Zomato के फाउंडर और सीईओ दीपिंदर गोयल नाम सुनते ही दिमाग में बिजनेस, स्टार्टअप और बड़े-बड़े फैसलों की तस्वीर बनती है। लेकिन इन दिनों दीपिंदर गोयल चर्चा में हैं। अपने किसी बयान या बिजनेस डील की वजह से नहीं बल्कि एक अजीब से गैजेट की वजह से। एक ऐसा गैजेट जो ना मोबाइल है ना हेडफोन ना ही कोई फैशन एक्सेसरीज। हाल ही में जब दीपेंद्र गोयल एक शो पर पहुंचे तो उनकी बातों से ज्यादा लोगों की नजर उनके माथे पर चिपकी एक छोटी सी डिवाइस पर टिक गई।
सोशल मीडिया पर सवालों की बाढ़ आ गई। यह क्या है? कान के पास क्या चिपका रखा है? क्या यह कोई नया टेक गैजेट है? चलिए आपको इस रहस्यमई गैजेट का एक-एक राज बताते हैं। दीपेंद्र गोयल के कान के पास लगी यह छोटी सी डिवाइस देखने में भले ही मामूली लगे लेकिन इसके पीछे की सोच काफी बड़ी और भविष्य से जुड़ी हुई है। इस डिवाइस का नाम है टेंपल। और यह कोई आम गैजेट नहीं बल्कि एक एक्सपेरिमेंटल ब्रेन हेल्थ वेरिएबल डिवाइस है। दीपेंद्र गोयल ने खुद बताया कि उनके परिवार में हेल्थ से जुड़ी समस्याओं की हिस्ट्री रही है। इसी वजह से यह डिवाइस डेवलप की गई है।
टेंपल नाम की इस डिवाइस का मकसद है दिमाग में होने वाले ब्लड फ्लो को रियल टाइम में मापना। आज की स्मार्ट वॉच या स्मार्ट रिंग्स दिल की धड़कन बता देती है। ऑक्सीजन लेवल बता देती है। लेकिन दिमाग के अंदर क्या चल रहा है यह नहीं बता पाती। टेंपल इसी खाली जगह को भरने की कोशिश है। दीपेंद्र गोयल ने बताया कि शुरुआत में इस डिवाइस को शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे गर्दन पर लगाकर टेस्ट किया गया।
लेकिन वहां से मिलने वाला डाटा पूरी तरह सटीक नहीं था। इसके बाद इसे माथे यानी कनपट्टी के पास लगाने का फैसला किया गया क्योंकि यहीं से दिमाग तक जाने वाले ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से मापा जा सकता है। यह एक ऐसा डिवाइस है जो खास मेडिकल ग्रेड टेप से चिपकाई जाती है। इसे लगाकर आप तैर सकते हैं, दौड़ सकते हैं।
वर्कआउट भी कर सकते हैं और यह अपने आप नहीं निकलती। हाथ से हटाने पर ही आराम से निकलती है। दीपेंद्र गोयल पिछले करीब एक साल से इस डिवाइस को रोजाना इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह रिसर्च उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने से जुड़ी है। खासतौर पर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि ग्रेविटी लंबे समय में हमारे शरीर और दिमाग तक खून पहुंचने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दीपेंद्र गोयल इस रिसर्च में अब तक करीब $25 मिलियन यानी लगभग $25 करोड़ खर्च कर चुके हैं।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ब्रेन हेल्थ पर नजर रखने वाले बेरेबल पर दुनिया भर में रिसर्च चल रही है। लेकिन आमतौर पर ऐसे डिवाइस लैब्स या सीमित ट्रायल तक ही सीमित रहते हैं। किसी बड़े बिजनेस लीडर को इसे रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते देखना यही वजह है कि टेंपल चर्चा का विषय बन गया।
फिलहाल टेंपल कोई मार्केट में बिकने वाला गैजेट नहीं है बल्कि एक रिसर्च टूल है। एक सोच है और शायद भविष्य की झलक भी। अब ब्रेन हेल्थ बेरेबल मेन स्ट्रीम बहस का हिस्सा बन चुका है। आने वाला वक्त बताएगा कि यह टेक्नोलॉजी आम लोगों तक कब और कैसे पहुंचेगी। लेकिन फिलहाल दीपेंद्र गोयल का यह छोटा सा डिवाइस एक बड़ी चर्चा को जन्म दे चुका है।
