पहले कुत्ते की तरह भौंका, फिर अपनी पत्नी को काटने दौड़ा युवक , वीडियो हुआ वायरल।

एक युवक को कुत्ते ने काट लिया जिसके बाद युवक ने घटना को नजरअंदाज किया और रेबीज का इंजेक्शन नहीं लिया। लेकिन फिर उसकी धीरे-धीरे से हालत बिगड़ गई। युवक कुत्तों जैसी हरकतें कर रहा था। कभी कुत्ते की तरह भौकना तो कभी जीभबाहर निकालकर वो लोगों को काटने के लिए दौड़ रहा था और पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि गुजरात के पालनपुर से सामने आया एक खौफनाक सच है। आखिर क्या है पूरा मामला? आइए आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल गुजरात के पालनपुर से आई है खबर सिर्फएक युवक की बीमारी की नहीं बल्कि हमारी जागरूकता की कमी पर भी एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। एक मामूली सा दिखने वाला कुत्ते का काटनाकुछ ही समय में ऐसा रूप ले सकता है। यह शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा।

गुजरात के पालनपुर में 27साल का एक युवक देवा भाई अचानक अजीब हरकतें करने लगा। कभी कुत्ते की तरह भौकना तो कभी लोगों को काटने के लिए दौड़ पड़ना। शुरुआत में यह सब किसी को समझ नहीं आया। लेकिन जब डॉक्टर्स ने जांच की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। युवक को रेबीज हो चुका था। दरअसल करीब 3 महीने पहले देवा भाई को एक कुत्ते ने काट लिया था। उस वक्त घाव मामूली लगने के कारण ना तो इसे गंभीरता से लिया गया और ना ही एंटी रेबिज लगवाई गई। लेकिन वक्त के साथ वायरस शरीर में फैलता गया और अब युवक में यानी कि पानी से डर, आक्रमक व्यवहार और पशुओं जैसी आवाजें निकालने जैसे गंभीर लक्षण दिखने लगे।

हालत इतनी बिगड़ गई कि उसने अपने परिजनों यहां तक कि पत्नी पर भी हमला करने की कोशिश कर दी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा। एकदम कॉमन। देवा भाई रोज [संगीत] की तरह काम करता रहा। परिवार के साथ रहा। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि उसके शरीर में रेबीज का वायरस चुपचाप फैल रहा है। लेकिन 3 महीने बाद अचानक उसकी हालत बदलने लगी। पहले उसे पानी से डर लगने लगा। फिर वह अजीब-अजीब आवाजें निकालने लगा। कुछ ही महीनों में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वह कुत्तों की तरह भौकने लग गया और आसपास मौजूद लोगों को काटने के लिए भी दौड़ पड़ता था। देवा भाई का यह बिहेवियर इतना आक्रामक हो गया कि उसने अपने परिजनों पर भी हमला करने की कोशिश की।

पत्नी और बच्चों में चीखप मच गई। गांव में अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थिति बेकाबू होने पर ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस की मदद ली। युवक को काबू में करने के लिए पहले उसे रस्सियों से बांधा गया और फिर गंभीर हालत में पालनपुर के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में मरीज को खुद को और दूसरों को नुकसान से बचाने के लिए हाथ पैर बांधकर कड़ी निगरानी में रखा गया। देर रात करीब 3:00 बजे उसे बनारस मेडिकल कॉलेज और जनरल हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।

जहां डॉक्टर्स की टीम लगातार उसकी हालत पर नजर बनाए हुए है। अस्पताल में डॉक्टर्स ने जांच के बाद यह साफ कर दिया कि यह रेबिज के गंभीर लक्षण हैं। मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर सुनील जोशी का तो यह भी कहना है कि रेबिज के लक्षण सामने आने के बाद मरीज के बचने की संभावना बेहद कम होती है। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जिसे देखकर लोग सहम गए हैं।

इस वीडियो को आप भी अपनी स्क्रीन पर देख सकते हैं। गांव और आसपास के इलाकों में डर का माहौल है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर समय रहते इंजेक्शन लगवा लिया जाता तो क्या आज यह हालत होती? यही नहीं देवा भाई के तीन छोटे बच्चे भी हैं जिनके भविष्य को लेकर परिवार और ज्यादा चिंता में है। स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले के बाद अलर्ट हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में बनास कांठा जिले में रेबिस के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। कुछ समय पहले वड़गांव तालुका में भी रेबीज से एक युवक की मौत हो चुकी है। डॉक्टर्स का साफ कहना है कि कुत्ते के काटने को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। घाव चाहे छोटा हो या बड़ा तुरंत साबुन और पानी से धोना और बिना देर की एंटी रेबीज लगवाना बेहद जरूरी है।

दरअसल डॉक्टर्स का साफ कहना है कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है। आमतौर पर इसके लक्षण 10 से 14 दिनों में सामने आते हैं। लेकिन अगर काटने वाला जानवर पहले से संक्रमित हो या पागल अवस्था में हो तो 24 घंटे के भीतर भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि कुत्ता, बिल्ली या बंदर के काटने को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोना और 24 घंटे के भीतर एंटी रेबिज इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी है। समय पर एंटीरेबिस इंजेक्शन ना लगवाने पर वायरस शरीर में तेजी से फैलकर दिमाग, नर्वस सिस्टम और हृदय पर हमला करता है। यह भी हो सकता है।

सिर्फ काटने से ही नहीं बल्कि संक्रमित कुत्ते की लार, अगर खुली चोट, आंख, नाक या मुंह में चली जाए तो भी रेबिज हो सकता है। यही वजह है कि कुत्ता बिल्ली या बंदर के काटने को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोना और 24 घंटे के भीतर रेबीज इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी है।

समय पर एंटी इंजेक्शन ना लगवाने पर वायरस शरीर में तेजी से फैलकर दिमाग, नर्वस सिस्टम और हृदय पर हमला करता है और यह जानलेवा भी हो सकता है। ऐसे मामलों में देरी घातक साबित हो सकती है। वहीं अब आपको बता देते हैं कि पालतू कुत्तों और आवारा कुत्तों के लिए नियम क्या है? पहले बात करते हैं पालतू कुत्तों की। पालतू कुत्तों का 15 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन जरूरी है। मालिक को यह सुनिश्चित करना होगा कि पालतू सार्वजनिक जगहों पर कोई परेशानी पैदा ना करें। मालिक को लिखित में जानकारी देनी होती है कि पालतू से किसी को कोई नुकसान नहीं होगा।

वहीं पालतू कुत्ते के लिए लाइसेंस लेना भी अनिवार्य होता है। अब बात करते हैं आवारा कुत्तों के नियमों के लिए। तो आपको बता दें एबीसी प्रोग्राम यानी और जरूरी है। नागा निकाय आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2023 लागू करें।

यूपी में 2023 से 2025 के दौरान 2.84 लाख आवारा कुत्तों का नसबंदी [संगीत] और टीकाकरण हुआ। पशु कल्याण विभाग बोर्ड ऑफ इंडिया की ओर से निर्धारित दिशा निर्देशों का पालन करना होगा। अब आपको यह भी बता देते हैं कि कुत्ते के काटने पर ना करें इलाज में बिल्कुल भी देरी। रहे तो वह कौन से 10 लक्षण ऐसे हैं जो हो सकते हैं आपके लिए जानलेवा।

शरीर में तेज दर्द होना, काटने वाली जगह पर झुनझुनी होना, बुखार आना, चिड़चिड़ापन होना, लखवा मार देना, लार या आंसू ज्यादा बहना, तेज आवाज से आपको गुस्सा आना, बोलने में तकलीफ, किसी पर भी हमला कर देना, हवा और पानी से डर लगना। यह वो लक्षण है जिनके दिखने पर आप बिल्कुल भी देरी ना करें। यह घटना सिर्फ पालनपुर या गुजरात की नहीं है बल्कि पूरे देश के लिए एक सख्त चेतावनी है। कुछ समय पहले ऐसी ही घटना यूपी के अलीगढ़ से भी सामने आई थी जहां एक युवक को कुत्ते ने काट लिया। जिसके बाद युवक ने घर आकर घाव को धो दिया। लेकिन फिर उसकी हालत अचानक से बिगड़ गई।

युवक कुत्तों जैसी हरकतें कर रहा था। वहां पर भी वह जीभ बाहर निकालकर लोगों को काटने के लिए दौड़ रहा था। तो सवाल सिर्फ आवारा कुत्तों का नहीं बल्कि हमारी लापरवाही और जागरूकता की कमी का है।

क्या हम आज भी कुछ नहीं होगा कहकर जानलेवा खतरे को नजरअंदाज करते रहेंगे? क्या हम आज भी थोड़ा सा घाव है कहकर जिंदगी को दांव पर लगाने को तैयार हैं और क्या प्रशासन तभी जागेगा जब ऐसे डरावनी घटनाएं सुर्खियां बनेंगी। यही इस खबर का सबसे डरावना और चौंकाने वाला सवाल है।

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