ब्रॉट टू यू बाय सेंस डीएसपी नया सेंसडेंट डीएसपी नर्स को प्रोटेक्ट करें और इनामल को रिपेयर फील द रिलीफ विद सेंसडेंट डीएसपी सर से मिलने के लिए झूठी डीएम सर से मिलने के लिए झूठी आईडी बोलकर चले गए यह जनाब स्वित आईएएस है स्वोषित आईएएस वो होते हैं जिन्हें ना प्रीलिम्स की टेंशन होती है ना मेंस की मशक्कत और ना ही इंटरव्यू का डर इनका पूरा सिलेबस बस इतना होता है कि एक दिन उठो और पूरे आत्मविश्वास के साथ ऐलान कर दो कि अहम आईएस आसमी यानी कि आज से मैं आईएएस हूं। ना पढ़ाई ना परीक्षा ना चयन। बिना लाग लपेट के कहें तो एक फर्जी आईएएस।
मामला है बिहार के सारण जिले का। 2 फरवरी को यह शख्स खुद को यूपी कैडर का आईएएस बताकर सीधे सारण के जिला अधिकारी के दफ्तर में पहुंच गया। कहा कि वह किसी काम से सारण के जिला अधिकारी से मिलना चाहता है। युवक ने अपना नाम रितेश कुमार बताया। दावा किया कि वह 2022 बैच का आईएएस है और यूपी में तैनात है। शुरुआत में सब सामान्य लगा। लेकिन जैसे ही वह जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के सामने बैठा तो बातोंबातों में मामला गड़बड़ाने लगा। जिलाधारी ने जब उससे अपना पहचान पत्र मांगा तो युवक टालने लगा। यहीं से शक पक्का हो गया। थोड़ी पूछताछ के बाद युवक के जज्बात बदल गए और फिर उसने खुद ही मान लिया कि वो कोई आईएएस नहीं है। इसके बाद जिलाधिकारी के कहने पर सुरक्षा कर्मियों ने उसे पकड़ लिया और फिर नगर थाना पुलिस को बुलाया गया। पुलिस के सामने युवक ने अपनी सारी सच्चाई और कहानी बता डाली। कहां गए थे अभी आप? सर से मिलने के लिए झूठी मिलने। डीएम सर से मिलने के लिए झूठी आईडी भूल कर चले गए। क्या क्या बोले अपने आप को आप? सर से बोले कि मैं आईएएस हूं।
कहां के आईएस हैं? यूपी के तो क्या किस लिए गए थे डीएम से मिलने? मेरे फैमिली वाले को लोग वहां मार रहे हैं। घर मेरा तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं सर। तो इसके लिए आप सोचे कि आइए इस बार के डीएम साहब से मिले। से मिले। वहां क्या हुआ? डीएम साहब क्या बोले आपको? सर कुछ भी नहीं बोले। मैं पकड़े गया वहीं पे। कैसे पकड़े गए? मैंने गलती करके गया था तो पकड़े गया। वहीं पे माफी नहीं मांग रहा था। क्या बताएं थे? अपना परिचय कैसे दिए थे? किस बैच का यह? मैंने 2022 बैच बोला था। इसके पहले भी किसी आईएसएफ में नहीं नहीं किसी जिले के अधिकारी जो थे उससे मिल रहे थे। अमन सर को लेटर देने के लिए आए थे। मैं छपरा सदर के एसडीपीओ राम पुकार सिंह ने बताया कि युवक खुद को दूसरे राज्य का आईएएस बताकर जिलाधिकारी कार्यालय गया था। बातचीत के दौरान संदेह होने पर उसकी जांच कराई गई जिसमें वह फर्जी निकला। फिलहाल उसके खिलाफ कानूनी कारवाई की जा रही है। आदेश का मामला सामने आया। जिला पदाधिकारी महोदय समानालय में उपस्थित थे।
उनके आदेशपाल को यह बता के कि हम दूसरे स्टेट के आईएएस हैं। उनसे मिलना है। साक्षात्कार हेतु अनुरोध किया गया था। जब साक्षात्कार में जिला पदाधिकारी महोदय को संदेह हुआ तो इसकी जांच की गई। स्थानीय थाना को भी सूचना दिया गया तो ज्ञात हुआ कि वह आईएएस नहीं है। अपने को फर्ज आईएस बता के लोगों को गुमराह कर कर रहे हैं। उनके विरुद्ध विधि सम्मत कारवाही किया जा रहा है। वो का नाम रितेश कुमार पिता कृष्णा पंडित साकिन बसाड़ी मुफसिल थाना के रहने वाले हैं। जो उनके द्वारा किया गया था। हम लोग उसमें उसकी पहचान और अन्य भी बिंदुओं पर उसमें जांच करवा रहे हैं। आज तक से जुड़े आलोक कुमार श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक युवक ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह अपने गांव में लोगों पर रब जमाने और काम निकलवाने के लिए खुद को आईएएस बताता था। उसने यह भी माना है कि वह सरकारी दफ्तरों में जाकर अफसरों से मिलता और अगर किसी का काम हो जाता तो वह उनसे पैसा भी लेता था। रितेश ने कहा कि वो दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर यूपीएससी और बीपीएससी की तैयारी कर चुका है। लेकिन कभी सफल नहीं हो पाया।
पकड़े जाने के बाद उसने अपनी गलती मान ली है। जिलाधिकारी से माफी भी मांगी और कहा कि उसे इसकी सजा मिलनी चाहिए। उसने यह भी बताया कि इससे पहले वह सारण के पूर्व जिलाधिकारी अमन समीर से भी इसी तरह किसी काम के सिलसिले में मिल चुका है।
जिला अधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इस पूरे मामले पर प्रेस रिलीज़ जारी कर बताया कि 2 फरवरी 2026 को दोपहर 3:00 बजे एक व्यक्ति खुद को मेरठ में तैनात आईएएस अधिकारी बताकर कलेक्टेट पहुंचा और वहां पहचान पत्र मांगने पर कोई साफ जवाब नहीं दे सका और बाद में उसने खुद स्वीकार कर लिया कि वह किसी भी सरकारी पद पर नहीं है। जिला अधिकारी के निर्देश पर उनके ओएसडी मिंटू चौधरी ने नगर थाना में आवेदन देकर युवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
