जिस शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पीएम ने पैर छुए उसी को योगी ने क्यों भेजा नोटिस?

13 जुलाई 2024 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई के जिओ वर्ल्ड सेंटर आते हैं। अंबानी परिवार से मिलकर पीएम मोदी आगे बढ़े। अब वह धर्मगुरुओं की ओर जा रहे थे। सबसे पहले पीएम मोदी ने हाथ जोड़े और वहां मौजूद एक जगतगुरु के पैर छुए। उनसे आशीर्वाद लिया। धर्मुगुरु ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए अपनी रुद्राक्ष की माला उतारी और पीएम मोदी के गले में पहना दी।

यह जगतगुरु थे ज्योतिष पीठ के पीठाधीश शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। वो जगतगुरु जिनसे पीएम मोदी ने सबसे पहले आशीर्वाद लिया। उनके पैर छुए और वही धर्मुगुरु जिनसे अब उत्तर प्रदेश की सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार का प्रशासन शंकराचार्य होने के सबूत मांग रहा है। जुलाई 2024 में अनंत अंबानी के शुभ आशीर्वाद समारोह में क्या-क्या हुआ था? इस पर आपको आगे डिटेल में जानकारी देंगे। फिलहाल उस नोटिस की बात करते हैं जो योगी सरकार ने स्वामी अभिमुक्तेश्वरंद के खिलाफ जारी कर दिया है। यह खबर 20 जनवरी 2026 की सुबह आई। स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि प्रयागराज के माघ मेले में लगे उनके शिविर में रात 12:00 बजे एक अधिकारी आया था। उन्होंने स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद से एक नोटिस उसी वक्त स्वीकार करने को कहा। बाद में अधिकारी उनके शिविर पर ही वह नोटिस चसपा करके चला गया। नोटिस पर तारीख डली थी 19 जनवरी 2026 और यह नोटिस आधिकारिक तौर पर प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया था। इसमें सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केस नंबर सीए 3011 बाय 2020 में एक आदेश दिया था।

इस केस में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि 17 अक्टूबर 2022 या उसके बाद भी स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद या किसी और को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में अपना पट्टा अभिषेक करने ना दिया जाए जब तक यह मामला हल नहीं हो जाता। इस मांग को सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को जारी किए अपने आदेश में स्वीकार कर लिया। नोटिस में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद इस मामले को लेकर कोई भी नया आदेश नहीं आया है।

इसके बावजूद आप माघ मेला 2025-26 में अपने आप को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बता रहे हैं। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना लगता है। इसलिए इस नोटिस को एक्सेप्ट करने के 24 घंटे के अंदर आप यह साफ करें कि आप खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य कैसे बता रहे हैं। सीधे शब्दों में कहें तो योगी सरकार के मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने के सबूत मांग लिए हैं। उन्हीं अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जिनके पीएम मोदी ने झुककर पैर छुए थे। उनसे आशीर्वाद मांगा था। शंकराचार्य ने इसके जवाब में कहा सुप्रीम कोर्ट का आर्डर 14 अक्टूबर 2022 को आया था। जबकि हमारा पट्टा अभिषेक इससे पहले ही हो चुका था। फिर भी खींचतान तो जारी है ही।

और ये कहानी यूं ही नोटिस के मोड़ तक नहीं पहुंची है। बीच में बड़े हिचकोले आए। बड़ी भिड़ंत हुई। शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जहां माघ मेला लगा है। इसी मेले में 18 जनवरी 2026 को स्नान करने के लिए शंकराचार्य अभी मुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहुंचे। उनके साथ उनके शिष्य और अनुयाई भी थे। शंकराचार्य अपनी पालकी पर थे। पुलिस और मेला प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की। जिसके बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरनंद के अनुयायियों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हो जाती है। शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासन ने उन्हें स्नान करने जाने से रोक दिया। प्रशासन ने कहा कि शंकराचार्य ने 200 शिष्यों के साथ रथ पर जाने की परमिशन नहीं ली थी। शंकराचार्य बोले कि पुलिस ने उनके शिष्यों के साथ मारपीट की है। पुलिस बोली कि शिष्यों ने पुलिस के साथ की है। शंकराचार्य ने कहा पुलिस वाले सिविल ड्रेस में मौजूद थे। हमारे खिलाफ एक बड़ी साजिश की गई।

स्वामी अभिमुक्तेश्वर ने दावे किया कि उनके साथ यह सब इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने महाकुंभ 2025 के दौरान मची जानलेवा भगदड़ के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दोषी ठहराया था और फिर 1920 जनवरी की दरमियानी रात को स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्रशासन की ओर से यह नोटिस दे दिया जाता है। कहा जाता है कि वो यह साबित करें वो कैसे खुद को शंकराचार्य बता रहे हैं। यह बात है जनवरी 2026 की। लेकिन अब इससे डेढ़ साल पहले जुलाई 2024 की घटना पर वापस चलते हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी है। 12 जुलाई को मुंबई के जिओ वर्ल्ड सेंटर में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी हुई। शादी के अगले दिन यानी 13 जुलाई को उसी जगह शुभ आशीर्वाद नाम से एक आशीर्वाद समारोह रखा गया। आशीर्वाद समारोह में पक्ष विपक्ष के बड़े नेता और देश विदेश के बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज भी शरीक हुए। द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानानंद सरस्वती और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी न्योते पर आए। मुकेश अंबानी और नीता अंबानी ने दोनों शंकराचार्यों का स्वागत किया।

आशीर्वाद भी लिया। इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी भी मुंबई के आईएएस टावर का उद्घाटन करने पहुंचे थे। उद्घाटन और भाषण के बाद पीएम मोदी भी जिओ वर्ल्ड सेंटर पहुंच गए। वो समारोह में दूल्हा दुल्हन यानी अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट के पास गए। रस्म अदायगी की। फिर जोड़े ने पीएम मोदी के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। ठीक इसके बाद पीएम मोदी के सामने सिर झुकाकर नीता अंबानी और मुकेश अंबानी ने उनसे हाथ मिलाए। फिर मोदी उनके साथ धर्म गुरुओं की तरफ बढ़ते हैं। वहां सारे धर्म गुरुओं के सामने पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया और सबसे पहले वो स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद की ओर बढ़ गए। पहले प्रधानमंत्री ने शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पैर छुए। उन्हें प्रणाम किया।

फिर शंकराचार्य ने अपने गले से रुद्राक्ष की माला उतारी और पीएम मोदी के गले में डाल दी। इसके बाद मोदी शंकराचार्य सदानानंद सरस्वती की ओर बढ़ गए। उनसे भी पीएम मोदी ने पैर छूकर प्रणाम किया। जिसके बाद स्वामी सदानानंद सरस्वती प्रधानमंत्री मोदी को एक नारंगी रंग का गमछा निकालकर पहना देते हैं। इस जगह योग गुरु रामदेव भी मौजूद थे। अब जब सीएम योगी के प्रशासन ने स्वामी अभिमुक्तेश्वर आनंद को नोटिस दिया है तो पीएम मोदी का यह आशीर्वाद भी याद आता है जो उन्होंने स्वामी अभिमुक्तेश्वर आनंद से लिया था।

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