माननीय माननीय अध्यक्ष ने बड़ा सोच समझ करके एक दलित व्यक्ति को और उनके सभापति किया लेकिन ये राहुल गांधी के इशारे परोजिंग द बफकेशन टोल पेपर एंड टॉस द पीसेस अराउंड द पीएम स्पीच इंक्लूडिंग एनी अशोरेंसे ही वांटेड टू गिव टू द रेड 118 एमपीज ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ साइन कर दिया अविश्वास प्रस्ताव। जी हां दोस्तों संसद में आज भारी बवाल देखने को मिला। कल से ही इस मामले पर चर्चा हो रही थी और आज यह हो गया। इसके साथ ही आखिरकार विपक्ष के आगे सरकार को भी झुकना पड़ गया। और यही नहीं दोस्तों लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की परेशानी यहीं पर खत्म नहीं होती। इसके अलावा पत्रकार प्रशांत कनोजिया ने ओम बिरला को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है जिसकी सच्चाई अब ग्रॉक बता रहे हैं दोस्तों।
जी हां तो कैसे ओम बिरला की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं इसलिए आप अंत तक जरूर देखिएगा। तो आखिरकार विपक्ष के आगे झुकी सरकार और दोपहर 2:00 बजे संसद चल पड़ी। वो संसद जो पिछले कई दिनों से नहीं चल रही थी। मगर दोस्तों इस बीच जो बवाल देखने को मिला वो हैरतंगेज था। जिस बात की चर्चा केवल खबरों में हो रही थी कि ऐसा होगा वो असल में आज हो गया। ओम बिरला के खिलाफ आज सदन में अविश्वास प्रस्ताव जारी हो गया और ऐसा होते ही अविश्वास प्रस्ताव के सबमिट होते ही संसद चल पड़ी। दोस्तों, आप सभी जानते हैं कि विपक्ष को हफ्ते भर से संसद में बिल्कुल भी बोलने नहीं दिया जा रहा था। बार-बार कांग्रेस पार्टी द्वारा यह कहा जा रहा था कि एलओपी को बोलने दिया जाए, राहुल गांधी को बोलने दिया जाए।
लेकिन इसी बीच आज एक बड़ी खबर आ गई। दोपहर 1:00 बजे इंडिया गठबंधन के सदस्यों ने दोस्तों ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस थमा दिया और लगभग 118 एमपीज हैं जिन्होंने ओम बिरला के खिलाफ सेक्रेटरी जनरल को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है और इनमें सभी पार्टियां शामिल हैं। कांग्रेस है, आरजेडी है, उसके सांसद हैं। समाजवादी पार्टी के भी सांसद हैं। लेकिन दोस्तों, तृणमूल कांग्रेस ने इससे अपने आप को अलग कर लिया। तृणमूल कांग्रेस के सांसद मौजूद ही नहीं थे। और दोस्तों, मैं आपको यह बता दूं, कि आज संसद की कार्रवाही में ओम बिरला तक शामिल नहीं हुए। तो जाहिर सी बात है उनको पता था कि आज क्या होने वाला है।
हालांकि कारण उनका ना होने का कुछ भी हो सकता है। मगर वो आज के दिन मौजूद नहीं रहे। संसद की कार्रवाही में तो नहीं रहे तो यह बड़ी बात है। तो ये चलिए एक तरफ एक बात हो गई। और अभी देखना होगा कि अविश्वास प्रस्ताव कितना सक्सेसफुल होता है। मगर एक बात जरूर है स्पष्ट है दोस्तों कि जब तक बहुमत नहीं होती तब तक ओम बिरला का बाल भी बांका नहीं हो सकता। मगर ऐसे में दोस्तों किरण रजीजू ने एक वीडियो शेयर कर दी है Twitter पर और वो वीडियो ऐसी है संसद का एक ऐसा एंगल है जो आम जनता को नजर नहीं आता है। ऐसी वीडियो को किरण रजीजू ने शेयर किया। शेयर करके वह खुद ही फंस गए हैं। क्योंकि यह वीडियो दोस्तों उस दिन का है जिस दिन दोस्तों प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलना था। मगर ऐसा हो नहीं पाया क्योंकि विपक्ष की महिला सांसदों ने खूब हंगामा मचाया था।
लेकिन थोड़ी सी उसकी सच्चाई मैं आपको अभी बता दूं। इस वीडियो को लेकर सवाल तो यह भी खड़ा होता है कि संसदीय कार्य मंत्री किरण रजीजू के पास यह वीडियो आया कहां से? अब आप देखिए इस वीडियो को शेयर करके। के दरअसल रजीजू खुद भी फंस गए क्योंकि दोस्तों इस वीडियो में ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा है जिसको लेकर के आपत्ति जाहिर की जाए। देखिए महिला सांसद यहां पर आ रही है जहां पर पीएम बैठते हैं वहां पर आ रही है लेकिन वो पीएम की कुर्सी पर नहीं चढ़ी हुई उनकी सीट पर नहीं चढ़ी हुई है। जो पहले बोला गया था कि कुछ महिला सांसद उनकी सीट पर चढ़ गई। तो ऐसा होता तो दिखाई नहीं दिया।
वो उनकी सीट के बाहर हां खड़ी हुई है। मतलब अगर पीएम चाहते तो आराम से आकर वहां पर बैठ सकते थे। जगह भी थी। हाथ में पोस्टर्स हैं महिलाओं के। ऐसे में मोदी जी भाषण भी दे सकते थे। लेकिन दोस्तों राई का पहाड़ कैसे बनाया जाता है वो आपने बीते दिनों देख लिया। अध्यक्ष महोदय ने और कल उनके सभापति लेकिन गांधी ने राहुल गांधी के इशारों पर उनके हमारे नाम 11 थे उनके ऊपर काज फाड़ करके भेजे गए माननीय अध्यक्ष महोदय ने बड़ा सोच समझ के एक दलित व्यक्ति को और उनके सभापति करने का लेकिन राहुल गांधी ने यह राहुल गांधी के इशारों पर उनके हमारे पांच के लिए जो कुर्सी पे बैठे थे उनके ऊपर कागज फाड़ के फेंके गए। देखा आपने आगे वीडियो में दोस्तों पूरी आवाज को म्यूट भी कर दिया गया है और मैं आपको बता दूं कि एक ऐसे मौके पर पूरी आवाज को म्यूट किया गया है। असल में विपक्षी सांसद जितनी भी थी वहां पर वो सत्ता पक्ष के नेताओं से यह कहती हैं कि मनमोहन सिंह जी के साथ भी यही चीज हुई थी। बल्कि इससे बुरा हाल हुआ था। वो बोल रहे थे खड़े होकर और सामने तमाम विपक्ष उनके पोस्टर लेकर खड़ा था। हंगामा कर रहा था। बिल्कुल उनके सामने खड़ा था। लेकिन फिर भी एक्स पीएम मनमोहन सिंह जी ने बोलना बंद नहीं किया। द सीन इन द राज्यसभा क्वाइट रेमिनसेंट ऑफ द टर्बुलेंस तेलंगाना बिल हैज़ कॉज्ड इनसाइड एंड आउटसाइड पार्लियामेंट व्हाइल पीएम मनमोहन सिंह वास इंटरवीनिंग इन द डिबेट ऑन द आंध्र प्रदेश रिऑर्गेनाइजेशन बिल मेंबर्स अपोजिंग द बफरकेशन टोर पेपर्स एंड टॉस द पीसेस अराउंड। तो ऐसे में आप बताइए कि 56 इंची सीना किसका है? यह जो मुद्दा जैसे ही वीडियो में दोस्तों शुरू होता है, वैसे ही पूरी आधे से ज्यादा वीडियो को म्यूट कर दिया है किरण रजिजू ने। तो, अब आप ही बताइए दोस्तों, कि पीएम को इतना प्राउड पीएम बताया जाता है, शक्तिशाली बताया जाता है। हमारे पीएम से हर कोई डरता है।
यह हर किसी की सुलह करवाते हैं मगर उनकी हालत इतनी खराब है कि ये अपने ही साथी महिला सांसदों से डर गए हैं। यही है इनका 56 इंची सीना। एक छोटे से प्रदर्शन से ये इतना घबरा गए। जबकि अपने वक्त में इसी पार्टी के तमाम नेताओं ने कांग्रेस पार्टी के मनमोहन सिंह का जमकर विरोध किया लेकिन वो डटे रहे और भाषण को कंप्लीट किया अपने। उन्होंने इस तरह की कोई बात नहीं बोली कि मेरे ऊपर हमला किया गया या हमला हो सकता था मेरे ऊपर। विपक्ष ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया। इस तरह की दोस्तों कोई बात उन्होंने नहीं बोली। जिस तरह की बातें आज बोली जा रही हैं। तो दोस्तों यहां से भी पार्टी का फॉल्स नैरेटिव सामने आता है। और रही बात ओम बिरला की जो लगातार पक्षपात दिखा रहे थे जिसके चलते आज उन्हें इतना शर्मसार होना पड़ रहा है कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जारी कर दिया गया। एक स्पीकर के लिए इससे ज्यादा शेमफुल बात और क्या ही हो सकती है कि उसके सांसद उस पर भरोसा नहीं करते। और दोस्तों इस मोमेंट को विटनेस करने के लिए वो पहुंचे भी नहीं। और अब तो और भी ज्यादा मुश्किलों के हालात जो है उनके बन गए क्योंकि ग्रॉक ने उसको लेकर एक सच बोल दिया है। यह ट्वीट देखिए दोस्तों प्रशांत कनोजिया ने ग्रॉक से यह सवाल पूछा कि ओम बिरला के इतिहास का एक सवाल है यह जिसमें लिखा है किस मुख्यमंत्री ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ क्रिमिनल केस वापस ले लिया।
अब देखिए ग्रॉक ने क्या जवाब दिया। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने 2012 के एक मामले में ओम बिरला के खिलाफ मुकदमा वापस लिया जिसमें गैर कानानूनी तरीके से इकट्ठा होने और बाधा डालने का मामला शामिल था। तमाम आईपीसी लगी हुई है जिसे राजस्थान हाईकोर्ट ने जनवरी 2024 में मंजूरी दे दी थी।
तो दोस्तों दरअसल ओम बिरला समेत 47 भाजपा नेताओं के खिलाफ नेशनल हाईवे को जाम करने का मुकदमा दर्ज था जिसे वापस लिया गया। तो जो ओम बिरला आज विपक्ष के प्रदर्शन से इतना घबरा रहे हैं मोदी जी को बचा रहे हैं। कल वो भी जमकर प्रदर्शन कर रहे थे। मगर वो अपने दिन भूल गए। जबकि यहां तो एक नॉर्मल सा प्रदर्शन था जिसको इतना बड़ा बनाया गया। जबकि ओम बिरला ने तो हाईवे ही जाम करवा दिया था।
