यह है कि राहुल गांधी मुसीबत में हैं। मुसीबत एक किताब की वजह से है। पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवाड़े की जिस किताब का जिक्र करके राहुल गांधी सदन से लेकर सदन सड़क तक बवाल काट रहे मोदी सरकार, राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सब पर सवाल उठा रहे थे। अब वही किताब उनके जी का जंजाल बन रही है क्योंकि तमाम सवाल हैं और सवाल ऐसे जिनके जवाब मिल नहीं पा रहे हैं। और अब तो सेना पूर्व सेना प्रमुख ने भी कह दिया जब छपी नहीं तो आई कहां से? और पेंग्विन ने जो कुछ कहा है वो और दिलचस्प है। बाकी जो मामला दर्ज हुआ है उसके बाद तो कहा जा रहा है कि सांसद फिर ये हट जाएंगे।
रायबरेली सांसदीय जाएगी और 5 साल जेल भी जा सकते हैं। अब ये जब बातचीत चल रही है तो इस पर चर्चा करना जरूरी है बेहतर। मेरे साथ हैं वरिष्ठ पत्रकार पंकज प्रसून समझने की कोशिश करेंगे कि क्या वाकई ऐसा हो सकता है कि राहुल की सांसदी फिर चली जाए। 5 साल की जेल हो जाए। ये कहां से खबर आई पंकज जी? अह रोहित मैं जो 3 मिनट के अंदर जो बता रहा हूं वो गौर से सुनिए। जो केस दर्ज हुआ है दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में वह ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत दर्ज हुआ है।
माफी के साथ रोकना चाहूंगा किस मामले में केस दर्ज हुआ यह बताते चलिए। ये नरवने की किताब के को लेकर एक केस दर्ज हुआ है। और केस इसलिए दर्ज हुआ कि पूर्व फल सेना अध्यक्ष की एक किताब है सो कॉल्ड जो कि छपी नहीं। हम जो प्रकाशक है वो कह रहा है छपी नहीं जो राइटर है वो कह रहा है छपी नहीं हम लेकिन उस किताब के एक हार्ड बाउंड कॉपी को लेकर ये आदमी संसद भवन में घूम रहा है हम इनका दावा यह है राहुल गांधी का दावा यह है कि किताब छप चुकी है हम और लगातार डे वन से एक के बाद एक झूठ बोलते जा रहे हैं और फंसते रहे जैसे उदाहरण तौर पे पहले दिन इन्होंने क्या कहा कि द वायर में एक इंटरव्यू छपा है। उसमें मुकुंद नरवाने को कोट किया गया है। ठीक है? वायर का इंटरव्यू के बारे में बात कर रहे हैं या उसके आर्टिकल के बारे में बात कर रहे हैं।
इंटरव्यू नहीं आर्टिकल के बारे में। पहला दिन ये कहा। दूसरा दिन ये कहा कि मैंने ऑथेंटिकेट किया है। मुकुंद नरवनी साहब ने ऐसा कहा। तीसरे दिन क्या कहा? एक किताब लेके आते हैं। संसद भवन परिसर में किताब को लेके घूम रहे हैं। मीडिया वालों को दिखा रहे हैं। लेकिन संसद भवन के अंदर सदन के पटल पर इस किताब को नहीं रखा गया कभी। हम राहुल गांधी रखना चाहिए था कि नहीं? अगर इनके पास बुक अवेलेबल है। वो कहते कि रक्षा मंत्री जी आप झूठ बोल रहे हैं। किताब ये देखिए ये अवेलेबल है। मैं सदन के पटल पे रखता हूं। हम लेकिन रखा नहीं। क्यों? क्योंकि वो फिर चौथे दिन आते हैं कोड हो जाता है ना वहां तो डॉक्यूमेंटेड होता था सब कुछ बिल्कुल और चौथे दिन इन्होंने क्या कहा पत्रकारों ने पूछा कि आपको यह किताब कहां से मिली तो उन्होंने कहा कि अमेजन पे अवेलेबल है किताब हम अमेजन ने कहा कि नहीं अवेलेबल है मेरे पे मुझे लगता है कि इनका एक बयान है जो कि किताब कहां से मिली वो सवाल सवाल का जवाब यह दे रहे हैं और जरा सुनिए उसके बाद आगे की कहानी और दिलचस्प है। ठीक है। सुनाते हैं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी क्या कुछ कह रहे हैं। हियर हियर इज अ ट्वीट फ्रॉम मिस्टर नरवाने।
ये देख लीजिए प्लीज। कैन यू रीड सर प्लीज। मनोज नरवाने जी इट्स अ ट्वीट। दैट सेस हेलो फ्रेंड्स। माय बुक इज अवेलेबल नाउ। जस्ट फॉलो द लिंक। हैप्पी रीडिंग। जय हिंद। करो यार। दिस इज़ अ ट्वीट दैट मिस्टर नारायण नरवाने हैज़ मेड। यू कैन लुक इंटू द ट्वीट। सो द पॉइंट आई एम मेकिंग इज़ आइदर मिस्टर नरवाने इज़ लंग एंड आई बिलीव द आर्मी चीफ ओके। आई डोंट थिंक ही विल लाइ पेंग्विन इज़ लाइंग। समबडी नीड्स टू बोथ कैन नॉट बी टेलिंग द ट्रुथ। ओके। पंकज जी, जब किताब छपी ही नहीं तो फिर हाथ में कैसे आ गई? और फिर पेंग्विन झूठ बोल रही है। पूर्व सेना प्रमुख झूठ बोल रहे हैं। पूर्व सेना प्रमुख के एक ट्वीट के बारे में राहुल गांधी कह रहे हैं। हम और ये ट्वीट है 151 2023 की हम जिसमें पूर्व थल सेना अध्यक्ष लिखते हैं हेलो फ्रेंड्स माय बुक इज अवेलेबल नाउ जस्ट फॉलो द लिंक हैप्पी रीडिंग। हम राहुल गांधी ने यहां तक तो पढ़ा लेकिन उसी ट्वीट में नीचे की तस्वीर वो शायद बताना भूल गया जानबूझकर नहीं बताया। उसी ट्वीट में लिखा हुआ क्या है? प्री ऑर्डर नाउ हम होता क्या है रोहित कि जब कोई किताब आने वाली होती है तो एडवांस बुकिंग आप करते हैं। हम किताब आई नहीं है लेकिन आप बुक कर कर सकते हैं कि जैसे ही छपेगी वैसे ही आपको अवेलेबल हो जाएगी। इसी को कहते हैं प्रीआर्डर। हम तो मुकुंद नरवनी साहब ने 151 2023 को जो ट्वीट किया है उसका मतलब यह है कि आने वाली किताबें आप चाहे तो बुक कर सकते हैं लिंक पे क्लिक करके इसको लेके राहुल गांधी कह रहे हैं कि देखिए अवेलेबल है प्रीआर्डर नाउ गड़बड़ा दिया हम अब मैं उसी जो 151 2023 को मनोज नरव साहब ने जो किया था हम तो उसके आप रिप्लाई में जाइए एक महिला है पूनम पांडे हम और उन्होंने तुरंत ऑर्डर किया है और बड़ा हैप्पीली वो बता रहे हैं कि मैंने ऑर्डर कर दिया है और बता रहा है कि एक महीने बाद मुझे अवेलेबल हो जाएगा। उन्होंने तारीख बताया है। उसी महिला ने एक और ट्वीट किया है और अब ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि मैं हां मैंने ऑर्डर किया था। लेकिन Amazon से आया कि नॉट अवेलेबल और मुझे मेरे पैसे वापस मिल गए थे। इसका मतलब कि किताब नहीं थी। वो एडवांस बुकिंग हो रही थी उस किताब की जिसके बारे में राहुल गांधी कह रहे हैं कि Amazon पे अवेलेबल है। अब एक और झूठ राहुल गांधी ने कहा है। हम जब इन सब मामलों में फंसे तो राहुल गांधी ने कहा कि विदेशों में अवेलेबल है। भारत में अवेलेबल नहीं है। हम वो भी झूठ। क्योंकि अमेज़न की पॉलिसी साफ-साफ आप जाके पढ़ लीजिए। कोई भी दर्शक पढ़ सकते हैं कि ये किताब पहले भारत में अवेलेबल होती है जो इंडियन राइटर्स लिखते हैं और जब तक भारत में अवेलेबल नहीं होती बाहर नहीं अवेलेबल हो सकती। हम राहुल गांधी चार झूठ एक साथ बोले। पहला किताब उनके पास है। अगर किताब उनके पास है तो कहां से उनको मिली ये नहीं बता रहे हैं। दूसरा झूठ उन्होंने कहा कि मुकेश नरवाने ने ऑथेंटिकेट किया है। यह बिल्कुल झूठ।
नरण साहब ने कहा कि बिल्कुल नहीं। उन्होंने बकायदा पेंगुमिन के ट्वीट को रिपीट करके कहा कि दिस इज द स्टेटस ऑफ द बुक मतलब कि नहीं छपी। हम तीसरा झूठ बोला कि Amazon पे अवेलेबल है। चौथा झूठ बोला कि विदेशों में अवेलेबल है। पांचवा इसमें मेरा सवाल है कि जो तीसरे दिन उन्होंने पत्रकारों को किताब दिखाई जो लेकर घूम रहे हैं वह आई कहां से? सर यही तो देखिए या तो लेखक ने दी होगी हम या पब्लिशर ने दी होगी हम और अगर इन दोनों ने नहीं दिया क्योंकि दोनों ने बकायदा लिखित रूप से कहा है कि हमने तो नहीं दिया भाई हम पेंग्विन ने कहा कि भाई छपी नहीं नरवाना ने कहा कि ये स्टेटस है उनके पास ये बुक आई कहां से और इसी की जांच होनी है बिलकुल क्योंकि क्यों मामला से क्यों डिस्कशन कर रहा हूं किताब पे जो है बिलकुल पंकज जी आता हूं लेकिन राहुल गांधी को सुना देता हूं एक बार फिर उसके बाद राहुल गांधी को यहां पर फिर से सुनाता हूं फिर आपसे आगे सवाल करता हूं हेल्थ हियर हियर इज अ ट्वीट फ्रॉम मिस्टर नरवाने ये देख लीजिए प्लीज कैन यू रीड सर प्लीज मनोज नरवाने जी इट्स अ ट्वीट दैट सेस हेलो फ्रेंड्स माय बुक इज अवेलेबल नाउ जस्ट फॉलो द लिंक जी। हैप्पी रीडिंग। जय हिंद। दिस इज अ ट्वीट दैट मिस्टर नारा नरवाने हैज़ मेड। यू कैन लुक इंटू द ट्वीट। सो द पॉइंट आई एम मेकिंग इज आइदर मिस्टर नरवाने इज़ लाइंग। एंड आई बिलीव द आर्मी चीफ। ओके, आई डोंट थिंक ही विल लाई। l। जनरल नारावानी हैज़ ट्वीटेड एज़ आय जस्ट राइट टू यू दैट प्लीज बाय माय बुक। एंड आई। अब पंकज जी, मेरा सवाल यह है। गांधी को 5 साल जेल हो सकती है इसी किताब के मामले में और इस तरीके की बातें करने पे। इसके बारे में बताइए।
देखिए देखिए ये मामला गंभीर क्यों है उसे पहले समझिए कल को जाके कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक होती है। बहुत सारे लोग मौजूद रहते हैं। हम उसमें से कोई व्यक्ति बाद में जाके ये लिखे कि भारत तो पाकिस्तान पे हमला करने के लिए राजी था और मैंने तो प्रधानमंत्री को बोला भी था लेकिन प्रधानमंत्री ने मना कर दिया। हम ये लिख सकता है वो डिस्कशन के समय कई तरह की बातें होती है हम अपने इंटेलिजेंस को लेके अपने दूसरी चीजों को लेके उसी तरह आर्मी में बहुत सारे सेना के डिप्लॉयमेंट को लेके बातचीत हो सकती है कि हमारी सेना यहां यहां है अपने अपने बहुत सारे एजेंट्स को लेके बातचीत हो सकती है कल को जाके अगर ये किताब लिखने लगे कोई और अगर सार्वजनिक हो जाए तो देश की क्या स्थिति होगी हम इसीलिए बनाया गया है सेक्रेट सर्विस एक्ट कि आप नहीं कर सकते यह चीज और डिफेंस मिनिस्ट्री की परमिशन नहीं है और अगर डिफेंस मिनिस्ट्री की परमिशन नहीं है और किसी के हाथ में वो किताब है तो अपने आप में उस पे केस हो सकता है। ये कुछ इसी तरह है रोहित कि आपके हाथ में बंदूक है।
हम आपने कहा कि मुझे किसी ने दी। हम अब दी नहीं दी वो तो बाद में पकड़ा जाएगा। लेकिन सबसे पहले तो आपको उठा के जेल में डालेगा। बिल्कुल क्योंकि आपके हाथ में है वो हम अब राहुल गांधी के हाथ में तो है तो प्रथम दृष्ट्या तो अनप्लिश्ड बुक जिसको डिफेंस मिनिस्ट्री की क्लीयरेंस नहीं मिली वो बुक इनके हाथ में है हम दूसरी बात अगला सवाल ये होगा कि आपको दी किसने हम कहां से मिली ये अब जिसने दी है वो भी जाएगा अगर मुकुंद नरवाने ने दी है तो मुकुंद नरवाने का पूरा पेंशन पूरी फैसिलिटीज वो सारी रद्द की जाएगी विष्णु विष्णु भागवत थे एक पूर्व सेना अध्यक्ष उन्होंने सिर्फ इतना कह दिया था कि मेरे से कम मेरिट वाले को प्रमोशन दिया मुझे नहीं दिया इसी में उनका सारा नौकरी चला गया था हम मतलब सेना के अनुशासन में चलना होगा सीधी सी बात है बिल्कुल और मुझे नहीं लगता है कि मनोज मुकुंद नरण ने इनको दी होगी वह बहुत डेकोरेटेड ऑफिसर हैं। मुझे नहीं लगता कि उनसे इनको मिला होगा। इनको कहां से मिला यह बात इनको बताना होगा। या तो पब्लिशर के एंड से कुछ गलती हुई है हम या फिर ये कहीं से फर्जी किताब लेकर आए हैं मतलब और अगर ऐसा भी किया है फिर भी सजा हुआ है उसमें 5 साल तक की जेल हो सकती है और उसमें और उसमें क्या है ना कि पहले प्रूफ नहीं करना होता है पहले आपको जेल में जाना होगा तब आप प्रूफ कीजिए कि मैं निर्दोष हूं हम तो अगर यह साबित हुआ जो कि प्रथम दृष्ट्या सही लग रहा है तो पहले तो इनको उठा के 5 साल के लिए डालेगा हम और उसके बाद कुछ हो सकता ठीक है पंकज जी तो फिलहाल एक किताब जिसकी चर्चा राहुल गांधी लगातार कर रहे थे हालांकि सदन के पटल पर उन्होंने किताब नहीं रखी आर्टिकल केवल दिखाया पटल पर किताब क्यों नहीं रखी गई वो मैं बताया मैंने बता दिया कि वहां पर सब कुछ डॉक्यूमेंटेड हो जाता जिंदगी भर के लिए हो जाता सदियों तक के लिए हो जाता और फिर उस पर अलग से एक्शन हो सकता था उस पर फिर लोकसभा स्पीकर अपनी तरह से एक्शन ले सकते थे अगर ऐसा मामला कुछ निकलता कि झूठ बोला जा रहा है।
तो इसीलिए पटल पर नहीं रखा गया और बाहर दिखा दिया गया। दूसरी बात पंकज जी ने जो समझाई कि जिस तरीके से मामला दर्ज हुआ है 5 साल तक जेल और उसमें भी पहले जेल उसके बाद आगे की कारवाई तो क्या राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं? क्या राहुल गांधी ने वाकई में फ्रॉड किया?
