लता मंगेशकर को किसने दिया धीमा ज़हर?

स्वर साम्रा के नाम से मशहूर लता मंगेशकर को पूरी दुनिया इसी नाम से जानती है। लेकिन जन्म के समय उनका नाम हेमा रखा गया था। वो 28 सितंबर 1929 को इंदौर में संगीतकार पंडित दीनाना मंगेशकर के घर जन्मी थी।

बाद में अपने पसंदीदा मराठी नाटक से प्रेरित होकर नायिका लतिका के नाम पर अपनी बेटी का नाम लता रख दिया। यही नाम भारतीय संगीत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा हुआ है। लता जी ने बहुत कम उम्र में संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दी थी। और महज 13 की उम्र में उन्होंने पहला गाना रिकॉर्ड किया।

आगे चलकर उन्होंने हिंदी, मराठी, बंगाली, तमिल,तेलुगु, गुजराती समेत 36 से अधिक भाषाओं में गीत गाए। और भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गायिकाओं में से एक बन गई या फिर यूं कहें कि भारत की सबसे प्रभावशाली गायिका बन गई। लेकिन उनके जीवन का सबसे भयावह दौर 1963 में आया। जब किसी ने उन्हें धीमा जहर देकर मारने की कोशिश की। खुद लता जी ने एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था, कि उस समय उनकी हालत बहुत खराब हो गई थी। वो बिस्तर से उठ भी नहीं पाती थी और बिना सहारे के चलना बहुत मुश्किल हो गया था।

डॉक्टर्स ने पुष्टि की थी कि उन्हें धीरे-धीरे असर करने वाला जहरदिया गया है। लगभग 3 महीने के इलाज के बाद अपने अदमय साहस के बाद फिर से लता मंगेशकर स्टूडियो वापस लौट सकी। जी हां, लता की आवाज किसी को इतना ज्यादा चुभने लगी कि उन्हें स्लो पोइजन दिया गया। जब लता जी से यह पूछा गया कि यह किसने किया तो उन्होंने कहा कि शक तो था लेकिन मेरे पास कोई ठोस सबूत ना होने के कारण मैंने किसी पर कानूनी कार्यवाही नहीं की। ना ही इसे लेकर ज्यादा बात की। इस मुश्किल समय में मशहूर गीतकार मजरूम सुल्तानपुरी उनकी सबसे बड़ी ताकत बने। वो रोज शाम को उनके घर आते, कविताएं सुनाते और लता जी काहौसला बढ़ाते।

लता जी ने बाद में कहा था कि अगर मजरूम साहब साथ ना होते तो शायद मैं इतनी जल्दी उभर नहीं पाती। कहा जाता है कि उनके घर का रसोइया ही रोज उनका खाना बनाता था। लेकिन लता जी के बीमार पड़ते ही वो अचानक गायब हो गया था और कभी वापस नहीं लौटा। इसी वजह से परिवार वालों को लता जी के रसोइए पर शक हुआ। उनके परिवार को इस बात पर संदेह था कि उस रसोइए ने किसी के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया है। सुर कोकिला लता जी तो अब हमारे बीच नहीं रही।

लेकिन यह किस्से और उनके अमर गीत आज भी उन्हें हम सभी के बीच जिंदा रखे हुए हैं।लता मंगेशकर जो भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं। यह नाम संगीत तक ही सीमित नहीं बल्कि यह नाम भारतीय संस्कृति और कला की पहचान बन चुका है। यह नाम भारत की शोभा बन चुका है। जब तक संगीत जिंदा है

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