देश में यूजीसी के नए नियमों को लेकर जो बहस छिड़ी उसने कई एंकर्स के या यूं कहें कि मीडिया जगत में नोएडा में बैठे हुए तमाम एंकर्स के चेहरे से जो नकाब था जातिवाद का वो पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।
धर्म के नाम पर तो ये खूबंगे हाथों पकड़े गए हैं लाइव डिबेट्स में और इस बार जाति के नाम पर भी इनका वर्चस्व किस तरह से है मीडिया पर यह साफ तौर पे तब सामने आता है जब बहस के दौरान इन एंकर्स की जाति इनके भीतर से बोलने लगती है। ये एंकर ना होकर एक जाति के प्रतिनिधि के तौर पर काम करने लगते हैं। तब यह सवाल उठता है कि इस देश के भीतर क्या सही में जातिगत व्यवस्था एक तरफ़ा है। अंजना कश्यप ने आरजेडी की प्रवक्ता कंचना यादव को लाइव डिबेट में कह दिया कि इन्हें हटाइए स्क्रीन से। इन्हें हटा दीजिए स्क्रीन से। सवाल यह था कि कंचना यादव ने क्या कुछ गलत बोला?
उन्होंने एक पुराने इंटरव्यू को जो जिसे एक पुराने एक मैगजीन ने छापा था उसको कोट किया था। उन्होंने अपनी तरफ से कुछ नहीं कहा था। उस मैगजीन का हवाला देकर अंजना कश्यप का बयान उन्होंने कोट किया। अंजना को बुरा लग गया। अगर यह बयान गलत था तो फिर उस मैगजीन के खिलाफ अंजना ने कोई कानूनी कारवाई क्यों नहीं की? और सवाल यह है कि कंचना यादव को क्या अपनी बात रखने का हक नहीं है? और वो एक इंटरव्यू का हवाला दे रही हैं। एक रिटेन दस्तावेज पढ़ रही हैं। और फिर आप उनसे कहती हैं कि आप स्क्रीन से हट जाइए।
यही है जातिवाद। यही है जातिवाद का बोलबाला। कंचना यादव ने जब अंजना उपकश्यप के एक पुराने इंटरव्यू का हवाला देकर अंजना के ऊपर आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाया तो अंजना ओम कश्यप भड़क गई और कंचना यादव को शो से बाहर कर दिया। कंचना यादव अंजना कश्यप के जिस इंटरव्यू की बात कर रही थी वो इंटरव्यू अंजना कश्यप ने साल 2019 में कारवा मैगजीन को और उसके पत्रकार निकिता सक्सेना को दिया था और जो अंग्रेजी में 1 दिसंबर 2019 को छपा था और 20 जनवरी 2020 को हिंदी में भी छपा था।
अब अपने पुराने इंटरव्यू पर खुद ही भड़क रही हैं। खुद ही उसे रिजेक्ट कर रही हैं। अगर रिजेक्ट है, रिजेक्टेड बयान है, मिसकोडेड बयान है तो फिर मैगजीन और उस पत्रकार के खिलाफ आप कारवाई क्यों नहीं कर रही हैं? अब तक खामोश क्यों है 2019 से लेकर? क्या आप इंतजार कर रही थी कि यूजीसी का मुद्दा उठेगा तब कोई पत्र कोई कोई प्रवक्ता उसे कोर्ट करेगा और उसे आप स्क्रीन से बाहर कर देंगी। अंजना उपकश्यप ने कहा कि उनको मिसकोट किया गया। अगर पत्रकार को अपने उस बयान में मिसकोटिंग नजर आ रही है तो आप उस इंटरव्यू में जो बोली है उसकी आलोचना कर सकती थी।
जो कोर्ट किया गया उसकी आलोचना कर सकती थी। लेकिन किसी भी प्रतिनिधि को आप यह कह दें कि बाहर चले जाइए। कारवा मैगजीीन को आपने खुली छूट दे रखी है। अब फिर वो तमाम मैगजीन का जो पूरा इंटरव्यू फिर रीट्वीट हो रहा है। कैसे रोकेंगे आप? आईपी सिंह ने लिखा कि जिस तरह से कंचना यादव को अंजना ओम कश्यप बेइज्जत कर रही हैं क्योंकि कंचना पिछड़े वर्ग से आती हैं। इसलिए अब विपक्ष से वह अपील करते हैं कि बीजेपी के इस न्यूज़ चैनल्स को आईना दिखाया जाए। इसकी बहस में अपने प्रवक्ताओं को ना भेजा करें विपक्ष। यही काम वो कहते हैं कि एबीपी की चित्रा त्रिपाठी भी करती हैं। हटाओ हटाओ स्क्रीन से जैसे यह स्क्रीन उन्होंने खरीद ली हो।
उनके पैसों से चल रही हो। ऐसा लग रहा है जैसे वो एंकर नहीं मालिक हैं इस देश के पत्रकारिता की। इस पर कंचना यादव ने भी लिखा भेदभाव और जातीय अहंकार अंजना ओम कश्यप के व्यवहार में साफ दिखाई देता है जो उन्होंने कल बहस के दौरान मेरे साथ किया। मैंने तो केवल उनके एक पुराने बयान को याद दिलाया, जिसमें वो कहती है कि मैं व्यक्तिगत रूप से आरक्षण विरोधी हूं। मुझे लगता है कि आरक्षण सबसे बड़ा न्याय है। मेरे पिता ओम प्रकाश तिवारी हैं। हम भूमिहार हैं। मेरे पिता ब्राह्मण हैं। हम सभी ऐसे परिवेश में पले पड़े हैं जहां आरक्षण से घृणा लोग करते हैं। क्योंकि हमें लगता है कि हमारा हिस्सा हमसे छीन लिया गया। कंचना यादव आगे लिखती है कि मैंने तो सिर्फ उनके इसी बयान को कोट किया था। इस पर वह गई, गुस्से में आ गई। मुझे टीवी स्क्रीन से हटा दिया गया और फिर बहस से भी निकाल दिया गया।
यही है जातिवाद, यही है जातीय अहंकार, यही है भेदभाव। अब इसे शांति से सुन सकती हैं और तर्कों के आधार पर खंडन भी कर सकती थी। लेकिन जो लोग एक्टर धर्मेंद्र की झूठी मौत की खबर चला सकते हैं। लालू यादव को झूठे जंगल राज और भूरा बाल वाला बाल साफ करो जैसे मुद्दों पर बहस करवा सकते हैं।
