इस कदर आग में लपटा अजित पवार का देह ! इस निशानी से पहचानी गई बॉडी।

सुबह करीब 8:45 मिनट आसमान में हल्की धुंध थी और महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा चेहरा अपनी जिंदगी की सबसे छोटी उड़ान भर रहा था। मुंबई से उड़ान भरा एक चार्टर्ड जेट, गंतव्य, बारामती, मकसद, चुनावी रैलियां, जनता से मुलाकात, सत्ता की अगली लड़ाई। लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह उड़ान इतिहास बन जाएगी। जैसे ही विमान बारामती एयरपोर्ट पर उतरने की कोशिश कर रहा था, अचानक संतुलन बिगड़ा, और कुछ ही सेकंड में पूरा आसमान आग की एक लकीर में बदल गया।

हुआ और देखते ही देखते विमान जमीन से टकराकर आग का गोला बन गया। आसपास के गांव में लोग घरों से बाहर निकल आए। काले धुएं के गुबार में एक सच्चाई जल रही थी। जब डमगल की गाड़ियां पहुंची तब तक सब कुछ राख बन चुका था। विमान के टुकड़े रनवे से सैकड़ों मीटर दूर बिखरे थे। जली हुई सीटें, उड़ते हुए कागज और चुनावी दस्तावेज [संगीत] जैसे सत्ता और सपने दोनों के परखच्चे उड़ गए हो। जब आग बुझे तो राहत कर्मियों ने देखा वो किसी भी इंसान की रूह को हिला देने वाला था। जले हुए शव पहचान से परे लेकिन एक चीज बची थी।

एक कलाई घड़ी। वही घड़ी जो वह नेता हर वक्त पहनता था। वही घड़ी जिसे उसके सुरक्षाकर्मी, उसके स्टाफ और पुलिस तक पहचानते थे। उसी घड़ी के सहारे एक जले हुए शरीर की पहचान हुई। यह शव था महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार का। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उस सीट पर वही [संगीत] व्यक्ति बैठता था जब भी इस तरह के विमान में उड़ता था। यानी अजीत पवार उस सीट पर बैठे हुए थे। और वहीं एक जला हुआ सज पड़ा था। इस हादसे में बिखरे हुए कागज बताए जा रहे हैं कि यह अजीत पवार के थे। इसके अलावा अजीत पवार उड़ान भरते हुए हमेशा एक स्पेशल सीट पर बैठते थे। दुर्घटना के बाद शव जिस स्थिति और स्थान पर पाया गया उसका विश्लेषण करने के बाद मीडिया भी यही बात कह रही है कि अजीत पवार का यही शव है। हालांकि औपचारिक पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट के लिए नमूने भेजे हैं। ऐसा कहना है जांच अधिकारियों का। बताया जा रहा है कि 16 साल पुराने इस विमान का संचालन वीएसआर वेंचर प्राइवेट लिमिटेड कर रही थी।

विमान बारामती के अनियंत्रित हवाई अड्डे पर दूसरी बार लैंडिंगके प्रयास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुई। अजीत पवार ने सुबह मुंबई से उड़ान भरी थी और उन्हें 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव के प्रचार के लिए पुणे जिले में एक दिन में चार रैलियों को संबोधित करना था। इस हादसे में अन्य मृतकों की पहचान कैप्टन सुमित कपूर लगभग 15,000 घंटे का उड़ान भरने का अनुभव रखते हैं। कोपायलट कैप्टन शंभवी पाठक करीब 1500 घंटे का अनुभव पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर पीएसओ विदीप जाधव और फ्लाइट अटेंडेंट पकी माली के रूप में की गई है। हादसे की जांच के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो एएआईबी की एक विशेष टीम बुधवार शाम को घटना स्थल पर पहुंची और फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। जहां टीम विमान के मलबे, उड़ान, डाटा और परिचालन परिस्थितियों की गहन पड़ताल कर रही है।

अब जरा चश्मदीदों को सुनिए। उन्होंने अपनी आंखों से आखिर क्या देखा? घटना कब हुई? कैसे हुई? वह मंजर कैसा था? उनके अनुभवों को जानिए। सुनिए क्या कहेंगे यह हादसा हुआ आपने खुद देखा है से आंखों से देखा है बहुत दुख दुख भरी दर्द भरी घटना है ये हमने देखा कि एरोप्लेन जब नीचे आया था नीचे आया था ऐसा लग रहा था उसका क्रैश हो जाएगा उसका क्रैश हो जाएगा ऐसा हम सोच रहे थे तभी क्रैश हो गया हम देखे कि हमें हमें लगा नहीं क्रैश हो गया है लेकिन एयर एयर ट्रैप पे उतरेगा ऐसा लगा उतर रहा है लेकिन क्रैप हुआ और उसके बाद स्पॉट हो गया उसका जबरदस्त स्पॉट होने के बाद वो हम देखने आए पहले देखा तो उसको आग लगी थी पूरे प्लेन को और उसके बाद चार पांच स्पोर्ट हो गया ओमान में उसके और उसके बाद बहुत लोग आ गए और उसने निकालने की कोशिश की लेकिन बड़ी आग लगी उसके कारण कोई मदद नहीं कर सकता लेकिन सब आ गए बाद में उसको उसमें अजी दादा था ये हमारे लिए बहुत शौक की बात नहीं है कि हमें बता नहीं सकते हम बाद में ऐसा लेकिन हमने देखा है कि पायलट ने भी ट्राई किया होगा कि लैंडिंग करने का लेकिन लेकिन लैंडिंग हुआ नहीं है।

ये बहुत शोक वाली घटना है। हमने देखा पूरा एक नीचे आ रहा था। ट्रैप पे आ रहा था। ट्रैप के नजदीक एक 100 फुट से नजदीक आके गिर गया है। बाहर काम करत हो। विमान आ हादसे के बारे में छोटे बच्चे ने फोन करके सारे लोगों को बताया। मैं बाहर काम कर रही थी। जब धमाका हुआ तो मैंने देखा कि एक शव पूरी तरह जल गया था। एक तो पहचान ही नहीं आ रहा था। मैंने अपनी आंखों से देखा यहां बड़ा गड्ढा हो गया था। हम उतरने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वो काफी गहरा था। हम उतर नहीं पाए। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और जमीन से जुड़े हुए जन नेता श्रीमान अजीत दादा पवार इनका एक विमान के एक्सीडेंट में बहुत ही दुखद निधन हुआ है। इसकी वार्ता आने के बाद समूचे महाराष्ट्र में बहुत ही दुख का वातावरण तैयार हुआ है। हम सभी के लिए इस प्रकार के जननेता को खोना एक अपरिमित इस प्रकार की हानि है।

व्यक्तिगत मेरे लिए वह एक बहुत ही दमदार और दिलदार इस प्रकार के मित्र थे और हम दोनों ने साथ में काफी संघर्ष का काल भी देखा है और अब दृढ़ता के साथ महाराष्ट्र के विकास में जब वह योगदान दे रहे थे और एक बहुत लंबी पारी वह खेलेंगे। ऐसी परिस्थिति थी।

ऐसे समय उनका निकल जाना मैं ऐसा मानता हूं कि इसके लिए हमारे पास कोई शब्द भी नहीं है और उनके परिवार पर और उनका जो बहत परिवार है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उसके पदाधिकारी कार्यकर्ताओं पर यह जो दुख आया है यह सहना बहुत कठिन है। इससे दुख की बेला में हम सब लोग उनके साथ में हैं। अभी जो उनका परिवार है वह जब बारामती पहुंचेगा उसके बाद उनसे चर्चा करके आगे की सारी चीजें ज्ञात की जाएगी।

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