बेंगलुरु पुलिस वाला क्यों रोया? चीखों ने मचा दिया बवाल।

कानून की रखवाली करने वाला जब खुद कानून तोड़ता हुआ कैमरे में पकड़ा जाए तो सवाल पूरे सिस्टम पर उठते हैं। बेंगलुरु से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल है जिसमें एक पुलिस इंस्पेक्टर रिश्वत लेतेंगे हाथों पकड़ा गया। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोकायुक्त की कारवाही में एक पुलिस इंस्पेक्टर को ₹4 लाख की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद का उसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें वह चिल्लाता विरोधकर्ता और बचने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। तो आइए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है और इस पर पुलिस के बड़े अधिकारियों ने क्या कहा है। यह मामला 29 जनवरी का है। लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक पी आगरा पुलिस स्टेशन पे तैनात इंस्पेक्टर गोविंद राजू एक शिकायत के बाद उनके रडार पर आए। शिकायतकर्ता एमडी अकबर ने लोकायुक्त से कहा कि इंस्पेक्टर गोविंद राजू ने एक मामले में मदद करने के बदले उससे ₹5 लाख की रिश्वत मांगी थी। आरोप यह भी है कि इंस्पेक्टर पहले ही ₹1 लाख ले चुका था और बाकी ₹4 लाख लेने के दौरान लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाकर उसे हाथों पकड़ लिया।

ओके प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज प्लीज लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है और आगे की जांच अभी भी जारी है। बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता पर धोखाधड़ी का एक केस दर्ज था और इंस्पेक्टर ने कथित तौर पर रिश्वत के बदले उसे जमानत दिलाने की [संगीत] पेशकश की थी। गिरफ्तारी के बाद जो वीडियो सामने आया उसमें इंस्पेक्टर गोविंद राजू लोकायुक्त अधिकारियों पर चिल्लाते कारवाई का विरोध करते और खुद को बचाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि इस तरह की घटनाएं पूरी पुलिस बल की छवि को नुकसान पहुंचाती है।

उन्होंने इसे पुलिस की वर्दी में एक और शर्मनाक कृत बताया। कमिश्नर ने यह भी कहा कि कर्नाटक में 1 लाख से ज्यादा ईमानदार पुलिसकर्मी हैं जो ऐसे मामलों की वजह से खुद को अपमानित महसूस करते हैं। मामले की जांच कर रही है और इंस्पेक्टर गोविंद राजू से पूछताछ जारी है। सवाल यही है कि जब कानून के रखवाले ही रिश्वत लेते पकड़े जाए तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करें?

बेंगलुरु से आईए तस्वीर एक बार फिर बताती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती सिर्फ जरूरी ही नहीं बल्कि समय की मांग है।

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