लेकिन कुछ एक ऐसे सबस्क्राइब इंडियन फिल्म इतिहास अधूरा अपने दौड़ में रूमानियत और फैशन आइकॉन को लेकर तो कई नाम से मशहूर लेकिन लियुजी मुंबई उनके पास कितने रुपए ने डॉलर के कपड़े पहनने पर पाबंदी लगा दी थी बचपन में ऐसा क्या हो गया था कि युवा दाखिल पढ़ाई के लिए गर्ल्स स्कूल व्यथा एक्टर बनने से पहले देव आनंद साहब ने कौन सी नौकरी की उसमें उनको कितना वेतन मिलता था पंजाब के गुरदासपुर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में सब्सक्राइब धर्मदेव पिशोरीमल आनंद उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में स्नातक 1942 लाहौर से आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन उनके पिता ने कह दिया कि उनके पास उन्हें नियुक्त अगर वह आगे बढ़ना चाहते हैं तो यहीं से उनका बॉलीवुड का सफर शुरू हो 1946 अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई पहुंचे तब उनके पास मात्र 300 और नियुक्त कुछ नहीं था।
देव साहब ने मुंबई पहुंचकर रेलवे स्टेशन के समीप एक छोटे से होटल में कमरा लिया उनके कमरे के साथ तीन अन्य लोग रहते थे उनकी तरह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे काफी दिन गुजर गए उनके पास पैसा खत्म हो रहा था और तब उन्होंने सोचा कि अगर उन्हें मुंबई में नौकरी तो करनी पड़ेगी उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी रोमांसिंग विद लाइफ में काफी मशक्कत के बाद उन्हें मिलिट्री सेंसर ऑफिस में क्लर्क की नौकरी मिल गई उन्हें सैनिकों की चिट्ठी पढ़ने का काम ऑफिस चैनल को सबस्क्राइब मासिक वेतन मिलता था।
इसमें 45 रुपये वह अपने परिवार के खर्च के लिए ढेर लगे इसे करें आध वह अपने बड़े भाई चेतन आनंद के पास चले गए जो समय भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा से जुड़े हुए उन्होंने देवानंद को भी अपने साथ मिला लिया इसी बीच देवानंद नाटकों में छोटे-मोटे रोल में छोटे-मोटे रोल करते हुए फिल्म और अपनी पहचान नहीं बना सके इस फिल्म के निर्माण के दौरान प्रभात स्टूडियो में उनकी मुलाकात हुई जो समय फिल्मों में कोरियोग्राफर के रूप में अपनी पहचान बना रहे थे ।
यह मुलाकात मित्रता में बदल गई पता ही नहीं लगा दोनों एक दूसरे के करीबी दोस्त बन गए 1947 देवानंद पर लोकल ट्रेन में बैठे हुए देखती थी उनके पास आकर बैठ गए और पूछा क्या जय हो देव साहब ने जवाब दिया कुछ खास नहीं इसके बाद ही उन्हें दूसरे दिन बॉम्बे टॉकीज बुलाया गया अशोक कुमार ने देव आनंद को फिल्म में हीरो बना दिया और फिल्म जिद्दी नियुक्त फिल्म साबित हुई इस फिल्म की कामयाबी के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में लोकतंत्र की स्थापना की नियुक्ति लें उन्होंने 1950 में अपनी पहली फिल्म अवसर का निर्माण किया जिसके निर्देशन की जिम्मेदारी उन्होंने अपने बड़े भाई चेतन आनंद को इस फिल्म के लिए उन्होंने उस जमाने की जानी-मानी अभिनेत्री के रूप में नियुक्त यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप सामने ने अपनी अगली फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी अपने अच्छे अजीत दोस्त गुरुदत्त को सौंपी बाजी फिल्म की सफलता।
कुछ इस कदर छाई कि देवानंद साहब सबसे अच्छे अभिनेताओं में शुमार करने लगे इस बीच देवानंद साहब ने मुनीम जी दुश्मन काला बाजार सीआईडी पेइंग गेस्ट गैंबलर तेरे घर के सामने और पानी जैसी सफल फिल्मों की जिंदगी में इन सभी फिल्मों के हिट होने के साथ एक फिल्म और फिल्म के निर्माण के दौरान रावण फिल्म अभिनेत्री सुरैया की ओर से नियुक्त और उन्होंने को डूबने से बचा लिया कि युद्ध प्यार देवानंद ने सुरैया से मोहब्बत करने का इजहार सरेआम और उन्हें प्यार मिला तब उन्होंने पूरी के सामने कहा कि उन्हें सुरैया से आज भी मोहब्बत और यह बात उन्हें पूरे समाज के सामने किसी भी प्रकार की क्योंकि उधर सुरैया की दादी को यह रिश्ता मंजूर नहीं था और और उनका रिश्ता टूट गया 2005 में का निर्णय तो उन लोगों में से थे जो उनके साथ रहते थे देव आनंद साहब ने अपने जमाने की मशहूर हिरोइन के साथ शादी कर ली।
लेकिन उनके साथ अधिक समय तक सफल नहीं रहे लेकिन बाद में अपने जीवन को गले लगा लिया और 1977 में फिल्म प्रेम पुजारी के साथ देवानंद निर्देशन के क्षेत्र में कदम रख दिया कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से नकार दी गई बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं 1971 में फिल्म हरे रामा हरे में का निर्देशन किया और इसकी कामयाबी के बाद उन्होंने अपनी कई फिल्मों का निर्देशन किया इन फिल्मों में हीरा पन्ना मध्य प्रदेश लूटमार स्वामी सच्चे और अव्वल नंबर जैसी फिल्में शामिल को सबस्क्राइब और दूसरी मंजिल पहले यह की गई थी और अमिताभ बच्चन की जंजीर पहले देव आनंद साहब को लेकिन साथ फिल्म करने से इंकार कर दिया।
और हम इंडस्ट्री का अमिताभ बच्चन अपने जमाने के माने जाने वाले और के कारण जनहित याचिका के तहत कोर्ट ने देव आनंद ने अपील की थी कि वह और कुछ नहीं झाला जैकेट पहने आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी कि रोमांटिक छवि वाले देवानंद साहब कभी बचपन में इतने मिले थे कि लड़कियों को सामने देखकर घबरा उनकी कमी बहुत परेशान हो गये उन्हें उन्होंने लड़कियों के प्रति की घबराहट को दूर करने के लिए एक तरीका थोड़ा के पिता ने उनका सब्सक्राइब सब्सक्राइब नियुक्त और उनको दूर हो गया फिर इसका असर यह हुआ कि इतने रोमांटिक हो गए थे उनके पिता की इस आदत से परेशान रहने लगे थे देव आनंद और सुरैया और जीनत अमान की किसी से मोहब्बत को सबस्क्राइब से बातचीत की आज साहब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इमरजेंसी लगाने से खफा थे और उसी समय उन्हें राजनीति समारोह में कांग्रेस ने आमंत्रित किया था लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया इसके चलते देवानंद की फिल्मों और गानों पर बैन लगा दिया दूरदर्शन और विभाग में नियुक्त फिर देवानंद साहब ने उस समय के सूचना प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल से मुलाकात की और कि वो लोकतंत्र और उन्हें अपने मनमुताबिक चैनल को सबस्क्राइब कि दिल्ली से मुंबई पहुंचे उन पर लगे हुए थे इसी के चलते सुनने के विरोध के चलते एक राजनीतिक पार्टी के गठन का नाम नेशनल पार्टी पार्टी बनने के पीछे उनकी सोच थी कि लोग उन्हें इसलिए उनकी मदद से देश में कई नई व्यवस्थाएं बंधेंगी।
लेकिन देव को अहसास हो गया कि उनके पास चुनाव लड़ने के लिए बहुत कम समय और उम्मीदवार की कमी लगातार खलती थी इसलिए उन्होंने राजनीति छोड़ दी और पार्टी को खत्म आप मुख्य अभिनेता के रूप में आखिरी फिल्म थी इस दौरान उनकी उम्र 28 मार्च 4 दिसंबर-2011 को लंदन में हिंदी सिनेमा ने अपना सब स्किन पर जब भी बॉलीवुड की बात होगी
