हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सुनहरे दौर की एक ऐसी मशहूर अभिनेत्री की जिसके कदमों ने हिंदी सिनेमा की खूबसूरती को आसमान तक पहुंचाया मेरी तमन्नाओं की तकदीर तुम संवार दो जब यह अभिनेत्री हिंदी सिनेमा में काम करने आई तो लोग क्यों इनको नर समझ बैठे और कैसे इस अभिनेत्री ने 50 के दशक से लेकर 70 के दशक तक दूसरी बड़ी अभिनेत्रियों को बराबर की टक्कर देकर हमेशा लीड रोल में काम किया आपकी नजरों ने समझा प्यार के यह मल्टीस्टारर अभिनेत्री जहां एक तरफ अपनी खूबसूरती से फिल्मों में जबरदस्त अभिनय कर रही थी।
तो वहीं दूसरी तरफ ऑल इंडिया रेडियो पर अपनी म ुर आवाज में गीत भी गाती थी लेकिन आगे चलकर इनकी जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि इनको संगीत और अभिनय में से किसी एक को चुनना पड़ा आजा तुझको पुकारे मेरे गीत इतना नाम इतनी धन दौलत के बाद भी क्यों यह हिंदी सिनेमा की सबसे कंजूस हीरोइन कहलाए इनकी जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था किनके बाथरूम से लाखों रुपए की की बारिश हो गई और पुलिस के सामने वो कौन सा राज था जिसके कबूल नामे से पूरी दुनिया के पैर उतले जमीन निकल गई और इनके फैंस इनसे करने लगे नफरत लेकिन मैं क्या करूं कहां जाऊ मेरे लिए दुनिया के सब दरवाजे बंद हो चुके हैं ।
इस अभिनेत्री को करनी पड़ी तीन शादियां क्यों इनको हिंदी सिनेमा में सबसे वाहियात अभिनेत्री माना गया क्यों इनको बॉलीवुड में काले धब्बे की तरह देखा गया खता बख दो गर खता हो गई क्यों इस अभिनेत्री को अपनी नाक बदलवाने के लिए कहा गया और क्यों इस अभिनेत्री ने करीना कपूर की यह अदाकारा जब फिल्मों में काम करने मुंबई आई तब हिंदी सिनेमा पर नरगिस मीना कुमारी मधुबाला नूतन जैसी अदाकारा हों का कब्जा था और वह रुपहले पर्दे पर छाई हुई थी प्यार किया तो डरना क्या जब प्यार किया तो डरना क्या इन सब के बीच अपनी पहचान बनाना बहुत मुश्किल था
लेकिन बेखौफ बोल्ड बेबाक रही यह अभिनेत्री का कमाल ही था कि वह अपनी पहचान बनाने में कामयाब रही और अपने साथ की सभी दूसरी अभिनेत्रियों को बराबर की टक्कर दी और अपने इसी अभिनय से यह जानी गई माला सिन्हा के नाम से अच्छा बाबा नमस्ते नमस्ते कौन थी माला सिन्हा कैसे उनका फिल्मों में आना हुआ और क्या थे उनके गंभीर विवाद जिसकी वजह से इन्होंने वह सब झेला जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी शुरुआत करते हैं के जन्म और परिवार से मस्ती भरा है समाज हम तुम है दोनों यहां माला सिन्हा का जन्म 11 नवंबर 1936 को कोलकाता के एक ईसाई और नेपाली परिवार में हुआ था इनके पिता का नाम एल्बर्ट सिन्हा था.
जबकि इनकी मां एक नेपाली महिला थी माला सिन्हा के बचपन का नाम आलडायहड सिन्हा और बेबी सिन्हा के नाम से भी जानी जाती है माला को बचपन में अपने नाम की वजह से काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी स्कूल में बच्चे माला को आर्ड की जगह डालडा घी कहकर चढ़ाते थे जिसकी शिकायत माला ने अपने घर पर की और इनकी मां ने इनका नाम माला रख दिया जिसके बाद इनको लोगों ने चढ़ाना बंद कर दिया माला को अपने बचपन के दिनों से ही संगीत और एक्टिंग दोनों में रुचि थी माला जब कुछ बड़ी हुई तो इन्होंने कम उम्र में कोलकाता के ऑल इंडिया रेडियो केंद्र में बतौर एक सिंगर काम करना शुरू कर दिया माला देखने में बहुत खूबसूरत थी तो ऐसे में इनको कई दोस्त एक्ट्रेस बनने के लिए कहा करते थे लिहाजा माला सिन्हा ने 1950 में जय वैष्णो देवी और जय श्री कृष्णा बंगाली फिल्मों में अभिनय किया यह एक बाल कलाकार के रूप में बंगाली फिल्म का हिस्सा बनी और अब माला बंगाली फिल्म और रेडियो दोनों पर काम कर रही थी बड़े ना समझ हो ये क्या चाहते हो कुछ बंगाली फिल्मों में काम करने के बाद यह एक बंगाली फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में कोलकाता से मुंबई चली आई यहां मुंबई में अचानक इनकी मुलाका प्रसिद्ध अभिनेत्री गीता बाली से हो गई गीता बाली को माला की खूबसूरती ने काफी प्रभावित किया गीता को माला सिन्हा नरगिस जैसी लगी गीता ने उनकी तुलना नरगिस से कर दी इतनी तारीफ के बाद माला सिन्हा भी अपनी खूबसूरती को और अपने आप को नरगिस जैसा मानने लगी मेरी आखों से कोई नींद लिए गता बाली ने माला को मशहूर फिल्म निर्देशक केदार शर्मा से मिलवाया और केदार शर्मा ने इनको अपनी फिल्म रंगीन रातों में बतौर अभिनेत्री चुन लिया.
माला अभी तक बंगाली और हिंदी फिल्म दोनों जगह काम कर रही थी तो ऐसे में इनका रेडियो में काम करना मुश्किल हो गया था लिहाजा कशमकश के इस मोड़ पर परिवार और दोस्तों की सलाह पर इन्होंने बॉलीवुड की फिल्मों में जाना ही बेहतर समझा शुरुआत में माला सिन्हा की एक भी फिल्म नहीं चली वह काम तो कर रही थी थी लेकिन सफलता अभी इनसे को सु दूर थी बंगाली और कई हिंदी फिल्मों में काम करने के बाद माला सिन्हा गुमनाम थी तो ऐसे में इनके डूबते सफर को सहारा मिला हिंदी फिल्म के एक्टर और डायरेक्टर गुरु दत्त जी का गुरु दत्त जी ने 1957 में फिल्म प्यासा में माला सिन्हा को कास्ट किया माला ने इस फिल्म में कड़ी मेहनत की फिल्म बनकर सिनेमा घरों तक पहुंची और इस फिल्म को दर्शकों ने दिल खोलकर प्यार दिया इस फिल्म ने माला सिन्हा को वो पहचान दिलाई जिसके लिए वह कोलकाता से मुंबई आई थी इतने कठिन संघर्ष के बाद आखिरकार माला सिन्हा बॉलीवुड की सफल फिल्मों की सफल हीरोइन बन गई दौलत नाम और शोहरत इस तरह क्यों ठुकरा रहे हो अगर ठुकराना ही है तो उन भाइयों को प्यासा फिल्म की सफलता के बाद माला साल 1958 में राज कपूर की फिल्म परवरिश में दमदार अभिनय करते हुए दिखाई दी इस फिल्म के कुछ गाने अपने दौर के सुपर हिट गीत बन गए थे मेरी आंख मिला लो जी दिल में आज छुपा लोगे इसके बाद इनकी एक और सुपरहिट फिल्म राजेंद्र कुमार के साथ आई धूल का फूल इस फिल्म को यश चोपड़ा ने बनाया था और इस फिल्म से ही यश चोपड़ा ने भी पहली बार निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा था.
यह फिल्म भी उस दौर की सफल फिल्म थी फिल्म की अपार सफलता ने माला सिन्हा को अब और दूसरी टॉप हीरोइनों की लाइन मिलाकर खड़ा कर दिया था तुमने मुझसे झूठे वाद झूठी कसमें खाई ने वफा की आड़ में बेवफाई का हथ फैलाया और अब यह मीना कुमारी मधुबाला नूतन नरगिस वहीदा रहमान आशा पारख के बराबर फिल्मों के लिए पैसे चार्ज करने लग गई थी रंग डाला ये जीवन हमने रे प्यार कदम चूम रही माला सिन्हा ने अब कई हिट और सुपरहिट फिल्मों को चार चांद लगाए और यह दुनिया ना माने जाल सास माया बेवकूफ जैसी फिल्मों में नजर आई इसके बाद साल 1962 में इनकी एक्टर मनोज कुमार के साथ एक और फिल्म आई हरियाली और रास्ता इस फिल्म की कामयाबी ने माला सिन्हा को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया था यह फिल्म मनोज कुमार और माला दोनों के ही जीवन की काफी महत्त्वपूर्ण फिल्म बन गई थी चांद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैंने सो इसके बाद ये शम्मी कपूर के साथ फिल्म दिल तेरा दीवाना की हीरोइन बनी तो वहीं फिल्म अनपढ में यह धर्मेंद्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते देखी गई.
इन दोनों फिल्मों की कहानी और संगीत काफी लोकप्रिय रहे मुझे कितना प्यार है तुमसे अपने ही दिल से माला सिन्हा ने 1950 से लेकर 1970 तक बंगाली और हिंदी दोनों ही भाषाओं में अलग-अलग किरदारों में भूमिका निभाई जिनकी वजह से यह टॉप पायदान पर आकर बैठ गई उनके दमदार खूबसूरत अभिनय से सजी कुछ हिट और सुपरहिट फिल्म धूल का फूल गुमराह बहुरानी जहां आरा हिमालय की गोद में आंखें हमसाया प्यार का सब ना पैसा या प्यार मर्यादा उनके जीवन में महत्त्वपूर्ण फिल्में रही माला सिन्हा ने किशोर कुमार के साथ भी बंगाली और हिंदी फिल्मों में काम किया था साल 1970 में माला सिन्हा ने एक के बाद एक लगभग दो दर्जन फिल्म हिंदी सिनेमा को दी माला सिन्हा हिंदी सिनेमा की पहली ऐसी अभिनेत्री रही हैं.
जिनकी इतनी सारी फिल्में सुपरहिट रही और उनको कई बार उनकी फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस के लिए नॉमिनेट किया गया लेकिन वह कभी भी इस अवार्ड को जीत नहीं पाई गैरों पे करम अपनों पेम जाने 80 का दशक आते-आते माला सिन्हा पहले के मुकाबले कम हिंदी फिल्मों में दिखाई देने लगी उनको धीरे-धीरे फिल्में कम मिलने लगी क्योंकि अब बॉलीवुड के पास रेखा शर्मिला टैगोर श्रीदेवी माधुरी अनीता राज रति अग्निहोत्री पद्मिनी कोल्हापुरी मीनाक्षी शशाद अमृता सिंह मंदाकिनी किमी काटकर जूही चावला जया प्रदा जया बच्चन जैसी खूबसूरत अभिनेत्रियां थी जो हिंदी सिनेमा में काफी चर्चित हो गई थी तो ऐसे में माला सिन्हा ने बतौर हीरोइन काम करना छोड़ दिया फिल्मों में गंभीर रोल करने उन्होंने फिर शुरू कर दिए समय गुजरता चला गया और माला सिन्हा अब फिल्मी पर्दे से गायब होने लगी साल 1994 में उनको जिद्द नाम की एक फिल्म में देखा गया यह फिल्म इनकी आखिरी फिल्म थी.
इसके बाद यह पूरी तरह से हिंदी सिनेमा से अलग हो गई और अपने परिवार के साथ समय बिताने लगी जब तक इंसान के मन में आशा है उसे हर चीज मिल सकती है यह तो रहा माला सिन्हा का संघर्ष और सफलता से भरा फिल्मी सफर आइए अब बात करते हैं इनसे जुड़े विवादों की जिनकी वजह से पूरी दुनिया में इनकी बदनामी हुई और लोग इनको एक काला धब्बा मानने लगे हिंदी सिनेमा ने पैसा शोहरत सब कुछ माला सिन्हा को दिया लेकिन फिर भी बॉलीवुड की सबसे कंजूस अभिनेत्री के तौर पर यह चर्चित थी वह कभी भी नौकर चाकर पर पैसा खर्च नहीं करती थी.
वह इतनी बड़ी कलाकार थी फिर भी घर का सारा काम वह खुद ही करती थी घर की साफ सफाई घर का खाना सब कुछ वो खुद ही किया करती थी करोड़ों रुपए की मालकिन घर में नौकर की तरह रहा करती थी कहा जाता है कि यह आदत उनको अपने पिता से विरासत में मिली थी क्योंकि उनके पिता भी ऐसा ही किया करते थे कितनी अजीब विडंबना है कि फिल्मी पर्दे पर करोड़ों लोगों का दिल जीतने वाली यह अभिनेत्री घर में इस तरह से रहती थी हर कोई मुझसे यही सवाल पूछता है मुझे मेरे हाल पे छोड़ माला सिन्हा ने 40 सालों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया वह हर दिल अजीज रही बंगाली और हिंदी भाषा के फिल्म करने के बाद इनको नेपाली भाषा की भी फिल्म मिलने के ऑफर आने लगे तो ऐसे में माला सिन्हा ने एक नेपाली फिल्म मायती घर करने का फैसला किया और वह इस फिल्म के लिए नेपाल चली गई जहां इनकी फिल्म की कोस्टार चिदंबर प्रसाद लोहानी थी जो नेपाली फिल्म इंडस्ट्री का जानामाना चेहरा थी और उनका अच्छा खासा व्यापार वहां पर जमा हुआ था माला इनके साथ काम करते हुए इनको पसंद करने लगी दोनों की मुलाकात बा शादी तक पहुंच गई और 16 फरवरी 1968 को यह दोनों शादी के बंधन में बंद गए पहले इन दोनों ने कोर्ट मैरिज की क्योंकि इनको डर था कि कहीं घर वाले इनकी शादी के लिए नहीं माने तो इसीलिए घर वालों के डर से इन्होंने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली इसके बाद माला सिन्हा के पिता ने शादी को स्वीकार कर लिया.
लेकिन शादी को ईसाई रीति रिवाज से करने के लिए कहा क्योंकि माला के पिता ईसाई थे तो इन्होंने अपने पिता के रीति रिवाज से चर्च में भी शादी की और फिर लोहनी के घर वाले हिंदू नेपाली थे और वह माला को तभी घर में अंदर ले सकते थे जब तक वह हिंदू रीति रिवाजों से सात फेरे नहीं ले लेती तो हुआ यूं कि इन्होंने हिंदू रीति रिवाजों से भी शादी की और इस तरह से माला सिन्हा ने एक ही इंसान से तीन बार शादी की जो अपने आप में एक बड़ी बात है मुझसे शादी कर लो महेश उससे शादी कर लो माला सिन्हा बॉलीवुड का एक चर्चित चेहरा थी उनके पास फिल्मों की लाइन थी वह उस समय भी पैसा कमाने में टॉप पर थी लिहाजा एक दिन मुखबिर की खबर पर साल 1978 में इनके घर आईटी का छापा पड़ गया तलाशी के दौरान माला सिन्हा के घर में एक वॉशरूम की दीवार से उस समय 12 लाख मिले इतना कैश मिलना उस दौर में बड़ी बात थी बताया जाता है है कि यह पैसे उनके पिता ने माला की कमाई से निकालकर यहां छिपा कर रखे थे पुलिस पैसे को जब्त करके ले गई माला और उनके पिता इन पैसों को यूं ही नहीं जाने देना चाहते थे .
इसलिए माला और उनके पिता ने वकील की मदद ली और उनकी सलाह पर एक ऐसा कदम उठा लिया जिसकी वजह से इनको वाहियात एक्ट्रेस और बॉलीवुड पर काला धब्बा माना जाने लगा बस सब जुल्म की हा हो गई केस कोर्ट में गया और माला सिन्हा ने कोर्ट में यह बयान दे दिया कि उन्होंने यह सारे पैसे विष्य वृत्ति जिस्म फरोशी करके कमाए हैं उनकी इस बात ने सबको हिलाकर रख दिया जिसने भी इस बात को सुना उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और यह खबर सभी न्यूज़पेपर की हेडलाइन बन गई और माला सिन्हा को लोग गंदी नजर से देखने लगे उनके फैंस उनसे नफरत करने लगे और कुछ डायरेक्टर और प्रोड्यूसर ने माला सिन्हा से दूरियां बना ली और इस तरह पैसों को बचाने के लिए माला सिन्हा ने वो दाग अपने ऊपर लगा लिया जो शायद ही कभी मिट पाए झूटी गवाही दे रही है नहीं सरकार नहीं मेरा विश्वास कीजिए मैंने जो कुछ भी कहा बिल्कुल सच कहा बिल्कुल सच बिल्कुल सच माला सिन्हा हमेशा चर्चा में बनी रही कभी फिल्म की सफलता को लेकर तो कभी अपनी पर्सनल जिंदगी को लेकर माला सिन्हा काफी सुलझी हुई अभिनेत्री रही हैं.
उनका बर्ताव हमेशा बड़ा शालीनता वाला रहा है लेकिन एक बार उनकी जिंदगी में मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के साथ हुई झगड़े ने काफी सुर्खियां बटोरी थी हुआ यूं कि साल 1968 में आई फिल्म हमसाया के सेट पर माला सिन्हा ने शर्मिला टैगोर को सबके सामने एक जोरदार थप्पड़ मार दिया था बताया जाता है कि इस फिल्म की शूटिंग में सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन इन दोनों अभिनेत्रियों के बीच एक दूसरे के स्टारडम स्टाइल फैशन को लेकर कुछ बहस पिछले कई दिनों से चली आ रही थी और एक दिन फिल्म के सेट पर यह दोनों अभिनेत्री आपस में भिड़ गई और माला सिन्हा ने शर्मिला को एक तमाचा रसीद कर दिया फिल्म के हीरो जॉय मुखर्जी ने बीच बचाव कराया जिसके बाद इन दोनों अभिनेत्रियों ने एक दूसरे से बात नहीं की मुझे [संगीत] मौ क्या कर माला सिन्हा ने अपने दौर के सभी सुपरस्टार्स के साथ काम किया और उनके हीरोइन बनके फिल्मों में चार चांद लगाए माला सिन्हा ने अपनी जिंदगी में काफी कुछ हासिल किया तो काफी कुछ खोया भी जहां कभी उनकी तुलना मशहूर अभिनेत्री नरगिस से हुई तो वहीं एक डायरेक्टर ने उनको यह कहकर फिल्मों से दूर रहने को कहा कि उनकी नाक वाहियात है और ऐसी नाक को लेकर कोई हीरोइन कैसे बन सकता है उनको उनकी नाक तक बदलवाने के लिए कह दिया गया.
