ईरान और अमेरिका के बीच लगातार जो है वह तनाव बनता जा रहा है और बातचीत की टेबल पर इसे सुलझाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन हम आपको बता दें कि ईरान इस वक्त खूब सजा हुआ है और वहां के लोग खूब जश्न मना रहे हैं। इस तनाव के बीच ईरान की जश्न करती हुई तस्वीरें, पटाखे और होते हुए ईरान की नई तस्वीर।
इसके पीछे का क्या कारण है? तो आपको बता दें कि आपने कई दफा देखा होगा कि जो ईरान के सर्वोच्च नेता हैं जिनका नाम रहबर मुअज्जम सैयद आयतुल्ला अली खामन है वो हमेशा अपने भाषणों और खुदबों में इमाम मेहंदी का जिक्र करते हैं और अपने भाषणों में हमेशा उनको कोट करते हैं। अब आपको बता दें कि 15 शाबान यानी कि जो शबे बरात का दूसरा दिन होता है। बताया जाता है कि इमाम मेहंदी का उस दिन जन्मदिन है। इमाम मेहंदी शिया मुसलमानों के 12वें इमाम माने जाते हैं और उन्हें हजरत मेहंदी अलमदी भी कहा जाता है।
वो इस समय दुनिया में छिपे हुए हैं। गायब हैं। ऐसा शिया समुदाय के लोगों का मानना है और उनका अकीदा है कि एक दिन वो वापस आएंगे ताकि दुनिया में न्याय और सच्चाई स्थापित की जा सके। उनका आना अन्याय, भ्रष्टाचार और धर्म को खत्म करने के लिए माना जाता है। शिया धर्म में उनकी प्रतीक्षा, लोगों के धैर्य, ईमानदारी और नैतिक जीवन की प्रेरणा देती है। इसी कारण से कई शिया नेता और धर्म गुरु अपने भाषणों में उनका जिक्र करते हैं ताकि लोग सही से काम करें और अन्याय के खिलाफ लड़े। ईरान और अमेरिका के बीच लगातार कुछ दिनों से टेंशन चल रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से गहरा तनाव बना हुआ है। जिसे प्रॉक्सी वॉर कहा जाता है। यह टकराव ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और ईरान के प्रोटेस्ट को लेकर चल रहा है। ईरान एक शिया इस्लामिक देश है। आयतुल्लाह अली खामने के भाषणों में अक्सर इमाम मेहंदी का जिक्र है। इमाम मेहंदी शिया मुसलमानों के 12व इमाम माने जाते हैं और उन्हें इस विश्वास के साथ देखा जाता है कि वो दुनिया में न्याय और सच्चाई स्थापित करेंगे। शिया धर्म के अनुसार इमाम मेहंदी इस वक्त गैब में है यानी गायब है और एक दिन वापस आकर अन्याय को खत्म करेंगे। कामिनी उनके नाम का जिक्र इसलिए करते हैं ताकि लोग धैर्य रखें, न्याय के खिलाफ लड़े और नैतिक रूप से सही रास्ते पर चलें।
इसका मतलब यह है कि सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि समाज और धर्म में न्याय और सही काम करने की प्रेरणा ली जाए। इमाम मेहंदी के बारे में अगर आपको बताएं तो वो बता दें कि पैगंबर मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम के सीधे वंशज हैं। वो हजरत अली और हजरत फातिमा के घराने [संगीत] से आते हैं। हजरत अली पैगंबर के चचेरे भाई और दामाद थे और हजरत फातिमा पैगंबर साहब की बेटी थी। इसलिए इमाम मेहंदी मोहम्मद [संगीत] साहब के परिवार से जुड़े हुए हैं। और इसी वजह से उन्हें शिया मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र और खास माना जाता है। इमाम मेहंदी का जन्म 15 शाबान जो शबे बरात के दूसरे [संगीत] दिन पड़ता है। समारा इराक में हुआ था। यही वजह है कि शिया मुसलमान इस दिन को बहुत पवित्र मानते हैं और बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। शबे बरात और इमाम मेहंदी के जन्म के इस खास मौके पर लोग जश्न मनाते हैं, दुआएं पढ़ते हैं, पटाखे फोड़ते हैं। ईरान और कई शियाबादी क्षेत्रों में इस दिन पूरे शहर को सजाया जाता है और मस्जिदों में रोशनी की जाती है ताकि इमाम मेहंदी की पैदाइश और उनकी न्यायपूर्ण उपस्थिति की याद मनाई जा सके। जब ईरान के नेता जैसे आयतुल्लाह खान ने अपने भाषणों में इमाम महदी का जिक्र करते हैं तो यह सिर्फ धार्मिक बात नहीं होती बल्कि एक संदेश भी है।
इसका मतलब है कि ईरान अपने नैतिक और धार्मिक सिद्धांतों पर अडिग है और न्याय और सच्चाई के लिए लड़ता रहेगा। साथ ही ये उनके दुश्मनों के लिए चेतावनी दी कि ईरान अन्याय और अत्याचार के खिलाफ धैर्य और रणनीति के साथ लड़ाई लड़ता है। इमाम मेहंदी के नाम का जिक्र यह दिखाया जाता है कि ईरान का रास्ता केवल राजनीति शक्ति के लिए नहीं बल्कि धर्म और न्याय के सिद्धांतों के अनुसार है। ईरान ने इससे पहले भी अपने भाषणों में हजरत अली यानी हैदर का जिक्र किया था और अमेरिका और बाकी शक्तियों को चेतावनी दी थी।
ऐसा करने का मकसद ये दिखाना है कि ईरान अपने धार्मिक और नैतिक सिद्धांतों पर अड़ी है और किसी भी न्याय या दबाव के सामने नहीं जुटेगा। हजरत हैदर अली जिन्हें न्याय और साहस का प्रतीक माना जाता है का नाम लेकर ईरान यह संदेश देता है कि सत्ता और धर्म का मार्ग दृढ़ता से खड़े हैं और अपने विरोधियों को चुनौती देने में पीछे नहीं हटेंगे।
