भारतीय हिंदी सिनेमा के गुजरे दौर की एक ऐसी सुरों की मल्लिका और भारतीय क्लासिकल संगीत की उस महारानी की जिसने अपनी मधुर आवाज के जादू से भारत देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को अपना दीवाना बनाया कितने दीवाने मेरे इतने दीवानों ने भारत देश का नाम दुनिया भर में रोशन करने वाली इस महान गायिका के सुरताल का वो जादू था कि जिसने भी इनको एक बार सुना वह इनकी आवाज का कायल हो गया चुरा लिया है तुमने जो दिल को लेकिन क्या आप जानते हैं कि संगीत और गायकी के क्षेत्र में दुनिया भर के लिए एकआदर्श और मि साल बनी इस गायिका को क्यों बी ग्रेड निचले दर्जे की गायिका कहा जाता था।
कितने भी त करले तुम हस हस के सहेंगे हम क्यों इस महान गायिका को अपने शुरुआती दिनों में वो गाने गाने को मिले जिनको दूसरी मशहूर महान गायिका एं ठुकरा दिया करती थी आवाज ठीक रखने के लिए बहुत स कुर्बानियां देनी पड़ती है इस महान गायिका की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि यह कभी भी अपनी सगी बड़ी बहन को संगीत के क्षेत्र में पछाड़कर नहीं बन पाए।
हिंदुस्तान की नंबर वन गायिका सपना मेरा टूट ग क्यों यह गायिका अपनी बड़ी बहन के एक नौकर के साथ मोहब्बत के मेंडूबकर पूरे मंगेशकर परिवार से बगावत करके शादी करने के लिए घर छोड़कर भाग गई और जिस पति के लिए इन्होंने अपने परिवार की इज्जत को तार-तार किया उसी पति ने इनको क्यों दो मासूम बच्चों के साथ आधी रात को गर्भवती की अवस्था में धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया।
खाली हाथ श्याम आई खाली हाथ इस महान गायिका की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था कि दो शादी तीन बच्चों की मां और तलाक शुदा होने के बावजूद बढ़ती उम्र में यह गायिका सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए रहने लगी थी लिविन जैसे नाजायज रिश्ते में क्यों इस महान गायिका के ऊपरलगे थे जिंदगी के बुरे दिनों में दूसरे मशहूर शादीशुदा संगीतकार के साथ नाजायज संबंध रखने के आरोप मेरा कुछ सामा तु जिंदगी के सुख दुख को बेहद से देखने वाली इस गायिका ने क्यों पैसों की खातिर हिंदी सिनेमा की बेहद खूबसूरत और लोकप्रिय अभिनेत्री को उनके अंतिम दिनों में वो दुख दिए कि वह अभिनेत्री दुख तकलीफ के साथ और से लड़ते लड़ते इस दुनिया से ही अलविदा हो गई और जलील ना कीजिए मैं आपके हाथ छोड़ती हूं मुझे इस घर में तमाशा ना बनाई तो वहीं इस महान गायिका ने मशहूर सिंगर अनुराधा पौडवाल के पति को सरेआम बेइज्जत करके उनको स्टूडियो से बाहरनिकलवा दिया।
पूरी दुनिया में इतना नाम अपार धन दौलत की मालकिन इस गायिका ने क्यों अपने बेटे की मुस्लिम बहू के ऊपर किए वो जुल्म जिनको सुनकर निकल गए पैरों तले जमीन अब हम तो इतना प्यार करते वो पता नहीं क्यों यह सोचती ये हमारी दुश्मन है क्यों इस गायिका ने अपनी सास को उनके बुढ़ापे में फेंक दिया था एक पागलखाने और वृथा आश्रम में और क्या आप यह जानते हैं कि इस महान लोकप्रिय गायिका की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ कि इनके पति के साथ-साथ इनके जवान बेटे और बेटी की भी मौत हो गई क्यों इस गायिका को अपनी जिंदगी में हमेशा दुखतकलीफ में अपना जीवन गुजारना पड़ा क्यों भगवान ने इस गायिका के साथ वो अन्याय किया जिसकी कभी भी किसी को भी उम्मीद नहीं थी जिंदगी के सफर में कामयाबी पाने के लिए क्यों इस गायिका ने अपनाई साम दाम दंड भेद की नीति बताएंगे और भी बहुत कुछ दिल की उनको पूरी दुनिया में उनकी गायकी की वजह से वो पहचान मिली जिसको आज हम सभी भारतीय संगीतकी दुनिया में सुरों की मल्लिका आशा ताई यानी आशा भोसले के नाम से जानते हैं पहचानते हैं हे मेरा दिल यार का दीवाना कौन थी आशा भोसले किस परिवार से इनका ताल्लुक था क्या थी।
इनकी जिंदगी के विवाद अब किस हाल में हैं आशा भोसले यह सब कुछ हम आपको जब जब ल पे तेरी ड़ जब जप सुल में तेरी सुरों की मल्लिका आशा दीनानाथ मंगेशकर का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली मेंएक मराठी परिवार में हुआ था इनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक अभिनेता गायक और एक थिएटर कंपनी के मालिक थे फिल्मी परिवार में पैदा होने की वजह से संगीत आशा को विरासत में मिला था आशा के साथ इस परिवार में उनकी बहनें लता मंगेशकर उषा मंगेशकर और मीना मंगेशकर थी और एक भाई हृदयनाथ मंगेशकर भी थे यह सभी भाई बहन बचपन से ही संगीत सीखने और उसके रियाज में लगे रहते थे आशा जब महज 9 साल की थी तो आर्थिक तंगी के चलते इनके पिता का देहांत हो गया था।
अब पिता के ना रहने से परिवार की जिम्मेदारी बड़ी बहन लता मंगेशकर और आशा भोसले के ऊपरआ गई इनके पिता दीनानाथ मंगेशकर के एक मित्र मास्टर विनायक जो मशहूर अभिनेत्री नंदा जी के पिता थे उन्होंने इस मंगेशकर परिवार का खूब साथ दिया और सहायता की मास्टर विनायक की हिंदी सिनेमा में सभी से अच्छी जान पहचान थी इसीलिए उन्होंने आशा और लता दोनों के लिए काम की तलाश की और इसी सब के चलते आशा को महज 10 वर्ष की उम्र में ही साल 1943 में एक मराठी फिल्म माजा बाल में एक गीत गाने का मौका मिला हालांकि अभी आशा को इस गाने से कोई खास फायदा नहीं हुआ था लेकिन सिनेमा में उनकी शुरुआत हो गई थी समय गुजरा और अब आया साल1947 जब आशा को पहली बार एक हिंदी फिल्म चुनरिया में गाना गाने का मौका मिला इसके बाद आशा ने साल 1949 में हिंदी फिल्म रात की रानी में आशा ने पहली बार बतौर एक सोलो गायिका के रूप में गाना गाया मौज में अपने हालांकि इनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर उस समय इनसे गाना गाने में आगे निकल गई थी और अब आशा और लता दोनों बहने पूरे परिवार को एक साथ जोड़कर परिवार की जरूरतों को कड़ी मेहनत और लगन के साथ पूरा कर रही थी कतरा कतरा मिलती है कतरा कतरा जीने दो जिंदगी है समय तेजी के साथ आगे भाग रहा था अब आशा 16 साल की हो चली थी और अब मंगेशकरपरिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी हो गई थी पूरा परिवार अब फल फूल रहा था लेकिन शायद खुशियां इस परिवार के लिए नहीं बनी थी दरअसल आशा को अपनी नाबालिक उम्र में ही घर के एक नौकर यानी कि अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से चोरे छिपे मोहब्बत हो गई ये क्या कर डाला तूने दिव सेरा हो गया हंसी हसी में जालिम गणपत राव आशा से लगभग 17 साल बड़े थे आशा और गणपत की मोहब्बत ज्यादा समय तक छिप नहीं पाई।
लता मंगेशकर को जब इस बारे में पता चला तो आशा की गणपत के प्रति बढ़ती नजदीकियों ने उन्हें झकझोर कर रख दिया लताजी ने आशा को बहुत समझाया लेकिन प्यार में पूरी तरह डूबी आशा को परिवार की एक बात समझ नहीं आई और आशा ने अपनी जिद का पहला वो गलत कदम उठा लिया जिसकी मंगेशकर परिवार ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी मोहब्बत के प्रति बढ़ते विरोध के बीच नाबालिक आशा ने घर से भागने का फैसला किया और हुआ भी वैसा ही आशा और गणपत ने भागकर शादी कर ली सजना है मुझे सजना के लिए सजना है मुझ आशा के इस कदम से लता बेहद दुखी हो गई और पूरे परिवार ने आशा से हमेशा के लिए अपने सारे संबंध तोड़ लिए आज भी ना आए आंसू आज भी भाग कर की गई शादी के बाद आशाको लगा कि अब उनकी जिंदगी में सब कुछ ठीक है और जिंदगी में खुशियां होंगी लेकिन शायद आशा की जिंदगी में वो होने वाला था जिसकी वो सपने में भी कल्पना नहीं कर सकती।
थी कुछ समय बाद ही इनके पति ग गणपत राव का असली घिनौना चेहरा सबके सामने आ गया गणपत राव आशा की काबिलियत को भांप गए थे लिहाजा गणपत राव आशा भोसले के काम से जो कमाई होती या होने वाली थी उसके पीछे थे गणपत राव चाहते थे कि आशा ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में गाने गाए और होने वाली कमाई का एक-एक पैसा उनके हाथ में रख दे गणपत राव आशा का करने लगे वो आशा की मर्जीके खिलाफ उनके कामकाज की देखरेख प्रे करने लगे वह पैसे की भूख में आशा से दिन रात गाने गवाने के लिए उनको प्रताड़ित करते जिंदगी रोज नए रंग नसीब की मारी आशा पति की जबरदस्ती के चलते एक दिन में अब पांच से छह गाने एक-एक दिन में गाने लगी दिन भर आशा कभी इस स्टूडियो तो कभी उस स्टूडियो भागती रहती इन सब से थक हार कर आशा जब घर आती घर के सभी लोगों के सारे काम और खाना बनाती फिर उसके बाद जब कभी आशा घर में लेट हो जाती तो गणपतराव उन पर शक करते थे गणपतराव की बेरहमी बढ़ती गई गणपतराव आशा भोसले को कभी भी कोई भी श्रृंगार नहीं करने देते थे आशाअपने पति के सारे जुल्म झेल रही थी बात और भी आगे बढ़ी तो गणपत राव अब आशा के साथ गाली गलौच और मारपीट भी करने लगे आशा ये सारे दुख तकलीफ को अकेले ही सेह रही थी।
वो अपनी इस तकलीफ को किसी को भी बता नहीं पा रही थी क्योंकि आशा ने घर से भाग कर शादी की थी भगवान मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है कहते हैं जिसका कोई नहीं होता उसका तू होता है ऊपर से खुद गणपत राव भी आशा को कभी भी उनके किसी भी सगे संबंधी से बात नहीं करने देते थे आशा सब कुछ चुपचाप सहन कर रही थी भी संग दिल हो मगर आशा ने 40 के दशक से लेकर 50 के दशक तक लगभग 800 गाने गा दिएथे।
लेकिन आशा को इन सभी गानों से कोई भी फायदा नहीं हुआ था क्योंकि आशा से पहले हिंदी सिनेमा में उस दौर में शमशाद बेगम गीता दत्त और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर सभी हीरोइनों की आवाज बनी हुई थी और सभी म्यूजिक डायरेक्टर्स की पहली पसंद थी की नजरों ने समझा प्यार के तो ऐसे में आशा को भला कैसे मौका मिलता लिहाजा आशा भोसले को वो गाने मिलने लगे जो बाकी की टॉप की ये सभी गायिका एं ठुकरा देती थी या फिर वो फिल्मों में गाने गाने को मिलते जिनकी गिनती बी ग्रेड या सी ग्रेड में होती थी लेकिन आशा ने कभी भी किसी भी गाने को मनानहीं किया मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के मुड़ मुड़ के ना देख मु इसीलिए तो आशा ने 40 से 50 के दशक में 800 गाने गा डाले थे लेकिन कभी किसी भी गाने के लिए उन्हें लोकप्रियता नहीं मिली आशा हर तरफ से तकलीफों से जूझ रही थी तो ऐसे में बुरे वक्त में आशा की जिंदगी में दस्तक हुई संगीतकार ओपी नैयर साहब की मेहर ओपी नैयर जी जी पहली बार आशा को अपनी फिल्म सीआईडी में गाने गवाने जा रहे थे प्यार बादशाह यार दिल डूबा और इस फिल्म के गाने सुपर डुपर हिट हुए और आशा की आवाज को लोगों ने बहुत पसंद किया इसके बाद एक बार फिर से ओपी नैयर जीने साल 1997 में आशा से फिल्म नया दौर के लिए गाने गवाए मांग के साथ तुम्हारा मैंने मांग लिया संसार कहा जाता है कि आशा की यह पहली फिल्म थी जिसमें आशा ने फिल्म की हीरोइन के ऊपर फिल्माए सभी गाने गाए थे और यह भी कहा जाता है कि इस फिल्म के बाद से ही आशा भूसली की भी किस्मत बदल गई थी।
फिल्म भी सुपर डुपर हिट साबित हुई तो इसके संगीत ने भी खूब धूम मचाई थी उड़े जप जप ल पे तेरी उड़े जप जप ल पे तेरी इस फिल्म और संगीत की कामयाबी के बाद आशा और ओपी नैयर जी की जोड़ी एक सफल जोड़ी के तौर पर जाने जाने लगी इस जोड़ी ने हिंदीसिनेमा को एक से बढ़कर एक गाने दिए जिसको आज की युवा पीढ़ी भी सुनती है हाल कैसा है जनाब का क्या ख्याल है आपका आशा जी की जिंदगी अब कामयाबी की दौड़ दौड़ रही थी लेकिन वहीं इनकी निजी जिंदगी दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही थी साल 1959 में आशा के पति ने आशा के साथ वो किया जिसकी शायद खुद आशा ने भी उम्मीद नहीं की थी गणपत राव ने आशा से झगड़ा किया उनको मारा और बेहद भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया गणपतराव यहीं नहीं रुका उसने तीसरी बार मां बनने वाली कुछ महीने की गर्भवती आशा भोसले को उनके दो बच्चों के साथ धक्के मारकर रात कोही घर से बाहर निकाल दिया आशा के ऊपर दुख और दर्द का पहाड़ टूट पड़ा आशा को यह समझ ही नहीं आया कि वो ऐसी हालत में आखिर जाएं तो जाएं कहां क्योंकि गणपतराव से शादी करने के लिए आशा पहले ही अपने सारे रिश्ते खत्म कर चुकी थी।
लेकिन फिर भी आशा ने कुछ भी नहीं सोचा और वापस अपने घर जाने का फैसला किया मां हम लोग क्या रहेंगे कैसे खाना कैसे खाएंगे आशा फिर से मंगेशकर परिवार के बीच आ गई आशा की हालत देखकर सबको बहुत दुख हुआ हालांकि परिवार उनसे नाराज था लेकिन उनकी ऐसी बेकद्री देखकर सबने आशा को खुशी-खुशी अपना लिया साल 1960में आशा का गणपतराव से तलाक हो गया आशा अपने घर वापस आ गई सब कुछ संभल रहा था लेकिन इस परिवार में एक बार फिर से बवाल खड़ा हो गया दरअसल ठोकर खाई आशा भोंसले तलाक के बाद एक बार फिर से ओपी नैयर जी के प्यार में पड़ गई थी और इस बात का पता लता मंगेशकर जी को चल गया था हम लाख छुपाए प्यार मगर दुनिया को पता चल जाए ओपी नैयर पहले से ही शादीशुदा थे और चार बच्चों के पिता थे लेकिन ओपी नैयर जी वो इंसान थे जिन्होंने आशा को उनकी असली पहचान हिंदी सिनेमा में दिलाई थी आगे भी जाने ना तू आशा और ओपी नैयर के बी नजदीकियां इतनीगहरी थी कि इस बात का पता इससे ही चलता है कि आशा उस समय ओपी नैयर जी के साथ लिविन में रहने लगी थी लता मंगेशकर आशा के इस फैसले से बेहद नाराज हुई और लता की नाराजगी दूरियों में बदल गई आशा जो पहले ठोकर खा चुकी थी प्यार में वह दोबारा खाई में गिरने जा रही थी लेकिन यह बात आशा को समझ नहीं आ रही थीरा बड़ा नादान है ब आशा और ओपी नैयर जी का यह नाजायज रिश्ता और संबंध लगभग 14 सालों तक चला लेकिन इन दोनों ने कभी शादी नहीं की वजह थी ओपी नैयर की पहली पत्नी जिन्होंने ओपी नैयर को कभी तलाक नहीं दिया समय गुजरा तो ओपी नैयरसाहब के बच्चे बड़े हुए और अब ओपी नैयर साहब को समाज की परवाह होने लगी।
जिसके चलते अब आशा और ओपी नैयर के रिश्ते में खटास आनी शुरू हो गई आशा एक बार फिर से अपने फैसले के लिए पछता रही थी जिस समय आशा की जिंदगी में यह सब कुछ हो रहा था ठीक उसी वक्त हिंदी सिनेमा में रॉयल्टी विवाद तेजी के साथ अपने पैर पसा रहा था इस विवाद में बॉलीवुड के सभी संगीतकार दो गुटों में बट गए एक गुट लता मंगेशकर का था तो दूसरा गुड मोहम्मद रफी का था और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आशा भोसले अपनी बहन के नहीं बल्कि उनके खिलाफ मोहम्मद रफीके गुट में शा हो गई थी जिसकी वजह से आशा लता के बीच दूरियां और भी ज्यादा गहरी हो गई वहीं एसडी बर्मन जी उस समय लता मंगेशकर से नाराज चल रहे थे वह भी रफी गुट में चले गए तो ऐसे में जो गाने एसडी बर्मन जी लता से गवाने वाले थे वह सारे गाने आशा भोसले से गवाए गए अच्छा जी मैं हरी चलो मान जाऊ ना देखी सबकी यारी इस गुटबाजी का सबसे ज्यादा फायदा आशा भोसले को हुआ क्योंकि आशा के पास गानों की एक लंबी लाइन थी और आशा एक से बढ़कर एक हिट्स और सुपर हिट्स गीत गा रही थी मौसम मस्ताना रस्ता अनजाना जाने क कि और आशा देखते ही देखतेएक मजबूत और लोकप्रिय गायिका बन गई ये लड़का हाय अल्लाह कैसा है दीवाना कितना मुश्किल है साल 1965 की बात है आशा जी को एस डी बर्मन जी ने एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया था इस रिकॉर्डिंग के लिए एस डी बर्मन जी ने अपने बेटे आर डी बर्मन को आशा के पास भेजा हालांकि आशा और आर डी बर्मन दोनों पहले भी मिल चुके थे आशा आर डी बर्मन को उतना महत्व नहीं देती थी लेकिन साल 1966 में जब आर डी बर्मन ने तीसरी मंजिल के लिए आशा भूसली से गाने गवाए और वह सभी गाने बहुत बड़े हिट साबित हुए आजा आजा देखो प्या रा आरडी बर्मन ने संगीत को नए रंग रूप मेंसंजोया था जिसको लोगों ने बहुत पसंद भी किया था आरडी बर्मन की इस कामयाबी से आशा अब आरडी बर्मन को महत्व देने लगी थी आरडी वर्मन ने अब हिंदी सिनेमा के संगीत को नए रंग रूप में ढाल दिया था लेकर हम देवाना फिरते हैं इधर अब आशा और आरडी बर्मन की जोड़ी सिनेमा में खूब धूम मचा रही थी एक साथ काम कर रहे आरडी वर्मन और आशा के बीच मोहब्बत की चिंगारी भी लग चुकी थी मौसम प्यार का रंग बदलता र लेकिन अभी आशा ओपी नैयर जी से अलग नहीं हुई थी लेकिन आरडी बर्मन के साथ बढ़ती नजदीकियों ने ओपी नैयर और आशा के रिश्ते में दरा डालने का काम किया जहांइस वक्त ओपी नैयर थोड़े चिड़चिड़ी आशा ओपी नैयर को छोड़ना नहीं चाहती थी।
लेकिन एक दिन जब सब घर पर थे चिड़चिड़ी नैयर ने आशा की बेटी को न जाने किस बात पर जोरदार तमाचा मार दिया आशा को कभी भी यह उम्मीद नहीं थी कि ओपी नैयर कुछ ऐसा कर देंगे थप्पड़ आशा की बेटी के गाल पर पड़ा था लेकिन इस थप्पड़ ने ओपी नैयर और आशा के इस रिश्ते का अंत कर दिया था तुमसे बिछड़े है तो अब रिश्ता खत्म होने के बाद आशा और आरडी बर्मन संगीत के क्षेत्र में आसमान की ऊंचाइयों को छू रहे थे और इसी सबके बीच इन दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गई आजी बर्मनआशा को दिल ही दिल में बहुत प्यार करने लगे थे दिल लगी ने दी हआ थोड़ा सा दुआ उठा और लेकिन वो अपने प्यार का इजहार ही नहीं कर पा रहे थे तो ऐसे में आंडी बर्मन आशा को गुमनाम नाम के तरीके से आशा के घर रोज गुलाब का गुलदस्ता भिजवाने लगे और जब इस गुलदस्ते का राज खुला तो आरडी बर्मन ने आशा को शादी का प्रस्ताव दे दिया।
एक परदेसी मेरा दिल ले गया जाते जाते मीठा मीठा लेकिन आशा की जिंदगी में पहले ही इतना सब कुछ घट चुका था जिसकी वजह से आशा बेहद डरी हुई थी लेकिन वहीं आरडी बर्मन ने भी जिद पकड़ ली थी कि शादी करूंगा तो आशासे ही नहीं तो जिंदगी भर शादी नहीं करूंगा लेकिन 7 साल गुजर जाने के बाद आशा को आडी बर्मन पर भरोसा हुआ जिसके बाद साल 1980 में आशा और आरडी बर्मन ने शादी कर ली हालांकि इस शादी से आरडी बर्मन की मां बिल्कुल खुश नहीं थी क्योंकि आशा आडी बर्मन से 6 साल बड़ी थी और तीन बच्चों की मां थी और तलाक शुदा थी आशा अभी तक इस शादी से खुश थी लेकिन ना जाने भगवान को क्या मंजूर था मानो जैसे शादी का सुख आशा के नसीब में ही नहीं था दरअसल गुजरते दौर में आरडी बर्मन के संगीत का असर अब कम होने लगा था अब संगीत के क्षेत्र में नए-नए नाम आने लगे और बदलता हुआ संगीत भीआने लगा और आर डी बर्मन अपने आप को उस संगीत के हिसाब से नहीं ढाल पाए जिसकी वजह से आरडी बर्मन को नए गाने मिलने बंद हो गए और इसी वजह से आरडी बर्मन को पैसों की किल्लत होने लगी और इसी परेशानी में घिरते हुए आरडी बर्मन ने सहारा लिया का हालांकि आशा भी हिट्स गाने दे रही थी और उधर आरडी बर्मन शराब के नशे में अपनी जिंदगी को खत्म कर रहे थे और एक दिन व भी आया जब साल 1993 में आर डी बर्मन को दिल का दौरा पड़ा और आर डी बर्मन ने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया जितना बड़ा संगीतकार था पंचम आरडी बर्मन उससे कहीं बड़ा बहुत ही अच्छा नेकइंसान था पंचम चले गए हैं लेकिन उनका संगीत और उनकी की यादें और उनका काम हमेशा जिंदा रहेगा तो मैं सोचता हूं कि ये हमारे इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ा एक गैप हो गया वी हैव नॉट ओनली लॉस्ट अ ग्रेट म्यूजिक टर आरडी बर्मन की ने आशा को अंदर तक चोट पहुंचाई आशा ने रोते हुए कहा कि दुनिया ने एक संगीतकार खोया है और मैंने अपना पति कि मेरा पति एक बहुत बड़ा म्यूजिक डायरेक्टर बहुत बड़ा कंपोजर था और रहेगा आशा की जिंदगी एक बार फिर से अंधकार में चली गई थी आशा और आरडी बर्मन के कभी भी कोई बच्चा नहीं हुआ था आरडी बर्मन की मौत के बाद पताचला कि आरडी ने अपनी बची कुची संपत्ति का वारिस किसी को भी नहीं बनाया था।
जिसकी वजह से समाज हिंदी सिनेमा और लोगों के बीच इन दोनों के बीच के रिश्ते पर सवाल उठाने लगे थे लोग तो इन दोनों की शादी को झूठा मानने लगे थे आजी बर्मन की मौत के बाद उनकी मां जो कि मानसिक रूप से काफी समस्याओं का सामना कर रही थी उनको आशा भोसले ने एक पागलखाने में छोड़ दिया था लेकिन उनके इस काम की हर तरफ काफी आलोचना हुई तो आशा ने आरडी बर्मन की मां यानी कि अपनी सास को एक वृद्धा आश्रम में रखवा दिया हालांकि आरडी बर्मन की मौत के बाद 13 साल तक आशा नेआरडी बर्मन की मां का ख्याल रखा था लेकिन उसके बाद आशा ने उनकी मां को अपने से दूर कर वृद्धा आश्रम में डाल दिया जहां उनका इलाज और देखभाल हो रही थी आटी बर्मन के देहांत के बाद आशा ने भी हिंदी सिनेमा से दूरी बना थी हजारों गाने गाने वाली आशा भोसले के जीवन में अब बस अकेलापन और कड़वाहट ही बची थी कतरा कतरा मिलती है कतरा कतरा जीने दो जिंदगी है फिर आया।
साल 1994 जब आशा भोसले ने कई लोगों के कहने पर रंगीला फिल्म के गानों से अपनी वापसी की हो जा रंगीला रंग रंग रंगी इस फिल्म के सभी गाने सुपरहिट हुए थे और इस कामयाबी के साथ आशा भोसले की हिंदीसिनेमा में जोरदार वापसी हुई थी तन्हा तन्हा यहां पे जीना ये कोई बात है कोई साथ नहीं फिर आया साल 2000 जब आशा भोसले को फिल्म फेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया तो वहीं आशा को दादा साहेब फाल के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था आशा भोसले जी को अपने इस फिल्मी सफर में वो सारी उपलब्धि मिल गई थी जहां हर सिंगर पहुंचना चाहता है आशा की उम्र बढ़ रही थी लोगों को लगा कि अब आशा फिल्मों के संगीत से सन्यास ले लेंगी लेकिन आशा तो आशा थी वह संगीत को बेहद प्यार करती थी लिहाजा वह लगातार हिट्स पे हिट्स गीत गा रही थी सपने में मिलता है ओमुंडा मेरा सपने में मिलता है आशा जैसे ही अपनी जिंदगी को थोड़ा खुश होकर जीने की कोशिश करती कि भगवान की की मार उन पर फिर से पड़ जाती साल 2012 आशा की जिंदगी में गहरा दुख लेकर आया क्योंकि इसी साल इनकी बेटी वर्षा ने अपनी जिंदगी को खत्म कर लिया था और इस वक्त बड़ी खबर आ रही है आशा भोसले की बेटी ने खुदकुशी की है ये जानकारी मिल रही है।
इस वक्त बताते हैं कि वर्षा मानसिक रूप से परेशान चल रही थी वर्षा ने अपनी मां का तलाक देखा आशा का अपनी बेटी को समय ना देना उनकी शादी हो जाना और फिर उनका तलाक हो जाना जैसी बातोंसे परेशान थी वर्षा आशा की जिंदगी में अभी दुख खत्म होने का नाम नहीं ले रहे थे उनके अपने आशा को एक-एक करके छोड़ कर जा रहे थे वर्षा की मौत के 3 साल बाद सबसे बड़े बेटे हेमंत का गंभीर बीमारी कैंसर से लड़ते-लड़ते निधन हो गया और इस तरह से आशा को भगवान की ना जाने कौन सी मार पड़ रही थी या उनको कैसे और किन कर्मों की सजा मिल रही थी जो रुकने का नाम नहीं ले रही थी बड़े बेटे की के बाद भी एक बार फिर से आशा विवादों में घिर गई थी दरअसल आशा के बेटे हेमंत की पहली शादी सफल नहीं हुई थी इसलिए हेमंत ने दूसरी शादी की थी एकमुस्लिम लड़की साजिदा से कहा जाता है कि आशा और साजिदा के बीच कभी बात नहीं बनी प्यार जैसी चीज मिली ही नहीं हमेशा अ जिल्ट जो बोलते हैं ना जैसे तासु ही तासु मिला सूत्रों के अनुसार कहा जाता है कि आशा अपनी मुस्लिम बहू को काफी परेशान करती थी और जब बेटे की हो गई तो आशा ने अपनी बहू बहू को घर से निकाल दिया हस्बैंड के गुजरने के बाद खुलेआम बोला 10 दिन में घर में आ गई गुंडे लेके दो गाड़ियां भर के और कहा यहां से निकलो मैंने पुलिस कंप्लेन भी करवाया और फिर आशा को इनके इस काम के लिए सोशल मीडिया पर काफी आलोचनाओं कासामना करना पड़ा आशा भोसले को लेकर दो विवाद और मशहूर हैं कि आशा भोसले का एक घर मुंबई में है जिसमें उम्र दराज गुजरे वक्त की टॉप एक्ट्रेस साधना जी रहती थी।
जा गले के फिरले हसीना साधना जी से घर खाली कराने के लिए आशा भोसले ने साधना जी को काफी ज्यादा दुख दिए आशा ने उस वक्त घर को खाली कराने के लिए साधना जी को उनके अंतिम दिनों में काफी कोर्ट के चक्कर कटवाए और जलील ना कीजिए मैं आपके हाथ छोड़ती हूं मुझे इस घर में तमाशा ना बनाइए और इसी खींचतान के बीच साधना जी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया साधना जी की मौत की जिम्मेदार आशा भोसलेको ही माना जाने लगा तबाही तो हमारे दिल प आई तो वही इनका दूसरा विवाद हुआ था मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के साथ हे शंभू बाबा मेरे भोलेना अनुराधा पौडवाल एक उभरती गायिका थी लोग उनकी आवाज को पसंद कर रहे थे जिसकी वजह से उस वक्त अनुराधा काफी गीत गा रही थी थी और उनकी इसी कामयाबी को आशा भोंसले पचा नहीं पा रही थी इसलिए एक बार उन्होंने एक गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान अनुराधा के पति अरुण पौडवाल को स्टूडियो में देख लिया तो वह आग बबूला हो गई और कहा कि यह आदमी जब तक यहां है मैं गाना रिकॉर्ड नहीं करूंगी तो आशा के इस बर्ताव से सबको बहुतहैरानी हुई।
लेकिन आशा आजी बर्मन की पत्नी थी और यह सॉन्ग आरटी रिकॉर्ड कर रहे थे लिहाजा उनके पति को वहां से बाहर कर दिया गया और इस तरह से आशा ने अनुराधा पौडवाल की कामयाबी का गुस्सा उनके पति पर उतार दिया जहां आशा भोसले ने खुद जिंदगी भर दुख और तकलीफ का सामना किया तो वहीं आशा ने भी कई लोगों को काफी दुख और तकलीफ के सागर में डाल दिया था आशा भोसले की उपलब्धियों की बात की जाए तो आज के वीडियो में समय भी कम पड़ जाएगा पर इन उपलब्धियों के पीछे एक बड़ी कड़वाहट भरी सच्चाई भी छुपी हुई है लोग कहते हैं कि आशा ने अपनी इस ऊंचाई तकपहुंचने के लिए अपनी को सिंगर के साथ गहरी साजिशें की थी आशा के ऊपर सुमन कल्याणपुर हेमलता अनुराधा पौडवाल शारदा राजन अल्का यागनिक जैसी गायिकाओं से गाने छीनने के भी आरोप लगे बताते हैं कि इन्होंने नए संगीतकारों के साथ ग्रुप बाजी की और उभरती गायिकाओं और नई गायिकाओं को कभी आगे नहीं बढ़ने दिया छोड़ो छोड़ो मेरी राहे मेरी बाहे तो वही इनके ऊपर अपनी छो छोटी बहन उषा मंगेशकर को भी अपने से आगे नहीं बढ़ने देने का आरोप है लोग तो यहां तक कहते हैं कि आशा लता मंगेशकर की कामयाबी से भी कहीं ना कहीं जलती थी और मनमुटाव रखती थी इनसंगीन आरोपों के मुताबिक संगीत की दुनिया में चोटी पर बने रहने के लिए आशा भोसले जी ने साम दाम दंड भेद की पूरी राजनीति की आशा भोसले ने अपनी पहली शादी के तलाक के बाद भी अपना नाम भोसले ही रहने दिया क्योंकि आशा को लगता था कि कहीं वह अपनी बड़ी बहन की छाया ही बनकर ना रह जाए इसलिए उन्होंने अपना नाम हमेशा आशा मंगेशकर नहीं बल्कि आशा भोंसले ही रहने दिया कहा जाता है कि आशा भोसले ने ओपी नैयर को सिर्फ अपनी संगीत में कामयाबी पाने के लिए इस्तेमाल किया था और ठीक वैसे ही इन्होंने आरडी बर्मन के साथ भी किया और यह बात उससमय के न्यूज़पेपर और मैगजीन में भी थी कि आशा ने अपनी कामयाबी और उपलब्धियों के लिए सबका इस्तेमाल किया जिंदगी के गुजरते सफर में आशा के ऊपर लगे इन आरोपों और रिश्तों में कितनी सच्चाई है और बनावटी पन है यह बात आप सभी को बतानी है दोस्तों आपको क्या लगता है कि आशा भोसले ने अपनी जिंदगी में जो किया वह किस हद तक उचित था या नहीं था आप अपनी बात कमेंट करके हमें जरूर बताएं रोज रोज आखों [संगीत] ले आशा भोसले अपने बेटे आनंद के साथ फिलहाल मुंबई में रहती हैं आशा कई म्यूजिक शोज में बतौर जज बनते हुए नजर आती हैं सोशल मीडिया नेजी चैनल को इंटरव्यूज देतेभी वह दिखाई दी लेकिन आशा भोंसले ने अब संगीत से दूरी बना ली है।
उम्र के इस पड़ाव पर आशा भोसले अब 41 साल की हो चली है और अब वह अपने बेटे के साथ जिंदगी जी रही हैं जब भी मिलती है मुझे तो दोस्तों यह थी आशा भोसले की जिंदगी कामयाबी विवादों की पूरी कहानी आपको आशा भोसले जी के बारे में अगर कोई बात पता है या उनकी कौन सी बात सही थी और कौन सी नहीं यह सब कुछ आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं आप आशा भोसले को किस नजरिए से देखते हैं आपको क्या लगता है कि आशा एक विलन है या समय की मारी दुख हारी गायिका है
