गाजियाबाद शहर में जान देने वाली 3 बहनों के पिता ने डायरी के राज़ खोल दिए।

4 फरवरी को गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन नाबालिक बहनों ने अपनी दे दी थी। कारण बताया गया कोरियन कल्चर के प्रति लड़कियों का लगाव और मोबाइल फोन का छीन लिया जाना।

केस में कुछ अपडेट सामने आए हैं हम उन पर बात करेंगे। पहला अपडेट बच्चों के कमरे से एक डायरी मिली जिसमें लिखा है वी लव कोरियन। इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है वो सब सच है। कोरियन हमारी जान थे। तुम नहीं जानते कि हम उन्हें कितना चाहते थे। लो अब देख लो सबूत।

अब तो यकीन हो ही गया होगा। जितना हम कोरियन पॉप को चाहते हैं, उतना तो तुम घर वालों को भी नहीं चाहते। शादी के नाम से हमें टेंशन होती थी। हम पसंद और प्यार करते हैं कोरियन से और शादी कर लें इंडियन से। ऐसा कभी नहीं हो सकता। यह उम्मीद हमें खुद से भी नहीं है। इसी डायरी में बच्चियों ने कई जगह सॉरी भी लिखा है।

बच्चे कोरियन कल्चर से इतने ज्यादा प्रभावित थे कि तीनों ने खुद को निकनेम्स भी दे रखे थे। मोबाइल फोन से पता चला कि तीनों के निक नेम्स थे अलीजा, सिंडी और मारिया। ध्यान रहे यह उनके निकनेम्स हैं.

जो उन्होंने खुद को दिए थे। यह उनके ओरिजिनल नाम नहीं है। दूसरे अपडेट पर आते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बच्चियों ने सोशल मीडिया पर एक अकाउंट भी बनाया था जिसमें अच्छे खासे फॉलोअर्स थे। यह बात इनके पिता को कुछ दिन पहले ही पता चली थी जिसके बाद बच्चों से फोन छीन लिया गया था।

तीसरा अपडेट यह है कि आज तक से जुड़े हिमांशु मिश्रा ने लड़कियों के पिता से बात की। हालांकि वह घर के बाहर नहीं निकले। दरवाजे के पीछे से ही उन्होंने बताया कि वह खुद भी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। उनके ऊपर लाखों का कर्ज है। लड़कियों के पिता ने बताया कि बच्चियां भारतीय लड़कों के नाम से चिढ़ जाती थी। कोरियन कल्चर उनके ऊपर इस कदर हावी था कि उनकी कोरिया जाने की जिद थी। सुनिए जान लेने वाली तीन बहनों के पिता का पूरा बयान। जो बात चल रही थी कि बच्चों के कोरिया वाली कि वो उन्होंने अपना नाम तक बदल दिया था। जी। हां सर नाम बदल दिया था।

यह बात सच है और यह जो कल आप बता रहे थे कि गेम खेलते हैं तो क्या गेम वाली बात सही है जो आप कह रहे थे टास्क वो पुलिस कह रही है टास्क वाली कोई जानकारी नहीं आई है वो एडिट का बच्चा उसके अंदर उन्होंने पर्सनालिटी बना ली थी ऐसी रीज़न ये है कि उन्होंने अपने नाम चेंज कर लिए थे वो कह रहे थे पापा हम कोरिया जाएंगे कोरिया जाना हमें कोरिया ले चलो अरे क्यों हम तो इंडियन है हम्म इंडियन के नाम से उन्हें गुस्सा आ जाता था अच्छा ठीक है जी अच्छा इंडियन के नाम से गुस्सा आ जाता था बिलकुल बिल्कुल सही बात है इंडियन के खाना नहीं खाते थे लेते वो आखरी बार कब हम ये चाहते हैं.

देखो जी हमारी बात सुनो हम ये चाहते हैं कोरिया ड्रामा कोरियन वीडियो कोरियन जो भी चल रहा है ना मतलब वीडियो वगैरह जो इससे बच्चे हो रहे हैं एडिक्ट वो चीज बंद होनी चाहिए इंडिया में कब से इन्होंने देखना शुरू किया इंडिया में ये बताओ इंडिया में इंडिया की चीज़ चलनी चाहिए ना कोरिया क्यों चल रही है हम कितने साल से देखना शुरू किया था वो कब से देख रहे थे.

ऐसा तीन एक साल से देख रहे थे तीन चार साल से नहीं बात ये हुई थी मैंने कहा था बेटा सो जाओ खाना खा लिया कह रहा बाबा सो रहे हैं कह अरे बाबा हमें कोरिया ले चलो हमें कोरिया कोरिया नहीं जाओगे क्या करोगे और जाके ठीक है तो आपने मोबाइल उनका कब से बंद कर दिया था? मोबाइल ले लिया था क्या आपने उनसे? मोबाइल मैंने उसी दिन शाम को 7:00 बजे लिया था। वो 10:00 बजे दोबारा ले गए थे।

अच्छा। फिर 12:00 बजे तक उन्होंने मोबाइल देखा है। अच्छा अच्छा। फिर 12:00 बजे मोबाइल में दोबारा वाइफ वापस लेके आई है। मैं तो नहीं कहता 12:00 बजे वाइफ गई थी वो लेके आई है। अच्छा। अच्छा। उसके बाद वो वो कह रहे मैंने पूछा कि सो गए कि हां सो गए। उसके बाद वो कंबल से उठे चुपचाप। दूसरे वाले रूम में गए हैं। और मंदिर वाले कमरे में जाके उन्होंने अंदर से लॉक लगा लिया। हम्म। उसके बाद ये हमें नहीं पता। उसके बाद तो नीचे मिले वो। बस। उन्होंने ऐसे कमरे में अलग-अलग लाइनें लिख रखी थी। आपने कभी ध्यान नहीं दिया कहीं पे लिखा आई एम वेरी अलोन कभी वहां पे अलमीरा वगैरह अड़े हुए थे। वो चुप-छुप के लिखते थे क्योंकि मैंने गुस्सा करा था एक दफा क्या लिखते हो तो वो छुप के लिखने लग गए थे। मैंने उनके फोन में वीडियो देखी थी सारी कोरियन वीडियो कोरियन वीडियो चलती थी। वो कौन सी लड़कियां लड़के होते हैं डांस करते हैं।

कोरियन ड्रामा जो होता है ड्रामा वो सब देखते हैं। ठीक है ना? समझाने की कोशिश की भाई साहब आपने जैसे प्यार से इस सर बार प्यार से मैं उन्हें प्यार से ही समझाता था। स्कूल भेजने की कभी भेज रहे थे स्कूल वो दो साल से नहीं जा रहे थे क्यों नहीं जा रहे थे खुद ही कह रहे थे हमें कोरिया भेज दो व पढ़ेंगे अरे मैंने कहा क्या कोरिया ट्यूशन वाली मैडम भी कह रही है सर आप एडमिशन कराओगे बच्चे पढ़ेंगे नहीं पहले इनके माइंड को चेंज करो मैंने माइंड चेंज है मैंने ये आपको कब पता चला कि वो इतना कोरियन कल्चर की तरफ जा रहे हैं ये मुझे अभी खाली में दो तीन महीने से ज्यादा पता लगा तो मैंने और उनके सख्ताई कर दी थी वो फोन देने में तो किसी डॉक्टर से कंसल्ट करने की कोशिश नहीं की कोई साइकेटिस्ट या किसी और ऐसा नहीं था मैंने खाली ये सोचा जैसे हम भी शक्तिमान वगैरह देखते हैं तो चलो भाई ठीक जिद कर रहे होंगे.

ऐसा ऐसा गुस्सा नहीं करा ना उन्होंने नहीं तो नहीं ऐसा नहीं करा ऐसा करता तो मैं भी सोचता क्या ये अबॉर्मल ये एब्नॉर्मल बिहेवियर है है ना ऐसा करता तो मैं भी सोचता ये अबॉर्मल बिहेवियर है लेकिन ऐसा नहीं करा बस लेकिन ये था उन्होंने मेरे सामने दिखाया नहीं मम्मीियों के सामने दिखाया उन्होंने इग्नोर करा चौथे अपडेट पर आते हैं। आज तक से जुड़े अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक अपनी डायरी में लड़कियों ने चौथी बच्ची का भी जिक्र किया था।

लिखा था कि उसे भी वह अपनी तरह कोरियन बनाना चाहती थी। लेकिन परिवार वालों ने उन्हें मौका ही नहीं दिया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 3:00 से 4 फरवरी की दरमियानी रात करीब 2:00 बजे भारत सिटी की नौवीं मंजिल में रहने वाली तीन बहनों ने अपनी जान दे दी थी। चश्मदीद के मुताबिक दो बहनों ने पहले कदम पीछे ले लिए थे।

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