हसीन खूबसूरत चेहरा और हिरनी जैसी नशीली आंखों वाली एक ऐसी अभिनेत्री जो हिंदी सिनेमा के पदे पर आई तो उनको देखकर सबके होश उड़ गए बंगले के पीछे तेरी बेरी के नीचे हरे पि आज यह दास्ता है भारतीय हिंदी सिनेमा की एक ऐसी अभिनेत्री की जिससे बॉलीवुड के सभी सुपरस्टार्स उस दौर में शादी करना चाहते थे.
लेकिन यह अदाकारा जिंदगी भर कुंवारी ही रह गई लो आ गई उनकी 60 और 70 के दशक में जहां हीरोइन संस्कारी बहू और प्रेमिका की भूमिका निभा रही थी तो ऐसे में इस अभिनेत्री ने खूबसूरती और ग्लैमरस का बेजोड़ तड़का लगाकर हिंदी सिनेमा के आयाम ही बदल दिए कितना प्यारा वादा है इमत वाली आंखों का इस म में इनकी एक्टिंग का जादू ऐसा था कि यह बहुत कम समय में ही हर दिल अजीज बन जाती थी और उस दौर की सबसे ज्यादा पैसे चार्ज करने वाली अभिनेत्री भी बनी जिसकी एक-एक अदा पर लाखों दिल फिदा थे ये शाम मसतानी मद हो इतनी खूबसूरत मशहूर और भारतीय नृत्य संगीत में पारंगत इस अदाकारा की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि यह 81 साल से कुंवारी और अकेली हैं और कैसे इस अभिनेत्री के ऊपर एक शादीशुदा फिल्म निर्माता की प्रेमिका होने का आरोप लगा.
जिसकी वजह से यह आज तक है तन्हा और अकेली ना कोई उमंग है ना कोई क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड के टॉप एक्टर दिलीप कुमार के साथ काम करने के लिए दूसरी सभी हीरोइन मना करती थी उनके साथ इस अभिनेत्री ने कभी काम नहीं किया तो कौन थी ये अभिनेत्री जो बाल कलाकार से बनी हिंदी सिनेमा की नंबर वन अदाकारा बताएंगे और भी बहुत कुछ इस अभिनेत्री से जुड़ी बातें तो आप बने रहिए हमारे साथ वीडियो के अंत तक पर्दे में रहने दो पर्दा ना उठा [संगीत] पदा आज हम जिस अभिनेत्री की बात करने जा रहे हैं वह अभिनय की दुनिया में उन चंद सितारों में शुमार है जिनकी चमक और सफलता से बॉलीवुड आज तक चमक रहा है इनको नाम शोहरत दौलत रुतबा चाहने वालों का भरपूर प्यार सब कुछ मिला जिसके लिए दूसरी कई अभिनेत्रियां तरसती रह गई यह सभी बड़े एक्टर की पहली पसंद थी जी हां हम बात कर रहे हैं 60 और 70 के दशक की नंबर वन खूबसूरत दिलकश अदाकारा आशा पारख की मैं तुझसे मिलने आई मंदिर जाने के बहाने मैं तुझसे मिलने आशा पारेख जब-जब रुपहले पर्दे पर मनमोहक अंदाज में थिरक थी तो उनके चाहने वाले उनके दीवाने हो जाते थे लोग उनके द्वारा बोले गए एक-एक डायलॉग को सुनकर खड़े होकर ताल बजाने लगते वह इस तरह से किरदार को निभाती थी कि मानो जैसे वह उनके लिए ही बना हो इतनी खूबसूरत और सफल आशा क्या सचमुच अपनी जिंदगी से खुश थी क्या उनकी जिंदगी में कोई कमी नहीं थी जिस अभिनेत्री के लाखों दीवाने थे.
बड़े से बड़ा एक्टर उनके आगे पीछे घूम रहा था शादी की हसरत लिए वह आज भी कुंवारी क्यों है आशा पारे की जिंदगी में ऐसा कौन सा दर्द है जिसके साथ आशा आज भी जी रही है तुम मुझे यूं भुलाना पाओगे तो आज हम आपको बताएंगे कि कौन थी आशा पारे कैसे उनका फिल्मों में आना हुआ और कैसे यह बाल कलाकार से टॉप की हीरोइन बन गई मैं तुलसी तेरे आंगन की नमस्कार आप सभी का स्वागत है बॉलीवुड नोवल के इस एपिसोड में बाली उमर ने जुल्म किया जाने क्या अपनी मनमोहक मुस्कान और एक्टिंग से दीवाना बनाने वाली आशा पारख का जन्म 2 अक्टूबर 1942 को गुजरात के महुआ नाम की जगह में एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ आशा पारेख की मां एक मुस्लिम थी जिनका नाम सलमा था आशा पारेख के पिता का नाम बचू भाई पारेख था बचू भाई पारेख से शादी के बाद सलमा पारेख से सुधा पारेख बन गई आशा पारेख की मां एक स्वतंत्र सेनानी भी रही हैं आशा पारेख अपने मां-बाप की इकलौती संतान है आशा जब छोटी थी तो यह डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन इनकी मां सुधा पारख को इंडियन क्लासिकल डांस में काफी रुचि थी इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को डांस में परिपक्व बनाने के लिए कई जगह शिक्षा दीक्षा दिलवाई आशा ने भी दिल लगाकर डांस को सीखा और वह छोटी सी उम्र में ही अच्छी इंडियन क्लासिकल डांसर बन गए और इसी डांस की वजह से वह कई प्रोग्राम का हिस्सा बनने लगे.
जहां बड़े-बड़े लोग डायरेक्टर्स प्रोड्यूसर्स डांस देखने आते थे और ऐसे ही एक स्टेज डांस परफॉर्मेंस में फिल्म निर्माता विमल रॉय भी आए हुए थे जो इनका डांस देखकर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने आशा पारे के पास जाकर कर पूछा कि क्या तुम मेरी फिल्म में काम करना चाहोगी हालांकि उनकी मां फिल्मों में काम करने के खिलाफ थी लेकिन विमल जी ने सबको मना लिया और किसको क्या पता था कि उनकी बेटी को एक डांस परफॉर्मेंस की वजह से 1952 में फिल्म मां में काम करने का मौका मिलेगा इस फिल्म में आशा बाल कलाकार के रूप में काम कर रही थी कुछ समय बाद फिल्म रिलीज हुई लेकिन दुर्भाग्यवश यह फिल्म नहीं चली इस फिल्म में काम करने के लिए आशा पारख को ₹1000000 की फीस भी मिली थी और यह इनकी चाइल्ड आर्टिस्ट डेब्यू फिल्म भी थी.
इसके बाद आशा पारेख ने बा बेटी आसमान ज्वाला अयोध्या पति और चैतन्य महाप्रभु आशा जैसी लगभग आठ फिल्मों में बतौर एक बाल कलाकार काम किया लेकिन इन फिल्मों के बाद आशा पारेख ने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया क्योंकि उनको अपनी पढ़ाई पूरी करनी थी लिहाजा कुछ साल तक यह गायब हो गई और जब यह 16 साल की हुई तो इन्होंने फिर से फिल्मों में काम करने का सोचा संयोग से उसी वक्त आशा पारेख किशोर कुमार की फिल्म जग्गू में काम करने का उन्हें ऑफर मिला उसी वक्त डायरेक्टर वी शांताराम ने अपनी दो फिल्मों में काम करने का कांट्रैक्ट भी उन्हें ऑफर किया उसी वक्त फिल्म निर्माता विजय भट्ट ने उनको अपनी फिल्म गूंज उठी शहनाई में राजेंद्र कुमार के साथ फिल्म की हीरोइन का रोल ऑफर किया आशा पारिख ने इन तीनों फिल्मों से विजय भट्ट की फिल्म गूंज उठी शहनाई को चुन लिया फिल्म की शूटिंग शुरू हुई लेकिन चार या 5 दिन शूटिंग होने के बाद फिल्म निर्माता विजय भट्ट ने आशा पारेख को यह कहकर निकाल दिया कि उनके अंदर कोई भी स्टार मटेरियल नहीं है यह सुनकर आशा को काफी दुख हुआ और इस एक फिल्म के लिए आशा के हाथ किशोर कुमार और वी शांताराम की दो-दो फिल्में भी उनके हाथ से निकल गई कितनी अनोखी बात है है ना यह सब हो जाने के बाद आठ दिन के बाद फिल्म निर्माता नसीर हुसैन ने आशा पारिक को फिल्म दिल देकर देखो में शम्मी कपूर के साथ काम करने का कांट्रैक्ट ऑफर किया और आशा ने इस ऑफर को मंजूर कर लिया.
दिल देक देखो दिल देख देखो दिल देख देखो जी दिल वालो 16 साल की आशा फिल्म के हीरो शम्मी कपूर को चाचा कहकर बुलाती थी क्योंकि शम्मी आशा से काफी बड़े थे शम्मी कपूर की पत्नी गीता बाली ही उन दिनों आशा का मेकअप किया करती थी शम्मी कपूर और गीता आशा को अपनी बेटी की तरह ही ट्रीट करते थे हंसते खेलते यह फिल्म तैयार हुई इस फिल्म को आशा पारिक के जन्मदिन के दिन यानी दो अक्टूबर 1959 को रिलीज किया गया यह फिल्म उस दौर की एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई तू मेरा सनम है कहूंगी मैं पुकार के इसके बाद आशा ने 1960 में फिल्म हम हिंदुस्तानी में काम किया इस फिल्म में इनके हीरो थे सुनील दत इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा कि मैं एक बादल आवारा आशा शुरुआती दिनों से ही काफी शरारती रही हैं हम हिंदुस्तानी फिल्म की शूटिंग के समय आशा ने सुनील दत्त की चप्पल छिपा दी काफी कोशिश करने के बाद भी जब चप्पलें नहीं मिली तो आखिरकार उनको फिल्म के सेट से घर तक नंगे पैर ही जाना पड़ा तेरी आंखों के सवा दुनिया में रख इसके बाद साल 1961 में आशा ने घूंघट फिल्म में काम किया इस फिल्म की शूटिंग के दौरान आशा पारक पर उनकी शरारत और चुलबुला पन भारी पड़ गया दरअसल हुआ यह कि फिल्म को डायरेक्ट कर रहे थे मशहूर डायरेक्टर रामानंद सागर रामानंद सागर साहब जो भी फिल्में बनाते उसमें अपनी पूरी जान लगा देते थे वह फिल्म में इतना डूब जाते थे कि फिल्म में कोई भी सैड सीन के दौरान फिल्म के हीरो हीरोइन से पहले खुद ही रोने लगते थे.
और यही हुआ फिल्म घूंघट के भी एक सीन में आशा पारक को इस सीन में रोना था लेकिन उस सीन में सागर साहब आशा पारक से पहले ही रोने लगे लेकिन उन्हें रोता देख आशा पारक हंसने लगी शुरुआत में तो रामानंद सागर साहब ने उनकी इस हंसी को नजरअंदाज किया लेकिन लगातार हंसने की वजह से रामानंद सागर साहब ने अपना गुस्सा आशा पारक पर उतार दिया क्योंकि 30 बार रिटेक होने के बाद भी फिल्म का सीन पूरा नहीं हो रहा था तो गुस्से में रामानंद सागर जी बोले कि अगर फिल्म का सीन देखकर मैं रो सकता हूं तो फिर तुम क्यों नहीं रो सकती हो यह बात सुनकर आशा को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह अपने मन में कोई ऐसी घटना सोचने लगी जिसके दुख को अपने फेस पर लाकर सोचकर फीलिंग के साथ इस सीन को पूरा किया जा सके इस घटना के बाद आशा अपने करियर के प्रति गंभीर हो गई और घूंघट फिल्म की कामयाबी के बाद इनका गोल्डन पीरियड शुरू हो गया और इनकी घराना छाया जिद्दी मेरे सनम तीसरी मंजिल लव इन टोक्यो उपकार कारवा मेरी सूरत तेरी आंखें महल आया सावन झुमके जैसी सुपर डुपर हिट फिल्म में हिंदी सिनेमा को मिली कुछ कहता है.
आशा की अधिकांश फिल्म सिल्वर जुबली रही हैं इसीलिए इनको हिंदी सिनेमा की पहली जुबली गर्ल कहा जाने लगा जबकि लड़कों में यह खिताब राजेंद्र कुमार के नाम रहा है हुस्न वाले तेरा जवाब नहीं आशा का फिल्मी सफर इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा था जिसकी कल्पना खुद आशा ने भी नहीं की थी इधर आशा जी की प्रोफेशनल जिंदगी आस आसमान की ऊंचाइयों पर थी पर पर्सनल जिंदगी में वह अकेली थी उनकी मां सलमा को उनकी शादी की फिक्र थी सलमा उनको बीच-बीच में शादी के लिए कई लड़कों से भी मिलवा देती थी लेकिन आशा को एक भी लड़का अच्छा नहीं लगता था अब समय था 70 का 1972 में आशा की एक फिल्म मेरा गांव मेरा देश आई कहा जाता है कि आशा ने इस फिल्म के समय 3 लाख की फीस चार्ज की थी और इसके बाद आशा बॉलीवुड के इतिहास में सबसे ज्यादा पैसे चार्ज करने वाली अभिनेत्री बन गई थी.
आशा पारक जी दिल देके देखो के बाद फिल्म निर्देशक नसीर हुसैन जी के साथ तीसरी मंजिल फिर वही दिल लाया हूं जब प्यार किसी से होता है प्यार का मौसम कारवा बहारों के सपने जैसी सुपर डुपर हिट फिल्मों में उन्होंने काम किया था इस कामयाबी के बीच आशा पारेख और नसीर हुसैन के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थी और आशा जी ने इस बात का खुलासा अपनी ऑटोबायोग्राफी द हिट गर्ल में किया है आशा जी ने लिखा है कि मेरी जिंदगी में नासिर हुसैन जी वह इकलौते इंसान थे जिनको मैं बहुत पसंद करती थी और मैं उनसे ही शादी करना चाहती थी लेकिन नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और वह दो बच्चों के पिता थे इसलिए मैंने उनसे शादी शदी करने का विचार अपने दिल से निकाल दिया इसके पीछे की वजह थी कि आशा नहीं चाहती थी कि उनकी वजह से नासिर हुसैन का घर टूटे और उनके बीवी बच्चे बेघर हो जाएं और इसी वजह से आशा ने अपने प्यार का गला घोड़ दिया .
जिसके बाद आशा ने अपनी जिंदगी का यह फैसला लिया कि उनकी शादी अगर नासिर हुसैन से नहीं हुई तो वह किसी भी और से शादी नहीं करेंगी जिंदगी भर कुंवारी ही रहेंगी इसके बाद 70 के दशक में आशा जी ने दो बदन चिराग हीरा कटी पतंग मैं तुलसी तेरे आंगन की जैसी सफल फिल्मों में काम करके अपनी एक अमित छाप छोड़ी मैं [संगीत] तुलसी रे आंगन की आशा पारी को फिल्म कटी पतंग के लिए फिल्म फेयर में बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिला समय गुजरा और अब हिंदी सिनेमा में कई और हीरोइनें फिल्मों में आ चुकी थी और उन्होंने आशा की जगह ले ली थी 80 का दशक आते-आते आशा को बतौर हीरोइन फिल्म मिलना बंद हो गई लिहाजा आशा ने कालिया बुलंदी बटवारा जैसी फिल्मों में बहन भाभी और मां जैसे किरदारों को निभाया जी राजपूतों में बाप का दिया हुआ वचन बेटा तक निभाता है आपने तो अभिवचन दिया है आशा पारिख ने अपनी जिंदगी में सभी तरह के रोल निभाए चाहे बात गंभीर किरदार की हो या फिर कॉमेडी की आशा ने हर किरदार पूरी शिद्दत के साथ निभाया और वो उसमें सफल भी रही आशा ने लगभग 90 फिल्मों में काम किया आशा 25 सालों तक टॉप की अभिनेत्री रही और सबसे ज्यादा पैसे चार्ज करती रही आशा ने हिंदी सिनेमा के सभी बड़े फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों के साथ काम किया और खूब नाम पैसा और शोहरत कमाई [संगीत] सुनोने लेकिन इसी हिंदी सिनेमा में एक ऐसे सुपरस्टार एक्टर भी थे जिनके साथ उस दौर की सभी अभिनेत्रियां काम करने के लिए तरसा करती थी उनके साथ का करने के लिए मरा करती थी.
लेकिन आशा ने उसी एक्टर के साथ कभी काम नहीं किया और व एक्टर कोई और नहीं बल्कि दिलीप कुमार थे जब ऐसे चिकने चेहरे तो कैसे ना नजर फिसले आशा दिलीप कुमार को पसंद नहीं करती थी आशा का दिलीप कुमार के प्रति इस तरह के बर्ताव के पीछे क्या वजह थी यह आज तक एक राज है जिससे कभी पर्दा नहीं उठ सका का मेरी जिंदगी है क्या एक कटी पतंग आशा पारक ने हिंदी भाषा के अलावा गुजराती कन्नड़ पंजाबी फिल्मों में भी काम किया है साल 1991 में आशा पारिक की मां सलमा का निधन हो गया यह आशा के लिए सबसे बड़ा झटका था क्योंकि उनकी मां उनकी रीढ की हड्डी थी मां के निधन से आशा बुरी तरह टूट गई और कुछ समय के लिए डिप्रेशन में भी चली गई थी लेकिन डॉक्टर की मदद से वो इन सब से बाहर आ पाई साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म आंदोलन आशा पारिख की आखिरी फिल्म बन गई इस फिल्म में यह गोविंदा और संजय दत्त की मां का रोल निभाते हुए नजर आई थी.
इसके बाद आशा ने फिल्मों से सन्यास ले लिया क्योंकि समय तेजी से गुजर रहा था और इंडस्ट्री में अब कुछ और अभिनेत्री और अभिनेताओं का कब्जा था आशा पारिक को राजेश खन्ना धर्मेंद्र शशि कपूर मनोज कुमार शमी कपूर सुनील दत्त देवानंद जितेंद्र यह सभी पसंद करते थे और कुछ तो इनको दिल ही दिल में प्यार भी करते थे मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं आशा इन्हें कुछ स्टार्स के साथ आशा के कुछ दिलचस्प किस्से भी हैं और विवाद भी साल 1968 में आशा पारिक कन्यादान फिन कर रही थी इसी बीच यह फिल्म निर्माता मोहन सहगल और उनकी पत्नी के साथ रोहतांग के पास आमी कैंप में गई यहां आशा को आमी वाले एक छोटी सी पार्टी पर इनवाइट किया गया लेकिन वहां से लौटते वक्त रास्ते में इनकी कार खराब हो गई मजबूरी में ये तीनों कार को छोड़कर पैदल ही आगे बढ़ने लगे.
लेकिन उस समय उस जगह जंगली जानवर और भालु हों का शोर था डर की वजह से ये भगवान का नाम लेकर आगे बढ़ते जा रहे थे कि अचानक से आशा को अपने नाम की आवाज सुनाई दी आवाज की दिशा में देखा तो शशि कपूर एक जीप लेकर उनकी तरफ चिल्लाते हुए आ रहे थे उनको देखकर तीनों की जान में जान आ गई और यह जल्दी से बैठकर वहां से निकले और शूटिंग लोकेशन पर पहुंच गए जिसके बाद शशि कपूर और आशा पारख बहुत अच्छे दोस्त बन गए जाइए आप कहां [संगीत] जाएंगे इनका एक दूसरा विवाद रहा एक्टर शत्रुगन सिन्हा के साथ यह दोनों एक फिल्म साजन में एक साथ पहली बार काम कर रहे थे इस फिल्म की शूटिंग के दौरान किसी ने शत्रुघन सिन्हा से यह कह दिया कि आशा पारक ने आपके लिए यह कहा है कि कौन है यह नया लड़का और अपने ही कुमान में रहता है इस बात को सुनकर शत्रुगन सिन्हा नाराज हो गए और वह आशा पारक को एक घमंडी लड़की मानने लगे फिल्म के रिलीज के बाद शत्रु ने फिल्म फेयर मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में आशा की जमकर बुराई की और यह तक कह दिया कि मैं आशा के साथ फिल्म की शूटिंग करने के बाद अपने हाथ अच्छे से धोता था इस बात का आशा पारेख को बहुत बुरा लगा और इसके बाद दोनों में बहुत ज्यादा मनमुटाव हो गया आग लगे ऐसी के पूछने ना पाए बले ना पाए इसके बाद आशा पहली बार धर्मेंद्र के साथ फिल्म आए दिन बहार में पहली बार काम कर रही थी फिल्म की शूटिंग के बाद धर्मेंद्र शराब पी लेते थे लेकिन अगले दिन शराब की बदबू को हटा ने के लिए कच्ची प्यास खा लिया करते थे और आशा पारख को प्यास की बदबू सहन नहीं होती थी.
इसलिए उन्होंने गुस्से में धर्मेंद्र को प्याज खाने के लिए मना कर दिया फिर धर्मेंद्र ने प्यास खाने के पीछे की वजह को बताया तो आशा ने धर्मेंद्र से कहा कि मेरे साथ शूटिंग करते समय ना तो आप शराब पिए और ना ही प्यास खाएं क्योंकि मैं यह दोनों ही बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं लिहाजा धर्मेंद्र ने यह फैसला किया कि वह आशा के साथ काम करते समय शराब नहीं पिएंगे कुछ समय बाद इसी फिल्म के एक दृश्य में धर्मेंद्र को पानी में फिल्म का एक शॉट देना था ठंड बहुत ज्यादा थी और बार-बार रिटेक होने की वजह से ठंड से धर्मेंद्र का बुरा हाल हो गया तो फिल्म के निर्देशक हर रिटेक के बाद उनको एक ग्लास ब्रांडी ऑफर करते ताकि उनके शरीर में कुछ गर्मी आ सके लेकिन धर्मेंद्र आशा पारख को देखते और मना कर देते धर्मेंद्र का शरीर ठंड में जकड़ नहीं लगा तो वहां के लोग आशा पारक को गुस्से की नजर से देखने लगे तो कुछ देर बाद आशा खुद एक ग्लास ब्रांडी लेकर उनके पास गई और उसे पीने को कहा लेकिन धर्मेंद्र आशा के सामने कभी शराब नहीं पिएंगे यह वादा कर चुके थे उनकी इस बात से आशा काफी खुश हो गई और इसके बाद इन दोनों में काफी अच्छी दोस्ती हो गई संभल जाओ चल वालो के समय तेजी से गुजर रहा था आशा जी ने अपनी एक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी भी खोली थी जिसका नाम आकृति रखा था आशा पारक 1994 से लेकर 2000 तक सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन की प्रेसिडेंट भी रही तो वहीं साल 1998 से लेकर 2001 तक वह सेंसर बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष भी बनी और इस पद पर काम करने के लिए आशा पारेख ने कोई भी सैलरी या पैसा नहीं लिया इस पद पर रहते हुए इनका महेश भट्ट और शेखर कपूर से फिल्मों के सेंसर बोर्ड में पास होने को लेकर कुछ विवाद हो गया था शेखर कपूर की फिल्म एलिजाबेथ के कुछ दृश्यों को आशा पारेख ने नकारते हुए हटाने को कहा इस बात से शेखर कपूर आशा पारक से नाराज हो गए थे तो वहीं महेश भट्ट अपनी फिल्म जखम को लेकर आशा पारख से गए थे.
आशा पारख ने जख्म की कुछ दृश्यों पर आपत्ति जताई थी और उनको हटाने या फिर ब्लर करने को कहा था लेकिन महेश भट्ट ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया और उनको यह धमकी दे दी कि वह इस फिल्म को दिल्ली में लाल कृष्ण आडवाणी की मदद से ज्यों का त्यों पास करा लेंगे लेकिन दिल्ली में गृह मंत्रालय ने महेश भट्ट की एक ना सुनी और आशा पारिख की बात को ऊपर रखा इसके बाद महेश भट्ट आशा से इतने नाराज हो गए कि वह उनके ऑफिस के बाहर आशा पारिक मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे और धरना प्रदर्शन करने लगे आशा पारिक को हिटलर बताने लगे 2001 में इनका इस पद से कार्यकाल खत्म हुआ और इधर आशा ने पूरी तरह से बॉलीवुड से अपने आप को अलग कर लिया तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रखा अब आशा पारक अपनी कुछ पुरानी दोस्त वहीदा रहमान हेलन नंदा साधना के साथ अपनी जिंदगी के खूबसूरत पलों को जीने लगी आशा आप 90 साल की हो चली हैं और वह आज भी अपनी एक डांस अकेडमी चलाती हैं तो वहीं मुंबई में बने आशा पारक हॉस्पिटल को चलाने में मदद करती हैं जहां वो गरीब लोगों के इलाज के साथ-साथ उनकी हर तरह से मदद करती हैं आशा पारक ने अपने बेहतरीन सफर और काम के लिए कई अवार्ड जीते जिनमें इनको फिल्म फेयर अवार्ड के अलावा पद्मश्री अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है 2002 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी इन्हें सम्मानित किया जा चुका है तो वहीं साल 2020 में आशा पारख को भारत सरकार ने दादा साहेब फालके पुरस्कार से भी नवाजा जा के फिर सो गई सपनों में खो गई आ तो यह थी आशा पारेख जो बाल कलाकार से बॉलीवुड की सबसे चर्चित अभिनेत्री बनी जिन्होंने अपने जीवन में सभी तरह के उतार चढ़ाव को देखा वह हिंदी सिनेमा में सभी की पहली पसंद बनी उनके आगे पीछे सुपरस्टार्स की लाइन थी लेकिन वह फिर भी अपनी मर्जी से एक तरफा प्रेम में जिंदगी भर कुंवारी रही वह हमेशा लोगों के लिए खड़ी रही और कभी किसी को निराश नहीं किया आशा काफी सुलझी हुई अभिनेत्री रही हैं उन्होंने कभी भी किसी भी दबाव में काम नहीं किया.
वह हमेशा अपनी शर्तों पर जि जिंदगी को जीती रही उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक फिल्म दी जिनको आज भी हम देखते हैं और उनके गीतों को सुनते और गुनगुनाते हैं आशा पारिख के इस योगदान को बॉलीवुड नोवल की पूरी टीम दिल से सलाम करती है और उनके सुखमय जीवन और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है तो
