋषि त्रिपाठी की बहन [संगीत] भी उनकी पत्नी के साथ बैंक में आई। जिनकी किसी बात पर आस्था से बहस शुरू हो गई। बहन ने यह बात अपने भाई ऋषि त्रिपाठी को बता दी। आस्था सिंह का आरोप है शिफ्ट खत्म होने के बाद ऋषि त्रिपाठी गुस्से में बैंक में घुस आए और बिना कुछ जाने पूछे बुरी तरह उन पर भड़क उठे।

उनका कहना है कि जब उन्होंने इस बात का जवाब दिया तो ऋषि त्रिपाठी वस्तुकी करने लगे। क्यों अकड़ रही हो? तुम्हारी गर्मी निकाल देंगे, अकड़ तोड़ देंगे जैसे शब्दों [संगीत] का इस्तेमाल करने लगे और दोनों तरफ से देखते ही देखते बहस इतनी तेज हो [संगीत] गई अगर कोई ना रोकता तो शायद मामला मारपीट तक पहुंच जाता। आस्था सिंह ऋषि त्रिपाठी की भाषा सुनकर अपना आपा ही खो बैठी। फिर क्या हुआ? वही हुआ जो lतस्वीरों में आप देख रहे हैं। हां मतलब तो अभी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

आस्था के खिलाफ नई साजिश रचते हुए ऋषि त्रिपाठी ने इस घटना का अधूरा क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया और जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ वैसे ही आस्था सिंह को सोशल मीडिया पर घेरा जाने लगा। सवाल उठने लगे। ऐसे में आस्था सिंह को फिर खुद सामने आना पड़ा। फिर नया वीडियो बनाना पड़ा। इस बार वीडियो में बहस नहीं बल्कि उनके जरिए सच्चाई बताई गई। क्यों यह घटना हुई? घटना के पीछे का सच क्या है? आस्था ने एक-एक बात बारीकी से बताई। नमस्कार जय श्री राम। तो पिछले 24 से 36 घंटों से मैंने देखा है कि एक वीडियो Instagram पर और काफी सारे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक वीडियो बहुत वायरल हो रहा है। तो अभी तक इसमें सिर्फ एक पक्ष की कहानी सुनी गई है और अब मैं अपना पक्ष रखते हुए ये बयान देना चाहती हूं कि ये जो वीडियो है ये 6 जनवरी का वीडियो है।

अभी का वीडियो नहीं है और ये किसी कस्टमर का वीडियो नहीं है। ना मैंने किसी कस्टमर के साथ अभद्रता की है जिसके साथ ये वीडियो जिसका ये वीडियो है। ये हमारे ही बैंक में कार्य कर कार्य कर रही एक महिला के हस्बैंड के साथ मेरी बहस हुई है। उसका वीडियो है जिसको गलत रुख दिया गया है कि मैंने कस्टमर के साथ बदतमीजी करी है और इसको जातिवाद का मुद्दा बनाया गया है। मैं आपको शुरुआत से बताती हूं कि इसमें हुआ क्या था। तो महिला हमारे साथ जो काम कर रही थी उनको रिलीविंग उन्होंने रेज़िग्नेशन दिया था और उनको सेम डे रिलीविंग चाहिए थी जिस दिन उन्होंने रेज़िग्नेशन दिया था। उनकी ननद सुबह से आकर के बैठी हुई थी ब्रांच में और मेरी उनसे थोड़ी उनकी ननद से मेरी थोड़ी बहुत बहस हुई थी। उस सुबह आगे का उन्होंने अपने भाई को सब बताया मतलब ऋतु के जो महिला मेरे साथ काम करती है उसके हस्बैंड को उस बताया उसने और उसके हस्बैंड 4:30 वर्किंग आवर खत्म होने के बाद 3:30 वर्किंग आवर खत्म हो जाते हैं। 4:30 बैंक में घुस करके उन्होंने मेरे साथ अभद्रता की।

मुझसे डायरेक्टली पूछा कि आप कौन सी जाति की हो और इतनी अकड़ है। उन्होंने मुझसे मेरी डेस्क पे आकर के कहा कि मैं तुम्हारी हेकड़ी निकाल दूंगा। मैं तुम्हारी सारी गर्मी निकाल दूंगा। अभद्र लैंग्वेज का इस्तेमाल उन्होंने मुझसे किया। उसके बाद मैंने ये स्टेटमेंट दिया है। हां, मेरे शब्द गलत है। मैं जानती हूं मैं पब्लिक की सेवा के लिए बैठी हूं और मुझे अपने शब्दों का चयन बहुत सोच समझ के करना चाहिए। लेकिन अगर कोई मुझसे व्यक्ति मुझसे आकर के यह कहेगा कि मैं तुम्हारी गर्मी उतार दूंगा, तो मैं बर्दाश्त नहीं करूंगी। मैंने जो कहा है कि मैं ठाकुर हूं। मैं अभी भी अपने उस स्टेटमेंट पर हूं।

मैं ठाकुर हूं और इस बात पर मुझे पूरापूरा गर्व है। जय श्री राम। तो एक त्रिपाठी है। दूसरी ठाकुर हैं। दोनों ही सामान्य वर्ग से। लेकिन बवाल के बीच जाति किस कदर इनके सिर पर हावी हो रही है? यह इस विवाद से ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल सोशल मीडिया पर यही उठाए जा रहे हैं कि अगर आप अपर कास्ट से हैं तो क्या दूसरी जातियों को अपनी [संगीत] जाति बताकर दबाएंगे? क्या सामने वाले को नीचा दिखाएंगे? खैर अब इस मामले में ठाकुर वाली बात पर आस्था सिंह के जरिए माफी भी मांग ली गई है।

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