किसने दिया था साधना को बेऔलाद और बदसूरत होने का श्राप?

गुजरे जमाने की एक ऐसी अदाकारा की जिसने अपनी हर छोटी सी अदा को सिनेमा जगत का फैशन बना दिया फिर क्या हुआ गैया फिर झमका गिराले हम दोनों के इस प्या आज जिस कलाकारा की एक छोटी सी झलक पाने के लिए लाखों युवक मर बिट थे उनकी की कहानी बेहद मनोरंजक और आश्चर्यजनक तो है ही पर उनकी जीवन की कहानी बेहद दुख भरी भी हैह जैसे कि कैसे सालों पहले बेहद तकलीफ में दुनिया को अलविदा कहने वाली साधना आज भी हमारे बीच जिंदा है मुझे यही उतरना है इस वीराने में यह तो कब्रिस्तान है लेकिन यहां कहां जाओगे आपने तो कहा था आप कोई सवाल नहीं करेंगे ऐसे एक जमींदार की बेटी को उसके बचपन में स्कूल का मुंह तक नहीं देखने को मिला ऐसे भारत पाक के बटवारे के दंगों में साधना को दरदर भटकना पड़ा कपूर खानदान के सबसे बड़े अभिनेता से साधना का ऐसा कौन सा झगड़ा हुआ कि उन्हें उसके बाद कपूर बैनर तले एक भी फिल्म नहीं मिली कहानी बहुत अच्छी बना के लाए हो.

लेकिन अब मेरा कहानियों से जी नहीं बहलता लाखों करोड़ों कमाने वाली साधना को आखिर क्यों किराए के मकान में रहना पड़ा आखिर क्यों क्यों उन्हें दरदर भटकना पड़ा साधना ने ऐसा क्यों कहा कि आशा भोसले ने उनके जीवन को नर्क बना दिया नाम है कोई साधना के जीवन में ऐसी क्या विपत्ति आ गई थी कि उन्हें अपनी दोनों आंखों को ना पड़ गया था जिसके लिए प्रोड्यूसर ब्लैंक चेक लेकर खड़े रहते थे उसे आखिर पैसों की तंगी में तड़प तड़प कर अपनी जान क्यों देनी पड़ गई l

साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को कराची में हुआ हां जो आज भारत के बंटवारे के बाद पाकिस्तान में है इनके पिता का नाम शिवराम शिवदसानी और मां का नाम लीला देवी पर क्या आपको पता है कि साधना का असली नाम साधना नहीं बल्कि अंजलि था तो आखिर अंजलि कैसे बन गई साधना शी देसानी साधना के पिता बंगाली अदाकारा साधना बोस के बहुत बड़े प्रशंसक सते सो पिता ने उसी अदाकारा के नाम पर अंजलि का नाम बदलकर साधना कर दिया वैसे आपको बता दें कि साधना के पिता कराची के एक अमीर जमीदार और एक बड़े व्यवसाई थे और जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो उस बटवारे की आग में इनके परिवार को कराची छोड़कर भागना पड़ा गुड़िया यह कोई मेला नहीं है हम य घूमने नहीं आए मेरा हाथ छोड़ना मत पिता पूरे परिवार को लेकर दिल्ली आए और दिल्ली में जब छत नहीं मिली तो दिल्ली से बनारस आ गए उस मारामारी और दंगे के माहौल में बनारस में भी बात नहीं बनी और फिर वह बनारस से कोलकाता पहुंचे कोलकाता में भी कुछ दिनों का गुजारा करना मुश्किल हो रहा था.

उसके बाद उन्हें छत मिली तो मुंबई में वैसे कुछ दिनों तक तो शिवराम शिवदसानी शरणार्थी शिविर में ही रुके मुंबई इसलिए आए क्योंकि साधना के चाचा जी यहीं पर रहा करते थे कौन हो तुम लाले की जान किधर ना करे मेरे इनके चाचा हरीश शिवदसानी हरीश शिवदसानी बंटवारे से पहले ही मुंबई आकर बस गए थे और भारतीय सिनेमा में एक एक्टर के तौर पर काम कर रहे थे वैसे आप इनकी बेटी को भी अच्छी तरह जानते होंगे बबीता शिवदसानी जो कि सिनेमा जगत में एक अच्छी एक्ट्रेस रही हैं वैसे इन्हें आप पहचान पाएंगे करिश्मा कपूर और करीना कपूर की मां के नाम पर खु में सलम उठ गए जो तो साधना पर चलते हैं धीरे-धीरे समय बीता और इनका परिवार शरणार्थी शिविर से निकलकर बम्बे के एक सयान कस्बे में रहने लगा पिता ने परिवार चलाने के लिए पास ही एक किराने की छोटी दुकान खोल ली किसी तरह शिवराम सिद्ध सानी अपने परिवार का गुजर पसर ही कर रहे थे .

वक्त का लिखा पूरा कर रहा हूं हरदयाल लेकिन तुम था कहां जरा खबर तो दी होती परिवार के रहने गुजर बसर करने और खाने पीने का इंतजाम तो हो गया था अब साधना की मां नेने सोचा कि चलो अब साधना की पढ़ाई की सोचते हैं साधना की मां लीला देवी पास ही के स्कूल में साधना को लेकर पहुंची प्रिंसिपल ने जब साधना को देखा तो बड़ी जोर फटकार हुए कहा यह कितनी बड़ी है और आपने अभी तक इसे स्कूल तक नहीं भेजा तब साधना की मां ने बड़े मासूमियत से कहा साहब हम जिस हालात से गुजरे हैं वह बड़ा ही भयावह था वैसे मैंने साधना को घर पर ही बहुत कुछ पढ़ा दिया है चाहे तो आप एक बार टेस्ट लेकर दे देख लीजिए प्रिंसिपल साहब ने साधना को अपने पास बुलाया साधना का एक छोटा सा टेस्ट लिया साधना हर एक सवाल का जवाब फर्राटे से दे रही थी जो प्रिंसिपल अभी तक गुस्से में थे वह साधना के फटाफट जवाब देने से बहुत खुश थे साधना को आठ वर्ष की उम्र में स्कूल में प्रवेश मिल गया था.

और स्कूल में प्रवेश क्या मिला मानो कि एक परी को उसके पर मिल गए हो आना ने पढ़ाई शुरू की और साधना उन दिनों होनहार छात्रों में गिनी जाने लगी स्कूल के डांस और ड्रामा में वो बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती साधना के मन में बचपन से सिर्फ एक ही ख्वाब था कि वह कैसे बड़ी हो जाएं और अपने माता-पिता की आर्थिक मदद करें साधना थोड़ी बड़ी हुई तो उन्होंने अपने स्कूल में ही टाइपिंग सीख ली और टाइपिंग सीखने के कुछ ही दिनों बाद एक टाइपिस्ट के तौर पर एक जॉब पकड़ ली अब साधना अपने पिता की आर्थिक मदद भी कर रही थी पर साधना के मन में अपने करियर को लेकर सिर्फ एक ही ख्वाब था कि वह बड़े होकर एक नामी गिरामी एक्ट्रेस बनेंगी नूतन साधना की फेवरेट एक्ट्रेस थी.

साधना जब एक्ट्रेस नूतन की फिल्में देखती तो पूरा दिन अपने घर में सिर्फ उन्हीं की बातें किया करती सुंदर मन भी सुंदर तू कहते हैं ना जब आप किसी चीज को शिद्दत से चा ले तो पूरी कायनात आपको उससे मिलाने की कोशिश करती है ऐसे में एक दिन स्कूल में ही फिल्म कंपनी वाले आए उन्हें अपनी फिल्म के लिए एक बैकग्राउंड डांसर की जरूरत थी साधना को जब यह पता लगा तो झट से पहुंच गई पाउडर लगा दादी लगा जल्दी साधना का चयन भी हो गया भारतीय सिनेमा में साधना का यह पहला कदम था उस साधना की पहली फिल्म थी श्री 420 जिसमें हीरो थे हमारे राज कपूर साहब और एड्रेस थी नादरा अब इनका चयन तो हो गया पर सेट पर जब साधना पहुंची तो इनका आमना सामना हुआ इनके चाचा हरी सद सानी से साधना अपने चाचा को देखकर थोड़ा सा सहम गई और चाचा जी को लगा कि साधना फिल्म की शूटिंग देखने आई है हरी सध सानी थोड़ा मुस्कुराए और आगे बढ़ गए पर जब साधना को उन्होंने बैकग्राउंड डांसर के रूप में देखा तो आश्चर्य पड़ गए हां तो साधना को अब फिल्म में एंट्री तो मिल गई थी के मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के इधर साधना की पढ़ाई भी पूरी हो गई तो साधना ने मुंबई के जय हिंद कॉलेज से बीए की पढ़ाई शुरू कर दी.

कॉलेज से आ गई बिटिया हां हां आज तबीयत कैसे तबीयत तो ठीक है इधर साधना कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी तभी एक सिंधी फिल्म निर्माता भारत के बंटवारे पर फिल्म बना रहे फिल्म का नाम था अवाना साधना को पता लगा कि यह फिल्म निर्माता किसी एक नई लड़की के तलाश में है साधना ने तुरंत अपने फोटोग्राफ वहां पहुंचा दिए अवाना के निर्माता को जिस लड़की की जरूरत थी वो उन्हें साधना के रूप में मिल गई साधना का सिलेक्शन भी हो गया साधना जी को इस फिल्म में काम करने के लिए जो मेहनताना मिला उसे सुनकर आप भी आश्चर्य पड़ जाएंगे वो रकम थी महज ₹ शूटिंग के दौरान साधना जी ने फिल्म की एक्ट्रेस शीला रमानी से ऑटोग्राफ लिया ऑटोग्राफ लेते वक्त सादा बहुत खुश थी कि वह जानी मानी एक्ट्रेस शीला रमानी का ऑटोग्राफ ले रही हैं शीला रमानी ने साधना को देखते हुए कहा आज तो मेरा ऑटोग्राफ ले रही हो और इतनी खुश दिखाई दे रही हो देखना जल्दी वह दिन आएगा जब यह सारा जमाना तुम्हारा ऑटोग्राफ मांगेगा साधना के रोल से सभी प्रभावित थे साधना की एक फोटो स्क्रीन मैगजीन पर छपी और इस फोटो पर नजर पड़ी उस जमाने के जानेमाने डायरेक्टर शशिधर मुखर्जी की जो कि फिल्मालय स्टूडियो के मालिक थे शशिधर मुखर्जी को साधना इतना पसंद आई कि उन्होंने साधना को अपने फिल्मालय स्टूडियो बुलाया उन्होंने साधना को 50 महीने का ऑफर दिया एक रप में इंता ना पाने वाली साधना के लिए 50 असंख्य संख्या थी शशिधर मुखर्जी एक नामी किरामी निर्माता थे.

उन्होंने यह जुआ यूं ही नहीं खेला था क्योंकि वह अपने बेटे जवाय मुखर्जी को लच कर चाह रहे थे उन पर एक फिल्म बनाना चाह रहे थे उन्हें उस फिल्म के लिए एक हीरोइन की तलाश थी साधना उन्हें जज गई थी निर्माता शशिधर मुखर्जी ने फिल्म बनाई लव इन शिमला फिल्म के डायरेक्टर बने आर के नैयर पर आर के नैयर बार-बार साधना को लेकर एक बात में उलझ रहे थे नैयर साहब को साधना का माथा बार-बार अखर रहा था साधना जहां बेहद खूबसूरत थी वहीं उनका माथा काफी बड़ा था कई हेयर स्टाइलर बुलाए गए उनके बालों को सही किया गया कि उनका माथा थोड़ा छोटा दिखे य चश्मा क्यों लगाती है मेरे सर में दर्द होता है.

दादी पर नैयर साहब को यह जच ही नहीं रहा था फिर आर के नैयर साहब ने इन्ह हॉलीवुड एक्ट्रेस डे हेड बेल्डन की तरह हेयर कट दिया जिसके बाद तो साधना का लुक ही बदल गया जो देखता देखते ही बनता आपने मेरे बाल क्यों काट दिए इसलिए कि आजकल मर्दों को औरत के बाल पसंद नहीं आ साधना ने लव इन शिमला फिल्म पूरी की और जब यह फिल्म रिलीज हुई तो हर जगह सिर्फ साधना की बात हो रही थी फिल्म बेहद कामयाब [संगीत] हुई इधर उधर क अपनी पहली फिल्म से साधना पूरी फिल्म नगरी में छा गई थी इधर फिल्म की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर आर के नैयर साधना के प्रति आकर्षित हो गए थेए समले दिल हथेली पर साधना भी कहीं ना कहीं आर के नैयर को पसंद करने लगी थी और यह एक दूसरे के प्रति आकर्षण कब दोस्ती और कब प्यार में बदला यह पता ही नहीं लगा यह प्यार अब शादी के बंधन में बंधना चाह रहा था हम तुम्हारे लिए तुम हमारे लिए साधना एक पारिवारिक लड़की थी.

साधना ने अपने पेरेंट्स को इस बारे में बताया पर साधना के पेरेंट्स इस बात के लिए तैयार नहीं थे दोनों के बीच में जज डिफरेंस बहुत ज्यादा थाने का क्या है तो यह शादी तो रुक गई पर इधर शशिधर मुखर्जी ने फिल्म के हिट होने के बाद साधना को सा स महीने से बढ़ाकर 000 महीने की सैलरी देना शुरू कर दिया और इसके बाद तो फिर मानो हिट फिल्मों का सिलसिला शुरू ही हो गया 1961 में इनकी फिल्म दे नंद साहब के साथ आई फिल्म का नाम था हम दोनों फिल्म के गाने खूब पसंद किए गए अभी ना जाओ छोड़ कर के दिल अभी भरा नहीं.

हर फिल्म के साथ साधना नई प्रसिद्धि हों को छू रही थी लोग की दीवानगी साधना के प्रति मानो बढ़ती ही जा रही थी बताते हैं साधना एक दिन अपनी सहेली के साथ एक दुकान पर साड़ी खरीदने पहुंची लोगों ने साधना को देखा और पहचान गए वहां पर ऐसा माहौल था कि मानो सभी के सभी लोग पागल हो गए हो भीड़ इतनी बड़ी कि भद्दल मचने की नौबत आ गई दुकानदार ने तुरंत दुकान का सेटर गिरा दिया और साधना को पीछे के गेट से निकाल दियारे पीछे प्यार करने वाले तो ऐसी थी साधना की दीवानगी साधना के पास फिल्मों की लाइन लगी थी फिर साल आया 1962 जब देवानंद के साथ उनकी फिल्म आई असली नकली आप नहीं समझ स आनंद बाबू आज मैं कितनी खुश हूं लड़कियों को खुद खाने के बजाय दूसरों को खिलाने में ज्यादा खुशी मिलती है यह फिल्म हिट होने के साथ-साथ एक बहुत बड़ी म्यूजिकल हिट भी साबित हुई मेरा प्यार अमल फिर क्यों मुझको लगता और फिर राज खोसला ने जय मुखर्जी के साथ एक फिल्म बनाई उसका नाम था एक मुसाफिर एक हसीना यह फिल्म भी साधना के नाम पर ही हो ग बातें ना करो हसी जादूगर रा दिल तेरी आंखों में खो जाए साधना का तो यह आलम हो गया था कि बड़े-बड़े डायरेक्टर सिर्फ और सिर्फ साधना को ही लेना चाह रहे थे करूं क्या ये मेरी समझ में ना आए डायरेक्टर एच एस रवेल ने जब मेरे महबूब फिल्म बनाने की सोची तब साधना के पास डेट नहीं थी एचएस रवेल ने फिल्म को आठ महीनों के लिए रोक दिया.

उन्होंने कहा जब साधना जी खाली होंगी तभी यह फिल्म बनेगी इस फिल्म में साधना का किरदार एक मुस्लिम महिला का था 1962 में यह मूवी प्रदर्शित हुई साधना की यह पहली कलर फिल्म थी मबू तुझे [संगीत] मोहबत और मेरे महबूब जब रिलीज हुई तो वो उस वर्ष की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इस फिल्म के साथ ही साधना सबसे ज्यादा फीस लेने वाली हीरोइनों की लिस्ट में शामिल हो गई और इस फिल्म के बाद पूरे देश में मानो एक जादू सा हो गया था पूरे देश के किसी भी प्रदेश में हर जगह अगर दिख रही थी तो साधना दिख रही थी पर साधना तो एक थी इतनी सारी साधना कहां से आखिर आ गई थीरू उठकर अब कहां जाएगा हां तो हुआ कुछ यूं था कि साधना का हेयर स्टाइल इतना मशहूर हो गया था कि हर लड़की उन्हीं के हेयर स्टाइल में दिख रही थी और यह हेयर स्टाइल उस समय से लेकर आज तक साधना कट हेयर स्टाइल के नाम से मशहूर है कारा रे बरेली के बाजार में झुमका गिरा रे फिर चाहे वह आंखों में तिरछा काजल हो या कानों में बड़े-बड़े चुंके साधना की ऐसी दीवानगी देखकर निर्देश राज खोसला ने तो यहां तक कह दिया था कि आखिर साधना की सुंदरता है या कोई रहस्य जिसे कोई समझ ही नहीं पा रहा है .

दिन प्रतिदिन वो रोज नए आयाम ले रही हैन के नाना मेरे पीछे ना आना प्यार करने वाले साधना ने मनोज कुमार के साथ फिल्म बनाई वह कौन थी जिसमें साधना का डबल रोल था साधना की एक्टिंग के आगे बड़े-बड़े कलाकार नतमस्तक थे कहोगे वही छोड़ दूंगा लेकिन तुम मुझसे बहुत कुछ पूछोगे नहीं चाहोगी तो नहीं पूछूंगा कुछ नहीं पूछोगे ना साधना को इस फिल्म के लिए फिल्म फेयर अवार्ड में नॉमिनेशन मिला इधर 1964 में इनकी एक और मूवी आई फिल्म का नाम था राजकुमार इस फिल्म के हीरो थे सम्मी कपूर और यह फिल्म भी बड़ी हिट साबित हुई पुकारा है हम चले आए जान हथेली पर का दौर यह आ गया था बड़े-बड़े एक्टर साधना के साथ फिल्म करना चाह रहे थे उन्हें लगता था कि अगर कहीं चूक होगी भी तो साधना के नाम पर फिल्म हिट हो जाएगी.

जीवन साथी बता क दिल धड़के इस फिल्म के बाद इनकी एक और फिल्म आई जिसका नाम था दूल्हा तुलन जिसके हीरो थे सम्मी कपूर के भाई शोमैन राज कपूर पर इस फिल्म की शूटिंग के दौरान कुछ ऐसा वाक्या हुआ साधना को कभी कपूर कैब में कोई भी रोल नहीं मिला और तो और साधना की इस फिल्म के बाद अपने परिवार से भी काफी दूरी हो गई मैं तो तुम संग नैन मिला के मर गई सजना हुआ कुछ यूं कि साधना की बहन बबिता जो कि फिल्मों में आना चाह रही थी पर उससे पहले उनकी मुलाकात हो गई थी राज कपूर के बड़े बेटे रणधीर कपूर से और यह मुलाकात उनकी प्यार में भी बदल गई थी और प्यार हो और चर्चाएं ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता इसकी बॉलीवुड में खूब चर्चा हुई और यह बात जब राज कपूर साहब के पास पहुंची तो राज साहब ने साधना को बुलवाया कहा बबिता को समझाती क्यों नहीं साधना इस बात को सुनकर कुछ समझ नहीं पाई वह कुछ बोलती इसके पहले राज साहब ने फिर कह दिया तुम्हारी बहन दो सपने एक साथ देख रही है साधना इतनी सौम्य और सरल थी कि उन्होंने कुछ भी नहीं बोला व सर जगाए सिर्फ राज साहब की बातें सुनती रही .

राज साहब ने कहा पहले तो वह फिल्मों में काम करना चाहती है और दूसरा वह कपूर परिवार की बहू बनना चाहती है राज साहब ने कहा साधना तुम सुन रही हो ना कपूर खानदान में शादी के बाद बहुएं फिल्म में काम नहीं करती मेरी बात तुम्हें समझ में आ रही है ना इस बात को सुनकर साधना ने राज कपूर साहब से कहा राज साहब क्या फिल्मों में काम करने वाली लड़की आवारा होती हैं या जो फिल्मों में काम नहीं करती सिर्फ वही शरीफ होती हैं यह सुनते ही राज साहब भड़क उठे उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें समझाने की कोशिश कर रहा हूं और तुम सिर्फ साधना का पक्ष ले रही हो साधना ने कहा सर आप मेरी बात तो सुनिए पर राज कपूर साहब तुरंत उठे और तुरंत गेट बंद करते हुए चले गए वहां मौजूद फिल्म के यूनिट प यह बात आग की तरह फैल गई कि राज साहब और साधना में झगड़ा हो गया गया है और साधना ने न जाने ऐसा क्या कह दिया कि राज साहब भड़क कर चल दिए और यह बात बबिता को भी पता लगी बबिता साधना से नाराज हो गई उन्होंने साधना से कुछ पूछा नहीं और साधना ने भी बड़ी बहन होने के नाते बबीता को कुछ भी नहीं बताया उन्होंने सोचा अभी कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा फिर एक फंक्शन के दौरान बबीता और साधना दोनों आमने-सामने मिली बबिता का गुस्सा चरम पर था .

बबीता ने साधना की तरफ देखते हुए कहा कि तुम्हें सब कुछ पता था फिर भी तुमने मुझे कुछ नहीं बताया बबीता को लग रहा था कि साधना ने उनके पक्ष की कोई बात राज साहब के सामने रखी ही नहीं साधना ने सब कुछ सरलता से बताने की कोशिश की उन्होंने कहा कि राज कपूर तुम्हारे और रणधीर के रिश्ते से बिल्कुल भी खुश नहीं है पर बबिता कुछ सुनने को तैयार कहां थी उनके मन में तो सिर्फ गलतफहमी घर कर गई थी और बबिता साधना की बात सुने बगैर सिर्फ साधना से बहस करती रही तभी साधना ने कहा बबिता मेरी बात तो सुनो मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूं बबिता दूसरे ही अंदाज में थी बविता ने इस बात पर कहा कि हां तुम बड़ी नहीं बहुत बड़ी हो तुम तो लाखों में रुपए कमाती हो अब तुम किसी को अपने बराबर तो समझती ही नहीं उसके बाद बबिता ने जो बोला वह शायद अच्छा नहीं बोला बबिता ने कहा कि तुम्हें मेरा भला बुरा सोचने की जरूरत नहीं तुम मुझे खुश ही नहीं देख सकती और तुम कह रही हो कि मैं तुम्हारी औलाद की तरीके हूं तो कभी कोई अपनी औलाद के बारे में ऐसा नहीं सोचता और ऐसी सोच रही तुम्हारी तो तुम अपनी औलाद के लिए ही तरस जाओगी देख लेना तुम पूरी जिंदगी अपनी एक औलाद के लिए तरसोगी .

उसके बाद साधना और बविता में हमेशा हमेशा के लिए रिश्ते खत्म हो गए इस वाक्य का असर शायद साधना के फिल्मी कैरियर पर भी पड़ा तुम संग मैं मिला के साधना और राज कपूर की फिल्म अराउंड द वर्ल्ड की शूटिंग अचानक रोक दी गई और तो और कुछ ही दिनों बाद साधना को इस फिल्म से हटा भी दिया गया इसी तरह राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर जिसमें पहले साधना को लिया जाना था बाद में उन्हें हटाकर उनकी जगह सिमी ग्रेवाल को लिया गया चलो कमन और शायद साधना को बविता को लेकर जिस बात का डर था वही हुआ जहां साधना चाहती थी कि उनकी बहन फिल्मी पर्दे पर खूब नाम करें वहीं उनका फिल्मी करियर अचानक खत्म हो गया जब हो 6 साल के और मैं होंगी बचपन की प्रीत की ज जला चलिए एक बार फिर साधना की सुपरहिट फिल्म वह कौन थी.

किस सेट पर चलते हैं साधना जी ने एक इंटरव्यू में खुद बताया कि इस फिल्म का एक सीन रैना बरसे रिम झिम रिमझिम शूट होना था पूरी यूनिट के साथ हमें एक हिल स्टेशन पर पहुंचना था तभी पता लगा कि लता जी की अचानक तबीयत खराब हो गई है अब शूटिंग कैंसिल हो जाएगी तभी अचानक संगीतकार मदन मोहन ने यह सुझाव दिया कि आप मेरी आवाज में गाना रिकॉर्ड कर शूट कर लें बाद में हम इसे लता जी की आवाज में गवा लेंगे यह गाना शिमला में शूट हो रहा था साधना गाने पर लिप्सिंग कर रही थी और गाना मदन मोहन की आवाज में चल रहा था वहां पर शूटिंग देखने का बड़ा हुजूम था तभी अचानक एक बच्चा बोल पड़ा आखिर यह कौन सी फिल्म है जिसकी हीरोइन आदमी की आवाज में गाना गा रही है यह सुनकर पूरी शूटिंग यूनिट जोर-जोर से हंसने लगी थी तभी कुछ दिनों बाद 1965 में यस चौपड़ा निर्मित वक्त फिल्म रिलीज [संगीत] हुई साधना जी ने अपनी अदाकारी से कमाल कर दिया था कि बात की चाय पने की आपके साथ जर य पूछने की बात है साथ ही पूरे भारत में एक नया फैसल ला दिया था हेलो मीना हम बहुत बार आए तुमसे आजकल मुलाका नहीं होती उन्होंने चूड़ीदार पजामे के साथ कट स्लीप कुर्ता क्या पहन लिया मानो हर लड़की का वो स्टाइल बन गया वैसे आपको बता दें इस स्टाइल का ईजाद भी खुद साधना जी ने ही किया था.

जब साधना जी नेने ये पहनने को कहा तो यश चौपड़ा ने तुरंत मना कर दिया पर साधना का ड्रेसिंग सेंस इतना जोरदार था कि वह अगले दिन शूटिंग लोकेशन पर यही ड्रेस पहनकर पहुंच गई साधना जब इस ड्रेस के साथ पहुंची तो पूरी शूटिंग यूनिट उन्हें देखती ही रह गई यश चोपड़ा ने तुरंत इस ड्रेस को पास कर दिया वक्त फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई खुशी ती है आंखों में सु वैसे इसी साल भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध भी खत्म हुआ साधना को लगा क्यों ना अपने देश के सैनिकों से मिला जाए और उनका उत्साह बढ़ाया जाए साधना श्रीनगर से 134 किलोमीटर दूर ताग धार के पास 10000 फीट की ऊंचाई पर नाश्ता चुल पर सैनिकों से मिलने पहुंच गई वहां पर उस भारी ठंड में सिर्फ साधना को देखने के लिए भारी हुजूम आ गया कहते हैं.

उस वाक्य के बाद ही उस नाश्ता चुल पास को लोगों ने साधना पास कहना शुरू कर दिया में चमक जाग उठी दिल के सोए इसी साल साधना की एक और फिल्म आई फिल्म का नाम था आरजू साधना ने इसमें बड़ा ही भावनात्मक रोल किया था जानती हूं बाबूजी जी आप क्या कहना चाहते हैं लेकिन मेरे पास आपके किसी सवाल का जवाब नहीं और यह फिल्म भी हर बार की तरह बहुत बड़ी ब्लॉकबस्टर हुई तेरी बाल मा तुझको मेरा मन याद करता है तो चलिए एक बार थोड़ा पीछे और चलते हैं जैसा कि आपको पहले ही बताया साधना अपनी पहली फिल्म के दौरान डायरेक्टर आर के नैयर से प्यार करने लगी थीन मस्ताना बस इतनी शिकायत है पर दोनों की उम्र के बीच में बड़ा अंतर था और उनके परिवार वाले शादी के लिए नहीं माने पर इन पांच से छह वर्षों में उन दोनों लोगों ने अपने परिवार को मना लिया 7 मार्च 1966 को दोनों ने शादी कर ली हमने घर को कुछ और ही समझ रखा है क्या समझ रखा है हुस्न की देवी का मंदिर तेरा मेरा प्यार अमर फिर क्यों शादी के बाद इनकी एक और ब्लॉकबस्टर फिल्म आई नाम था मेरा साया हर बार की तरह सफलता की नई ऊंचाइयों के साथ इस बार इस फिल्म के संगीत ने भी नए कीर्त मान स्थापित किए थे वैसे इस फिल्म के गाने को आज की युवा पीढ़ी भी अक्सर गुनगुनाते दिख जाती है झुमका गार बरेली के बाजार में झुमका ग उन दिनों यह गाना जब पर्दे पर आता तो लोग सिक्के उछालने लगते इस गाने को को कोरियोग्राफ किया था सरोज खान जी ने और यहीं से सरोज जी के करियर की शुरुआत हुई थी इधर शादी के कुछ साल बीत गए थे एक दिन साधना जी की तबीयत बिगड़ी और जब वह डॉक्टर को दिखाने गई.

तो उन्हें पता लगा कि घर में खुशखबरी आने वाली है साधना प्रेग्नेंट थी पर शायद ही किसी को पता हो यह आने वाली खुशखबरी कब मातम में बदल जाएगी साधना का यह बच्चा मिसकैरेज हो गया आप एक काम कीजिए टुमारो यू ट्राई इलेक्ट्रिक थेरेपी यस लराट डॉक्टर साधना जहां इतने सालों से अपने बच्चे की आज देख रही थी वहीं वह बच्चे के मिसकैरेज होने से बुरी तरह टूट गई थी साधना कई दिनों तक घर से बाहर तक नहीं निकली आसू रुके तो देखिए फिर हम भी रोले वैसे कुछ मीडिया रिपोर्ट यही बताती हैं कि साधना अपने बच्चे को खोने की वजह अपनी बहन बबीता के दिए हुए श्राप को ही मानती रही साधना अपनी बहन बबीता को मन ही मन अपने बच्चे का कातिल मान चुकी थी इधर साल 1968 में जब डायरेक्टर एचएस रेवेल की फिल्म संघर्ष साधना ने साइन की तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई तबीयत ऐसी बिगड़ी कि डायरेक्टर ने कहा कि उन्हें थायराइड हो गया है.

साधना ने रवल साहब से बड़ी मासूमियत से कहा रवेल साहब आप किसी और एक्ट्रेस को इस फिल्म में साइन कर लीजिए अभी मैं इस फिल्म को करने में में असमर्थ हो एचएस रवल साहब ने अपने उसी पुराने अंदाज में कहा साधना तुम दिमाग पर ज्यादा जोर मत डालो अगर मैं मेरे महबूब फिल्म के लिए तुम्हारा इंतजार ठ महीने तक कर सकता हूं तो मैं संघर्ष फिल्म के लिए एक साल तक भी तुम्हारा इंतजार करूंगा जब तक तुम नहीं आओगी तब तक मैं फिल्म शुरू ही नहीं करूंगा साधना यह सब सुनकर भाव विभोर हो गई थी उनकी आंखों में आंसू थे डायरेक्टर एचएस रवैल के लिए साधना के मन में सम्मान और बढ़ गया था पर पता नहीं इस समय किस घड़ी किस करवट बदल जाए अभी इस वाक्य के महज पाच दिन ही हुए थे कि साधना ने अखबार में देखा कि डायरेक्टर एच एस रवल ने संघर्ष फिल्म के लिए बजंती माला को बतौर हीरोइन साइन कर लिया है साधना को अब लग रहा था कि सब कुछ एक रेत की तरह हाथ से फिसलता जा रहा है और इधर थायराइड बीमारी के चलते साधना का स्वास्थ लगातार गिरता चला जा रहा है था तभी साधना अपने थायराइड के इलाज कराने के लिए बस्टन क्लीनिक गई अपने करियर के टॉप पर साधना का अमेरिका जाना उनके लिए अच्छा नहीं रहा साधना के पास जो कई बेहतरीन फिल्में थी व उनके हाथ से जाती गई जिनमें से देवानंद साहब के साथ साजन की गलियां जवाय मुखर्जी के साथ साहिरा मनोज कुमार के साथ दामन और तो और किशोर दा के साथ लॉ स्पॉट इन सभी फिल्मों पर विराम लग गया था पर कुछ समय बाद साधना अपना इलाज करवा के वापस आई साधना बेहद समझदार थी.

उन्होंने वापस आकर एक बड़ी पार्टी का आयोजन किया बॉलीवुड के हर बड़े-बड़े शख्स को इस पार्टी में बुलाया गया तुमने पुकारा और हम चले आए शायद साधना ये मैसेज पहुंचाना चाहती थी कि अब व पूरी तरह से ठीक है सामना ने वापस आने के बाद दो फिल्में साइन की पहली फिल्म थी इंतकाम और दूसरी फिल्म थी एक फूल दो माली यह दोनों फिल्में सुपर डुपर हिट रही हां इन दोनों फिल्मों में साधना ने अपनी थायराइड की बीमारी को छुपाने के लिए गले में एक दुपट्टा बड़ी स्टाइलिश तरीके से पहना पर शायद साधना की यह लोकप्रियता ही थी कि उस समय लड़कियों ने साधना के मजबूरी में डाले गए दुपट्टे को फैशन समझ लिया ई झका हवा का जब मेरा आचल उड़ाता है इसके बाद साधना और राजेंद्र कुमार की हिट जोड़ी फिर सिनेमा पर्दे पर आई फिल्म का नाम था आप आए बहर आई एक बार फिर इस जोड़ी ने कमाल कर दिया आप आए इस फिल्म के सारे के सारे गाने सुपर डुपर हिट रहे तेरी याद सताती है नींद नहीं आती है रातो में.

वसे आपको बता दें कि उन दिनों फिल्मी खबरों के लिए पत्रिकाएं बड़ा साधन थी उस समय की एक चर्चित पत्रिका माधुरी थी उसने जनता में एक सर्वे कराया कौन से हीरो और हीरोइन माधुरी नौरतन पाने के हकदार हैं लोगों ने खूब पत्र भेजे जो हीरो का नाम निकल कर आया वह था पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना साहब और हीरोइन थी साधना जी इस पत्रिका के बाद शायद सभी का ध्यान इस जोड़ी पर गया तब ऑल इंडिया पिक्चर के एन अरोड़ा साहब ने इस जोड़ी को लेकर एक फिल्म बनाई फिल्म का नाम था दिल दौलत दुनिया यह फिल्म 1922 में रिलीज हुई और बहुत बड़ी हिट भी साबित हुई इस फिल्म ने उस जमाने में ढ़ करोड़ रुपए जैसी बड़ी रकम की कमाई की इसके बाद साल 1974 में फिल्मों में काम के साथ-साथ साधना निर्देशन में भी उतरी फिल्म का नाम था गीता मेरा नाम जहां साधना ने इस फिल्म में निर्देशन किया और साथ ही साथ अदाकारी भी कीी थी पर इतना कुछ होने के बावजूद यह फिल्म ब्लॉकबस्टर नहीं रही एक जवान बेसहारा लड़की को पल भर भी ना जीने दे यही तो है मेरा सहारा और शायद इसके बाद ही साधना की कई सुपर फ्लॉप फिल्मों का सिलसिला चालू हो गया पर शायद साधना के लिए इससे भी कुछ बुरा होना था साधना का इतना हाइपर बन गया इन्हें आंखों की एक बड़ी बीमारी हो गई जिसमें व्यक्ति की आंखें बड़ी होती चली जाती हैं और वह बाहर की ओर निकलने लगती हैं साधना जिसकी महज एक झलक पाने के लिए लोग बेताब रहते थे वो दिन प्र दिन बदसूरत होती जा रही थी उनकी आंखों की रोशनी लगातार कम होती चली जा रही थी रुक गई अभी तो जा ना पाऊंगी कंडीशन यह आ गई थी कि साधना ने फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली थी शायद इसका कारण यह भी था कि वह अपने प्रिय दर्शकों में हमेशा खूबसूरत साधना ही बनी रहना चाहती थी.

आपके पहलू में आकर रो दिए साधना ने अब लोगों से मिलना जुलना बिल्कुल बंद कर दिया था और तो और उन्हें दिखना भी बिल्कुल बंद हो गया था पर इधर दुखों का पहाड़ ऐसा था कि उसे तो मानो थमने का नाम ही नहीं लेना था डॉक्टर ने एक बार जब फिर साधना का थायराइड टेस्ट किया तो डॉक्टर ने कहा कि साधना अब कभी मां नहीं बन सकती यह खबर सुनकर मानो साधना के पैर के नीचे से जमीन निकल गई थी साधना को आज उनकी बहन का दिया हुआ श्राप बार-बार सच होता दिख रहा था मैं तेरा दुख समझती हूं मगर प्रता भी तो इंसान ही करता है पर नैयर साहब का प्यार तो बिल्कुल अलग ही था वह साधना को इस हद तक जाते थे जैसे कि कोई अपनी आखिरी सांस को चाहता हो हम तुम्हारे लिए तुम हमारे लिए नैयर साहब ने अपने कलेजे पर पत्थर रखा साधना के दुखों को हल्का करने के लिए उन्होंने दुनिया घूमने का प्लान बनाया.

नैयर साहब साधना को हर उस जगह ले गए जो साधना को पसंद थी उन्होंने साधना के लिए वह सब कुछ किया जो साधना को अच्छा लगता था पर नैयर साहब को अस्तमा की बीमारी थी समय के साथ-साथ उनकी तबीयत खराब रहने लगी नैयर साहब को लगने लगा था कि अब वह ज्यादा दिन नहीं बचेंगे तो एक दिन नैयर अपनी साधना के पास गए और साधना से बोले तुम मेरा कितना ख्याल रखती हो पर साधना जब मैं चला जाऊंगा तो तुम रह लोगी तुम वो भूल गए जो कहा करते थे कि शरीर मर जाते हैं मगर आत्मा और प्यार हमेशा जिंदा रहते हैं साधना ने नैयर साहब के मुंह पर हाथ रखते हुए कहा ऐसी बातें मत बोलिए आपसे पहले मैं जाऊंगी नहीं तो मैं आपके साथ ही चलूंगी एक दिन नैयर साहब को अस्तमा का भारी अटैक आया और अबकी बार वह अस्तमा से हार गए थे मोहबत का शायद साधना जी के लिए यह सहन कर पाना मुश्किल था इस सदमे के बाद साधना ने अपनी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी बंद कर दी अब आए का कोई जरिया नहीं बचा था साधना ने कुछ दिनों बाद पैसों की तंगी के चलते उन्होंने अपना बंगला भी बेच दिया बाल मा तुझको मेरा मन याद करता है साधना जी संगीता बंगले में किराए पर रहने लगी उनका साथ किसी ने भी नहीं दिया वह साधना जो हर वक्त हर असाय की मदद करने में कभी पीछे नहीं हटती थी आज उनकी मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था जिस साधना ने 1965 में भारत पाक के युद्ध में अपना एक-एक जेवर बेचकर भारतीय सैनिकों की खातिर धन कोश में जमा कर दिया था.

हां वह साधना आज एक एक रुपए को मोहताज थी साधना जी जिस किराए के घर पर रहती थी व घर मशहूर गायिका आशा भोसले का था संगीता नामक बंगले में ग्राउंड फ्लोर पर साधना रहती थी ऊपर के एक फ्लोर पर एक दूसरे व्यक्ति रहा करते थे ग्राउंड फ्लोर की पार्किंग को लेकर झगड़ा हुआ साधना ने इसकी शिकायत आशा भोसले से की आशा भोसले ने साधना की कोई मदद नहीं की आशा भोसले ने इस घर को साधना से खाली करने तक को कह दिया ये नहीं हो सकता कभी नहीं हो सकता घर में अपनी छोटी सी दुनिया आबाद कर ली है फिर आशा जी ने इस पचड़े में ना पड़ते हुए इस घर को एक बिल्डर को बेच दिया बिल्डर का नाम था यूसुफ लकड़े वाला उस बिल्डर ने साधना से इस घर को खाली करने का दबाव बनाया साधना जब नहीं मानी उसने अपने कई गुंडे बुलाए और साधना जी को डराकर प्रताड़ित करने लगा पर साधना जी ने हिम्मत से काम लिया उन्होंने थाने जाकर बिल्डर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई पर पुलिस को कोई उचित सबूत नहीं मिला अंतत उस बिल्डर को छोड़ दिया गया साधना को ना चाहकर भी कोर्ट और थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे थे नहीं मैंने कोई गुनाह नहीं किया मैं बिल्कुल बेकसूर हूं मैं वो औरत ही नहीं जिस पर ये इल्जाम लगाए गए भले ही साधना के बारे में उनके बुरे वक्त में किसी ने भी ना सोचा हो पर साधना हमेशा गरीब और मजबूर लोगों की मदद करने के लिए सामने आई जब साल 2014 में कैंसर मरीजों के लिए रैंप वक करने की बात आई तो साधना अब अपने खराब स्वास्थ्य के बावजूद एक्टर रणवीर कपूर के साथ स्टेज पर आई पर इस दुनिया ने उन्हें इसके बदले क्या दिया जिस साधना का कोई भी तरीका फैशन बन जाया करता था जिसकी अदाकारी की पूरी दुनिया दीवानी थी उस साधना को एक भी फिल्म फेयर अवार्ड नहीं मिल खैर जाने भी दीजिए इन बातों को साधना के चाहने वाले दर्शक ही इतने थे कि किसी भी अवार्ड की कोई जरूरत नहीं थी.

यह दर्शक ही उनके लिए अपने आप में बड़ा अवार्ड थे शायद आज कीय नई युवा पीढ़ी उन्हें समझ ही नहीं सकती साधना की खूबसूरती तो ऐसी थी कि पूरी फिल्मी दुनिया उन पर मर मिटती थी एक्टर विश्वजीत जी का कहना था कि साधना जी के क्लोजअप पर पूरे शहर में चर्चा हो सकती है देवानंद साहब ने जब उन्हें पहली बार देखा तो बगैर किसी जान पहचान के वह साधना जी से अपनी बात कहने को रोकी नहीं पाए उन्होंने साधना जी से कहा कि आप बेहद खूबसूरत है छोड़ कर के दिल अभी भरा नहीं वही जानेमाने फिल्म डायरेक्टर यश चोपड़ा जी का कहना था कि साधना तुम्हारी खूबसूरती तो ऐसी है कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री में अगर टॉप फाइव हीरोइनों की बात हो तो उनमें तुम्हारा नाम जरूर आएगा मुझे तेरी मोहब्बत का पर क्या आपको पता है कि साधना जी ने आखिर अपनी खूबसूरती पर क्या कहा वह हमेशा कहती थी कि मैं सुंदर नहीं हूं मैं तो सिर्फ एक आकर्षण हूं उनका कहना था कि सुंदरता की जब भी बात होगी तो मीना कुमारी और मधुबाला का ही नाम आएगा.

साधना कभी भी किसी गॉसिप का हिस्सा नहीं बनना चाहती थी ना ही उनके अफेयर के चर्चे कभी किसी हीरो से रहे बदले में प्यार के प्यार दिया है प्यार दिया है तेरी खुशिया महज 15 वर्ष की उम्र में फिल्मों में काम करने वाली साधना बेहद मेहनती थी और 25 वर्ष की उम्र में उन्हें जिस शख्स से प्यार हुआ उन्होंने शादी भी उसी शख्स से की और तो और उस प्यार को ताज जिंदगी सारी उम्र निभाती रही फिल्म इंडस्ट्री में नैयर साहब और साधना जी के प्रेम के किस्सों को अमर प्रेम की संज्ञा दी जाती है मेरा प्यार अमर फिर क्यों मुझको शायद साधना की जिंदगी में अब अच्छा समय खत्म हो गया था रोज मर्या की समस्याएं बढ़ती चली जा रही थी एक दिन साधना को तेज बुखार आया साधना अकेले हॉस्पिटल पहुंची किसी तरह साधना की रात कट गई साधना को लगा कि सब कुछ ठीक हो गया है शायद पैसों की तंगी के चलते अगले दिन साधना हॉस्पिटल से घर आ गई और फिर अगले दिन घर पर जब साधना की आंख खुली तो साधना ने देखा उनके मुंह पर लगा है.

बेहद मजबूत इरादों वाली साधना नेने जब मुंह पर खून देखा तो व घबरा गई उन्होंने आवाज लगाई और तो और चीखने की भी कोशिश की पर मुंह से आवाज नहीं निकली अब साधना करती तो क्या करती किसी तरह पड़ोसियों को खबर की उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया पर पता चला साधना को ट्यूमर हो गया है अब उनके पास इलाज के लिए भी पैसे नहीं थे उन्होंने फिल्मी दुनिया में सभी से मदद मांगी शायद इस चमचमाती दुनिया में असलियत में घोर अंधेरा ही था किसी शख्स ने भी आकर साधना की मदद नहीं की और आखिरकार अकेलेपन और बीमारियों से लड़ती साधना 25 दिसंबर साल 2015 को हम सभी को छोड़ अपने पति आर के नैयर के पास चली गई .

आखिरी दिनों में वो बिल्कुल अकेली थी बिल्कुल तन्हा थी और बहुत ज्यादा बीमार थी वैसे साधना जी भारतीय सिनेमा को न जाने कितनी सुपरहिट फिल्में देकर गई पर यह भारतीय सिनेमा उन्हें उनके अंतिम वक्त में अकेला ही छोड़ गया वो कहती थी मौत तो बेचारी बदनाम है जिंदगी ज्यादा तकलीफ देती है और वाकई जब तक जिंदा वैसे आप बताइएगा कि उनकी इतनी सुपरहिट फिल्मों में आपको उनकी जोड़ी किस हीरो के साथ सबसे अच्छी लगती है साधना जी का नाम आते ही आपके कानों में उनका कौन सा सुपरहिट गाना गुनगुनाने लगता है

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