बारामती की बहू के डिप्टी सीएम बनने पर ससुर शरद और ननद सुप्रिया क्या बोले?

मी सुनेत्रा अजीत पवार गांभीर्य पूर्वक प्रतिज्ञा करते कि महाराष्ट्र राज्य उप मुख्यमंत्री राम हरि राम महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने ना केवल राजनैतिक गलियारों को बल्कि आम जनता को भी स्तब्ध कर दिया है। महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार एक महिला [संगीत] को उप मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है और वह चेहरा कोई और नहीं बल्कि सुनेत्रा पवार हैं। राजभवन में आयोजित एक बेहद गोपनीय और त्वरित कार्यक्रम में राज्यपाल ने सुनेत्रा पवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

यह घटनाक्रम इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि सुनेत्रा पवार जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर राजनीति संभालती थी, अब सीधे सत्ता के केंद्र में आ गई हैं। लेकिन इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह से जो सबसे बड़ी खबर निकल कर सामने आई, वो थी पवार परिवार की गहरी खाई। इस पूरे समारोह के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद चंद्र पवार के दिग्गज नेता शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले पूरी तरह नदारद रहे। सत्ता के इस नए समीकरण ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। जहां एक ही परिवार के सदस्य दो अलग-अलग ध्रुवों पर खड़े नजर आ रहे हैं।

जब मीडिया ने इस अचानक हुए घटनाक्रम पर शरद पवार से सवाल पूछे, तो उनके जवाबों ने सबको और भी हैरान कर दिया। शरद पवार ने इस पूरे मामले से खुद को पूरी तरह अलग करते हुए कहा कि उन्हें इस शपथ ग्रहण के बारे में रत्ती भर भी जानकारी नहीं थी।

पवार ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस बड़े फैसले की खबर न्यूज़ चैनलों और मीडिया रिपोर्टों के जरिए मिली। बारामती में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यह फैसला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दूसरे गुट का आंतरिक निर्णय हो सकता है और इस बारे में उनसे कोई सलाह मशवरा नहीं किया गया। उन्होंने प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे का नाम लेते हुए संकेत दिया कि शायद इन नेताओं ने ही पार्टी के भीतर यह पहल की होगी। शरद पवार के बयानों से साफ झलक रहा था कि परिवार और पार्टी के बीच का संवाद अब पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अजीत पवार ने दोनों गुटों के विलय के लिए 12 फरवरी की तारीख तय की थी।

लेकिन उससे पहले ही इस तरह का कदम उठाना कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है। वहीं दूसरी ओर सुप्रिया सुलेह की प्रतिक्रिया ने राजनैतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया। जब उनसे उनकी भाभी सुनीता पवार के उप मुख्यमंत्री बनने पर सवाल किया गया तो उन्होंने बहुत ही रहस्यमई चुप्पी साधे रखी। सुप्रिया सुले ने इस विषय पर कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर दिया।

उन्होंने बस इतना कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता। सुप्रिया ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए कहा कि संसद का बजट सत्र शुरू होने वाला है और उन्हें दिल्ली जाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चूंकि वह सदन में अपनी पार्टी की नेता हैं इसलिए उनका दिल्ली पहुंचना अनिवार्य है। लेकिन सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब पत्रकारों ने उन्हें घेरने की कोशिश की और उनके मन की बात जाननी चाही। सुप्रिया सुले ने किसी भी विवाद या तीखी प्रतिक्रिया में पड़ने के बजाय केवल रामकृष्ण हरि बोला और वहां से निकल गई। उनका यह अंदाज सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सुप्रिया सुले का रामकृष्ण हरी कहकर वहां से चले जाना यह दर्शाता है कि पवार परिवार के भीतर मतभेद अब उस स्तर पर पहुंच गए हैं जहां शब्दों से ज्यादा मौन और आध्यात्मिक उदाहरणों का सहारा लिया जा रहा है।

एक तरफ सुनेत्रा पवार का उप मुख्यमंत्री बनना महिला सशक्तिकरण के लिहाज से राज्य के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है तो दूसरी तरफ शरद पवार और सुप्रिया सुले की इस समारोह से दूरी ने साफ कर दिया है कि बारामती की राजनीति अब पहले जैसी नहीं रही| सत्ता की इस लड़ाई ने रिश्तों की गरिमा और राजनीतिक वफादारी के बीच एक ऐसी रेखा खींच दी है जिसे पार करना फिलहाल नामुमकिन लग रहा है|

महाराष्ट्र की जनता अब इस बात का इंतजार कर रही है कि आने वाले बजट सत्र और आगामी चुनावों में इस नई राजनीतिक व्यवस्था का क्या असर पड़ता है?

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