शीशा हो या दिल हो आखिर आज यह दास्ता है भारतीय हिंदी सिनेमा के गुजरे सुनहरे दौर की एक ऐसी खूबसूरत और दिलकश अभिनेत्री की जिसने अपनी खूबसूरती और हसीन अदाओं के बल पर पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई जिसके लिए इनको आज तक याद किया जाता है परदेश जाके परदेसिया बी ग्रेट फिल्म से बॉलीवुड की फिल्मों में शुरुआत करने वाली यह अभिनेत्री कैसे आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित और महंगी अदाकारा बन गई के सान इस अभिनेत्री की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इनको एक क्लब में नाइट डांसर बनना पड़ा और यहां इस नाइट क्लब में वो कौन सा फिल्म निर्माता था जिसने इनकी आर्थिक स्थिति का फायदा उठाकर इनसे अपनी फिल्म में कराया बेहद अश्लील सीन जिसकी वजह से इस अभिनेत्री को झेलनी पड़ी समाज और लोगों की आलोचनाएं आप मुझे इस तरह शर्मिंदा क्यों कर रहे हैं .
साफ-साफ कहते क्यों नहीं आप चाहते क्या हैं इस अभिनेत्री की जिंदगी में वो कौन सा सुपरस्टार था जिसने इनको प्यार में दिया वो धोखा जिसकी वजह से इस अभिनेत्री को पाकिस्तान के कराची में करनी पड़ी गुपचुप शादी और क्यों इनके उसी पाकिस्तानी पति ने इनको वो दिन दिखाए जिसकी वजह से इस अभिनेत्री को झेलना पड़ा तलाक और धर्म परिवर्तन जैसा दुख ह एक जीवन है एक कहानी पर ये क्यों ये अभिनेत्री जिंदगी भर अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने प्रेम प्रसंग के लिए मशहूर रही और क्या आप जानते हैं कि फिल्मों की शूटिंग के दौरान इनके मेकअप रूम में कौन सा अभिनेता घंटों घंटों बैठा रहता था.
जिसकी यह आगे चलकर कहलाई नाजायज प्रेमिका ओ हो आखिर तेरा दिल भर हूं आखिर तेरा कैसे एक फिल्म के गाने और संगीत ने बदल दी इस मशहूर अदाकारा की जिंदगी क्यों इतना नाम और स्टारडम होने के बावजूद यह अभिनेत्री तकलीफ झेलती रही क्यों इनको को कभी भी नहीं मिला ना प्रेमी का प्यार ना ही पति का सुख क्यों यह अभिनेत्री जूझ रही है अपने अकेलेपन और दशक में हिंदी सिनेमा में कदम रखने वाले इस खूबसूरत चेहरे ने अपनी अभिनय और अपनी दिलकश अदाओं से उस दौर में काफी धमाल मचाया मजबूरी में फिल्मों में शुरुआत करने वाली इस अभिनेत्री को बड़े दुख और तकलीफ का सामना करते हुए हिंदी सिनेमा में वो मुकाम हासिल हुआ जिसको आज तक लोग याद करते हैं इनका इसी स्टारडम और आकर्षण की वजह से यह पहचानी गई पूरी दुनिया में सायरा अली यानी रीना रॉय के नाम से क्या नाम है तेरा
रीना रॉय का जन्म 7 जनवरी 1957 को बम्बे में हुआ था इनके पिता का नाम सादिक अली था और इनकी मां का नाम था शारदा रॉय इनके पिता जहां मुस्लिम थे तो वहीं इनकी मां हिंदू थी शारदा रॉय भी हिंदी सिनेमा की अदाकारा ही रही हैं और उन्होंने गुजरे वक्त में बाबरे नैन फिल्म में एक अदाकारा के तौर पर काम किया था और आगे चलकर यह एक फिल्म प्रोड्यूसर बन गई थी रीना रॉय के बचपन का नाम सायरा अली था इनकी दो बहनें बरखा रॉय और अंजू रॉय हैं
इनका एक भाई राजा रॉय भी है रीना रॉय जब छोटी थी तो इनके माता-पिता के बीच शादी का रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिक सका था जिसकी वजह से इन दोनों के बीच तलाक हो गया था तलाक के बाद भी इनकी मां अपने पति से इस कदर गुस्सा थी कि उन्होंने सबसे पहले अपने सभी बच्चों के नाम बदलकर हिंदू नाम रख दिए और इसी सब के चलते इन्होंने अपनी बेटी सायरा अली जो कि बाद में रीना रॉय बनी उन का नाम सायरा से रूपा रॉय रख दिया था तलाक के बाद रीना रॉय के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए कम उम्र में ही रीना रॉय के ऊपर जिम्मेदारियां आ गई रीना रॉय का रंग रूप बेहद आकर्षक था रीना रॉय को भी उस उम्र में हिंदी सिनेमा काफी आकर्षित करता था लेकिन परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी होने की वजह से यह कभी सिनेमा की तरफ जाने का सोच भी नहीं पाई थी काम की तर तलाश करते-करते एक दिन रीना को बम्बे में ही एक नाइट क्लब में डांसर की नौकरी मिल गई जहां नाइट डांसर के नाम से यह जानी जाने लगी छोड़ो छोड़ो मेरी राहे मेरी बाहे एक दिन रीना रॉय के क्लब में मशहूर फिल्म निर्माता बीआर इशारा की नजर उन पर पड़ी वो रीना रॉय के डांस और खूबसूरती से काफी प्रभावित हुए और उनको अपने फिल्म में आने का ऑफर देकर अपने ऑफिस में उन्हें मिलने के लिए बुलाया जब रीना रॉय अगले दिन उनसे मिली तो इशारा साहब ने अपनी फिल्म नई दुनिया नए लोग के बारे में रीना को बताया हालांकि रीना रॉय के दिल में भी दबी हुई इच्छा थी हिंदी सिनेमा में आने की जिसको बीआर इशारा साहब ने हवा दे दी थी भी इस फिल्म के लिए नौकरी से ज्यादा पैसे मिलने के ऑफर और फिर परिवार के पालन पोषण की खातिर रीना रॉय ने हां कर दी और इस तरह से हिंदी सिनेमा को एक नया चेहरा और अदाकारा मिल गई मुझे तेरी बाहों में ना जाने क्या मिलता है मुझे रीना रॉय और पूरा परिवार बहुत खुश था लेकिन इनकी यह खुशियां ज्यादा समय तक नहीं चल सकी किस्मत से कुछ मजबूरियों के चलते कुछ दिन शूटिंग होने के बाद यह फिल्म रोक दी गई रीना रॉय फिल्म के ना बनने से काफी दुखी हुई मगर ये मैं सहन नहीं कर पाऊंगी विजय मैं सच कहती हूं मैं सहन नहीं कर पाऊंगी और फिर से क्लब में डांस करने लगी लेकिन शायद उनका बॉलीवुड में आना लिखा था.
इसीलिए बी आर इशारा साहब अपनी एक और फिल्म जरूरत बना रहे थे इस फिल्म में बेहद एडल्ट सीन थे लेकिन जब इस फिल्म की स्क्रिप्ट किसी और हीरोइन ने सुनी तो बीआर इशारा को फिल्म के लिए मना कर दिया ऐसे में बीआर इशारा जी फिर से रीना रॉय के संपर्क में आ गए और उनको यह फिल्म करने का ऑफर दे डाला रीना रॉय जो परिवार की खराब माली हालत से जूझ रही थी और उनके अच्छे भविष्य की खातिर रीना रॉय ने इस फिल्म के लिए हां कर दी इस फिल्म में ऐसे ऐसे बोल्ड सीन दे दिए गए जिसकी किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी और इन्हीं फिल्म के सीन के बल पर इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक काम कर लिया और इस तरह से बी आर इशारा जी ने रीना रॉय की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे यह फिल्म करवा ली आज मेरी जिंदगी की जरूरतें मेरे जिस्म से ज्यादा जरूरी है और इसी फिल्म की जरूरत के लिए इनका नाम रूपा रॉय से बदलकर रीना रॉय रख दिया गया था जिसके बाद से यह हमेशा इसी नाम से पहचानी गई इस फिल्म के बाद रीना रॉय को बी ग्रेड की अभिनेत्री माना जाने लगा और इस सीन की वजह से ही इनको कई संगठनों के लेखकों की आलोचना झेलनी पड़ी और इनको भारतीय हिंदी सिनेमा में उस वक्त जरूरत गर्ल के नाम से जाना जाने लगा मुझे कुछ नहीं सुनना बात सिी जाके कलेजे में रखती है वो क्यों कहते हो मजबूर और लाचार रीना रॉय परिवार के खातिर यह सब कुछ चुपचाप झेल रही थी रीना रॉय की इस फिल्म के बाद फिल्में तो उन्हें मिल रही थी लेकिन निचले दर्जे की जिनमें रीना रॉय कभी काम नहीं करना चाहती थी रीना रॉय काफी परेशान हो गई थी उनको अपनी गलती और मजबूरी का एहसास हो रहा था.
वह अपनी इस खराब इमेज को हटाना चाहती थी इसीलिए उनको एक अच्छी फिल्म के ऑफर का इंतजार था लेकिन उनका इंतजार ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया और पैसों की किल्लत और परिवार की जरूरत की वजह से रीना रॉय ने जल्दबाजी में कुछ फिल्म गुम रहा जंगल में मंगल मिलाप जैसे को तैसा गूंज मदहोश जख्मी जैसी बी ग्रेट फिल्मों को साइन कर लिया और यह सभी फिल्में फ्लॉप साबित हुई कैसी बातें कर रहे हैं आप इन्हीं फिल्म में से एक फिल्म थी जैसे को तैसा जिसमें रीना रॉय और जितेंद्र के ऊपर फिल्माए एक गाने ने रीना रॉय की खूबसूरती और डांस की तरफ कुछ बड़े फिल्म निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया इस गाने की वजह से रीना रॉय को काफी तारीफें भी मिली थी अब के सावन में जी डरे रिमझिम तन पे पानी और इसी वजह से साल 1976 में बन रही फिल्म काली चरण के लिए इनको साइन कर लिया गया खपड़िया का कर फुटबॉल नहीं खेला तो मेरा नाम काली चरण नहीं काली चरण इस फिल्म को बना रहे सुभाष घई यह फिल्म अपने आप में रिकॉर्ड फिल्म थी क्योंकि कालीचरण फिल्म वही फिल्म है जिसने तीन लोगों की जिंदगी को रातों रात बदला था पहली तो थी रीना रॉय दूसरे थे सुभाष घई और तीसरे थे फिल्म के हीरो शत्रुघन सिन्हा मेरी समझ में नहीं आता है बुड्ढे तू मेरे ही पीछे क्यों पड़ गया है कभी दूध पिलाता है कभी खाना खिलाता है भाषण दे देकर तूने मेरे नाक में दम कर रखा है दरअसल सुभाष घई इस फिल्म से पहली बार फिल्म निर्देशक के रूप में कदम रख रहे थे तो वहीं फिल्म के हीरो शत्रुगन सिन्हा जो अब तक पिछली फिल्मों में सिर्फ एक नकारात्मक और विलन के किरदार निभाते चले आ रहे थे उनके जीवन की यह बतौर हीरो पहली फिल्म थी लेकिन दोस्त प्रभाकर श्रीवास्तव भी इंसाफ का दूसरा नाम है ना इंसाफी नहीं होने दूंगा तो वहीं रीना रॉय की भी यह वह पहली फिल्म थी जिसकी वजह से व स्टार बनी थी लिहाजा इस वजह से यह फिल्म बहुत खास थी जिसकी वजह से इन लोगों को हिंदी सिनेमा में काफी नाम और पैसा मिला था.
कालीचरण फिल्म ने उस दौर में उम्मीद से परे जबरदस्त शानदार प्रदर्शन किया इस फिल्म को लोगों ने इतना प्यार दिया दिया कि यह फिल्म उस समय सुपर डुपर हिट फिल्म बन गई और इस फिल्म ने रीना रॉय शत्रुगन सिन्हा और सुभाष घई को रातों-रात स्टार बना दिया आज मैं नाचूंगी गाउंगी आज मैं बहुत खुश हूं इस फिल्म से एक नई प्रेम कहानी ने भी जन्म ले लिया था जिसकी वजह से रीना रॉय की जिंदगी भी बर्बाद हो गई थी दरअसल इस फिल्म की शूटिंग के दौरान रीना रॉय और शत्रुगन सिन्हा के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी हालांकि यह दोनों पहले भी मिल चुके थे लेकिन इस फिल्म के समय इन दोनों के बीच मुलाकातें बढ़ी नजदीकियां बढ़ी और अपनी उम्र से 11 साल बड़े शत्रुगन सिन्हा को रीना रॉय अपना दिल दे बैठी तुम जानो तुम जानो या हम जाने तुम जानो तुम जानो या शूटिंग के वक्त शत्रुगन सिन्हा रीना रॉय को अकेला नहीं छोड़ते थे और वो इनके मेकअप रूम में घंटों घंटों बैठा करते थे और इन दोनों की की मुलाकातें और बातें पूरे फिल्मी गलियारों की सुर्खियां बन रही थी इन दोनों का इश्क सातवें आसमान पर था आवा से हलकी हो ई जो उनसे प्रेम में डूबी रीना रॉय की उसी साल एक और फिल्म रिलीज हुई नागिन यह फिल्म वैसे तो मल्टीस्टारर फिल्म थी इस फिल्म में रीना रॉय ने एक इच्छाधारी नागिन का रोल अदा किया था और इनका इस फिल्म में निभा गया यह रोल फिल्म के बड़े-बड़े सुपरस्टार पर भारी पड़ गया था तेरे संग प्यार में नहीं तोड़ना तेरे पूरी फिल्म की वाहवाही रीना रॉय ने ही लूट ली थी और इस फिल्म ने कमाई के कई नए रिकॉर्ड बनाए और तोड़े थे इस फिल्म के बाद तो रीना रॉय रातों-रात बेहद उम्दा स्टार बन गई उनको इतनी सफलता मिलेगी उनको खुद इस बात का अंदाजा ही नहीं था लोग रीना रॉय के ऐसे दीवाने हुए कि इनकी एक छलक पाने के लिए इनकी कार के पीछे दौड़ने लगते थे इधर रीना रॉय सफलता के घोड़े पर सवार थी और वही इनकी प्रेम कहानी भी तो ऐसे में सुभाष घई ने 1978 में एक बार फिर से इन दोनों को लेकर एक और फिल्म बनाई जिसका नाम था विश्वनाथ जली को आग कहते हैं बुझी को राख कहते हैं जिस राख से बारूद बने उसे विश्वनाथ कहते हैं इस फिल्म ने एक बार फिर से रीना रॉय शत्रुगन सिन्हा सुभाष घई को उम्मीद से दुगनी कामयाबी [प्रशंसा] दी रीना रॉय और शत्रुगन सिन्हा असल जिंदगी के साथ फिल्मी पर्दे पर भी एक साथ पसंद किए जाने लगे और लोगों ने इन दोनों की जोड़ी को बहुत ज्यादा प्यार दिया हाली की ई जो उनसे सफलता रीना रॉय का स्टारडम बढ़ा रही थी.
इनका मुकाबला अब दूसरी अभिनेत्री हेमा मालिनी और रेखा से होने लगा था रीना रॉय के पास फिल्म की एक लंबी लाइन थी तो ऐसे में रीना रॉय की साल 1979 में एक और मल्टीस्टारर फिल्म रिलीज हुई जिसका नाम था जानी दुश्मन इस फिल्म की सफलता ने एक बार फिर से कमाई के कई रिकॉर्ड्स बनाए और तोड़े और अब रीना रॉय हिंदी सिनेमा में बतौर एक फिल्म अभिनेत्री सबसे ज्यादा पैसे चार्ज करने वाली अदाकारा बन गई थी बड़े-बड़े फिल्म अभिनेता इनको अपनी फिल्म की हीरोइन बनाना चाहते थे जिसके लिए रीना रॉय के पीछे स्टार्स और फिल्म निर्माता की एक लंबी लाइन थी रीना रॉय की साल 1980 में दो जबरदस्त फिल्में आई आशा और कशिश इन फिल्मों ने उनको कामयाबी के सातवें आसमान पर बैठा दिया था ये वही रीना रॉय हैं जिन्होंने मजबूरी में फिल्मों में बोल्ड सीन देकर खुद की इमेज को खराब कर लिया था और आज वही रीना रॉय दुनिया के लिए एक चमकते सितारे की तरह थी जिसको उस दौर में सभी पाना चाहते थे जरा सा नाम होते ही मैंने कसम खा ली कि अब मैं किसी के इशारों पर नहीं नाचूंगी आज लोग मेरा नृत्य देखने के लिए तरसते हैं उसको पाने की हसरत न जाने कितने लोगों की थी वह तो पहले से ही किसी और के प्यार में कैद हो गई थी लेकिन रीना रॉय की जिंदगी तो अभी तबाह होना बाकी थी जिस प्यार की कसम खाई जा रही थी वादे किए जा रहे थे जीने मरने के उस प्यार का सच तो अभी आना बाकी था.
दरअसल साल 1980 में रीना रॉय के साथ संबंध रखने वाले शत्रुगन सिन्हा ने अचानक से अपनी पुरानी दोस्त पम से शादी करके सबको हैरत में डाल दिया था लोग जहां रीना रॉय के साथ इनकी शादी के कयास लगा रहे थे तो वहीं शत्रुगन सिन्हा ने तो किसी और से शादी करके पूरी फिल्म इंडस्ट्री को ही चौका दिया था लेकिन जब यह बात रीना रॉय को पता चली तो वह एकदम से टूट गई उनके पैरों तले जमीन निकल गई बताया जाता है कि शादी से तीन दिन पहले तक रीना रॉय और शत्रुगन सिन्हा लंदन में थे तो फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि शत्रुगन सिन्हा ने यूं किसी को भी बताए बिना शादी रचा ली शादी की खबर से पहले तो रीना रॉय पूरी तरह से टूट गई उनकी मानो पूरी दुनिया ही उजड़ गई हो मैंने तो पी लिए वो आसू जिनम लहू था उनको अभी तक ये सब कुछ एक सपने जैसा लग रहा था लेकिन अब हकीकत में उनके हाथ से सब कुछ निकल गया था जैसे तैसे रीना रॉय संभली और शत्रुघन से इस बेवफाई की वजह पूछी तो शत्रुघन ने अपनी सफाई में कुछ नहीं कहा और रीना रॉय से बस माफी मांग ली जो चल नहीं सकते थे वो चलने लगे हैं और जो चल सकते थे डगमगा कर गिरने लगे हैं आपको क्या लगता है कि शत्रुगन सिन्हा ने रीना रॉय से शादी क्यों नहीं की क्या रीना रॉय का मुस्लिम होना या उनके परिवार का बैकग्राउंड अच्छा अा नहीं होना इस रिश्ते की रुकावट बना आप इस बात का जवाब हमें कमेंट करके जरूर बताएं जिंद बया हाए जिंदड़ी कैसे कैसे रंग यह दिखाए जिंदड़ी हालाकि रीना रॉय का प्यार सच्चा था वह शत्रुगन सिन्हा के अलावा किसी को भी नहीं चाहती थी इसीलिए कुछ समय बाद इन दोनों के बीच फिर से बातचीत शुरू हो गई लेकिन अब इस रिश्ते में वो पहले वाली बात नहीं रही जो जखम कभी भर नहीं सकते उन्हें कुरने के लिए मेरे पना करने के बाद भी तुम यहां क्यों आए हो और जब शत्रुगन सिन्हा की पत्नी पूनम सिंह मां बनी तो बचा कुचा दिल और जज्बात पूरी तरह से खत्म हो गए अब रीना रॉय ने शत्रुगन सिन्हा से दूरी बनानी शुरू कर दी आइंदा यहां नहीं आना और ना ही कभी मुझसे मिलने की कोशिश करना तुम अब शादीशुदा हो और फिर एक दिन साल 1983 में रीना रॉय ने भी अपने करियर के पीक पर पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसिन खान से पाकिस्तान के कराची में जाकर गुपचुप तरीके से शादी कर ली और यह शादी करके रीना रॉय ने भी पूरे हिंदी सिनेमा को चौंका दिया था क्योंकि उस समय रीना रॉय अपने फिल्मी सफर के सबसे ऊंचे पायदान पर थी रीना रॉय शत्रुगन सिन्हा के प्यार के दायरे से बाहर आना चाहती थी इसीलिए उन्होंने बिना किसी को बताए शादी कर ली रीना रॉय एक अच्छी वैवाहिक जिंदगी गुजारना चाहती थी और इनका शुरुआती शादीशुदा जीवन बहुत अच्छा चला और कुछ समय बाद रीना रॉय ने भी एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम जन्नत रखा गया शादी के लगभग 6 साल बाद रीना रॉय फिर से भारत वापस आ गई अपने पति मोहसिन और अपनी बेटी के साथ इनके पति मोहसिन पहले एक क्रिकेटर थे लेकिन वह पाकिस्तान में कुछ फिल्मों में काम कर चुके थे और क्रिकेट छोड़ने के बाद व भी एक्टिंग की दुनिया में कदम रख चुके थे.
दोस्ती को किसकी नजर बदल जा इसलिए भारत आकर रीना रॉय ने अपने पति के लिए फिल्म बटवारा में उनको काम करने का मौका दिलवा दिया जिसमें इनके काम की काफी तारीफ भी हुई थी आप मेरी इजाजत के बगैर कोई काम नहीं करेंगे बात की बात राजेंद्र सिंह साहब इसके बाद मोहसिन की कई और फिल्में भारतीय हिंदी सिनेमा में बनी कुछ फिल्मों को सफलता मिली तो कुछ को नहीं लेकिन महेश भट्ट की सुपरहिट फिल्म साथी के लिए आज भी मोहसिन खान को याद किया जाता है तो अच्छा खासा दोस्त भी दुश्मन बन जाता है हो अच्छा लेकिन कुछ समय बाद मोहसिन खान का मन फिल्मी दुनिया से भर गया और व यह सब कुछ छोड़कर लंदन में जाकर कर बसना चाहते थे मैं आज आपके सामने कहता हूं नाजरीन के सामने बिल्कुल रिग्रेट नहीं है और मैंने एक एक इंसान से शादी की थी मैंने नहीं देखा था कौन कहां का है क्या है लेकिन रीना रॉय को लंदन में बसना नहीं था इसलिए इन दोनों के बीच झगड़े और मनमुटाव होने लगा सोचो हम कितने मजबूर थे बात इतनी बढ़ गई कि मोहसिन खान ने रीना रॉय के साथ हाता पाई भी शुरू कर दी और हर रोज घर में इस बात को लेकर झगड़ा होने लगा रीना रॉय जो अपने पति को भारतीय हिंदी सिनेमा में लाई फिल्मों में काम दिलाया और अपनी जमा पूंजी भी उनके ऊपर लगाई लेकिन उनके पति ने उनकी बिल्कुल कदर नहीं की बल्कि उनकी जिंदगी और ज्यादा खराब कर दी उनको दुख तकलीफ देने लगे जिस हम सफर के लिए रीना रॉय भारत छोड़कर पाकिस्तान गई जिसके लिए इतनी बदनामी झेली उस पति ने ही इनकी जिंदगी जहन्नुम बना दी क्यों आए हो तुम यहां क्यों क्यों आए [संगीत] हो जब इन झगड़ों का कोई समाधान नहीं निकला तो साल 1990 में दोनों ने तलाक लेने का फैसला किया तलाक के समय मोहसिन खान अपनी बेटी को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे और बेटी को पाने के लिए रीना रॉय को कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी भगवान शायद परीक्षा ले रहा है भाई साहब कि और मैं कितने दुख सहकर भी जी सकती हूं बताया जाता है कि रीना रॉय के इस मुश्किल समय में शत्रुगन सिन्हा ने रीना रॉय की बहुत मदद की थी उनकी कानूनी लड़ाई में व उनके साथ खड़े रहे लड़ाई काफी लंबी चली इस कानूनी लड़ाई में रीना रॉय की जीत हुई और फिर मोहसिन खान ने इस कानूनी लड़ाई के बीच ही दूसरी शादी कर ली थी और इस शादी के बाद ही मोहसिन ने अपनी बेटी की कस्टडी छोड़ दी और बेटी जन्नत अपनी मां के पास लौट आई इसके लिए जीना पड़ेगा मुझे रीना रॉय अपनी बेटी को वापस पाकर बहुत खुश हुई और उन्होंने भी अपनी मां की तरह ही अपनी बेटी का धर्म और नाम जन्नत से बदलकर सनम रख दिया था अब मैं बिल्कुल अकेली रह गई हूं जीने का कोई मोह बाकी नहीं रहा फिर भी जीना पड़ेगा तलाक के बाद रीना रॉय ने फिर से फिल्मों में वापसी की और वह अब फिल्मों में चरित्र किरदार निभाने लगी लेकिन दुर्भाग्यवश इस बार रीना रॉय फिल्मों में सफल नहीं हो पाई रीना रॉय आखिरी बार जेपी दत्ता की फिल्म रिफ्यूजी में दिखाई दी थी जागा ये मेरी कोक का कलंक अम्मी नामुराद मेरे दूध का यह सिला दिया है तूने चला जा यहां से अपना मुंह काला करके चला जा रीना रॉय ने लगभग 100 फिल्मों में शानदार अभिनय की छाप छोड़ी जिसको आज तक याद किया जाता है रीना रॉय को उनकी फिल्म नागिन के लिए फिल्म फेयर अवार्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नॉमिनेट भी किया गया था तो वहीं उनकी दूसरी फिल्म अपनापन के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के अवार्ड से सम्मानित किया गया लेकिन रीना रॉय इस अवार्ड को लेने से इंकार कर देती हैं और कहती हैं कि जब वह फिल्म में मुख्य अभिनेत्री के रूप में थी तो फिर सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवार्ड वो क्यों ले रीना रॉय ने बाद के दिनों में छोटे पर्दे पर भी काम किया रीना रॉय ने काली चरण विश्वनाथ जख्मी नागिन अपनापन जानी दुश्मन आशा नसीब रॉकी राज तिलक गुलामी सनम तेरी कसम अंधा कानून नौकर बी का रिफ्यूजी जैसी एक से बढ़कर एक फिल्म भारतीय हिंदी सिनेमा को दी जिसके लिए रीना रॉय को आज भी याद किया जाता है.
आपको यहां पर बता दें कि शत्रुगन सिन्हा जिन्होंने सिर्फ रीना रॉय के मुस्लिम होने की वजह से उनसे शादी नहीं की और आज शत्रुगन सिन्हा की जिंदगी में वो दिन आ गया है कि आज उनकी बेटी एक मुस्लिम लड़के जहीर इकबाल से 23 जून को शादी के बंधन में बंद गई हैं सोनाक्षी सिन्हा की इस शादी के लिए उनकी मां पूनम और शत्रुगन सिन्हा कतई राजी नहीं थे और वह अपनी बेटी के इस फैसले से काफी नाराज [प्रशंसा] हैं और वह शादी में शामिल तो जरूर हुए लेकिन उनके मन में अपनी बेटी के लिए आज गुस्सा दबा हुआ है यह कर्म ही है कि सालों पहले जिस वजह से शत्रुगन सिन्हा ने रीना रॉय को धोखा दे दिया था आज उनकी उसी बेटी ने उनको फिर से उसी दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है जिंदगी इम्तिहान लेती है रीना रॉय आज मुंबई में ही अपनी बेटी के साथ रहती हैं और दोनों मां बेटी आज एक एक्टिंग स्कूल चलाती हैं तलाक के बाद रीना रॉय ने कभी शादी नहीं की वह हमेशा अकेले रही और जिंदगी के अकेलेपन से लड़ती रही रीना रॉय को जिंदगी में कभी सुख नसीब नहीं हुआ छोटी सी ही उम्र में घर की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने काम किया लोगों ने इनका भरपूर फायदा उठाया बदनाम किया दिल तोड़ा तलाक दिया जिसकी वजह से रीना की जिंदगी हमेशा दुख तकलीफ से भरी रही अब मैं बिल्कुल अकेली रह गई हूं लेकिन इन सब के बावजूद रीना रॉय ने कभी हिम्मत नहीं हारी और जिंदगी को जीतने की कोशिश लगातार करती रही फिल्मी पर्दे पर बेहद खूबसूरत और हसीन दिखने वाली इस अभिनेत्री की जिंदगी में इतने दुख होंगे यह किसी ने सोचा भी नहीं था जाने अनजाने में मुझसे कोई भूल हो गई हो मुझे माफ कर देना तो दोस्तों यह थी शानदार खूबसूरत दिलकश अभिनेत्री रीना रॉय की जिंदगी की कहानी रीना रॉय अपने जमाने की एक सफल अभिनेत्री रही हैं उन्होंने हिंदी सिनेमा को अपने दम पर एक से बढ़कर एक फिल्में दी जिनको लोग आज भी देखते हैं .
इनके बेहतरीन करियर और लाजवाब अभिनय के लिए साल 1998 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से इन्हें सम्मानित किया गया था रीना रॉय वो नाम है हिंदी सिनेमा का जिसको कोई भी नहीं भूल सकता है जब तक बॉलीवुड का वजूद जिंदा है तब तक रीना रॉय का नाम भी चमकता रहेगा परश जाके परदेसिया भ बॉलीवुड नोवल की पूरी टीम रीना रॉय के उत्तम स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना करता है और उन्हें शुभकामनाएं देता है कितने भी त करस तुम हस हस के सहेंगे
