बेटा रुक जाओ। एक गाड़ी और मैंने मंगाई है। शांत रहना उसी में। चल कोशिश तो कर। एफडीआर वाले सिड्ढी पे बैठकर बोल रहे थे कि इसमें ठंडा पानी है। सरिया हम अंदर नहीं जाएंगे।
रात के अंधेरे में 30 से 40 फुट पानी से भरे गहरे गड्ढे में तैरती कार जो हर पल डिसबैलेंस हो रही है और कभी भी पानी में डूब सकती है। उसकी छत पर एक आदमी लेट कर बैलेंस बना रहा है। मोबाइल की टॉर्च जलाकर अपने जिंदा होने का एहसास दिला रहा है। और इसी इंतजार में है कि अब कोई आकर उसे वहां से खींच कर ऊपर चढ़ा लेगा।
सामने हर कोई खड़ा है। आम पब्लिक है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें, पुलिस के आला अधिकारी और खुद उस पीड़ित लड़के के पिता भी। लेकिन कोई भी कुछ नहीं कर पाता। आखिर में इस मंजर को देखती भीड़ के सामने उस पीड़ित की मौत हो जाती है। कोई कुछ क्यों नहीं कर पाया? इस सवाल से ज्यादा कुछ ना करने के पीछे की वजह झकझोर देती है। घटना उत्तर प्रदेश की हाईटेक सिटी नोएडा की है। यूपी का कॉर्पोरेट हब। 16 जनवरी की रात करीब 12:30 बजे का समय हो रहा था। युवराज ऑफिस से घर लौट रहे थे। घर नोएडा के सेक्टर 150 में है। यहां टाटा यूरेका पार्क नाम की सोसाइटी में रहते थे वह। गुरुग्राम के सेक्टर 54 में ऑफिस है। रात का समय था।
घने कोहरे की वजह से विजिबिलिटी काफी लो थी। वह ऑफिस से घर आ रहे थे। घर के पास पहुंच ही गए थे। तभी एक टर्न पर उनकी कार कंट्रोल से बाहर हो गई और 30 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज जिस सोसाइटी में रहते थे, वहां पास में ही एक मॉल बनने वाला है। बेसमेंट के लिए बड़ा गड्ढा खोदा गया है। तस्वीर में आप देख सकते हैं यह काफी बड़ा गड्ढा है और पानी से लबालब है। प्लॉट पर कोई बैरिकेडिंग नहीं है।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस कंस्ट्रक्शन साइट के पास एक भी प्रकॉशन साइन या बोर्ड का नामोनिशान नहीं था। अमूमन नियम तो यही है कि ऐसे खतरे वाली जो जगह होती है वहां पर साइन बोर्ड लगाना जरूरी होता है। आगे खतरा है, ड्राइव स्लो जैसे बोर्ड लगते हैं। लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं था। युवराज की कार जैसे ही इस गड्ढे में गिरी, वो जतन करके किसी तरह कार की छत पर आ गए। फोन का टॉर्च जलाकर मदद के लिए चीखते रहे। हेल्प हेल्प पिता को भी कॉल लगाई। सोसाइटी पास में ही थी। वह फौरन हादसे वाली जगह पर भी पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस बुलाई।
पुलिस के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दमकल की टीमें भी मौके पर पहुंची। लेकिन उनके पास पर्याप्त साधन ही नहीं थे। बताया जा रहा है कि पानी ठंडा और गड्ढे के अंदर सरिया होने की वजह से टीम्स ने अंदर जाने से मना कर दिया। तमाशबीन में से एक डिलीवरी एजेंट मुनिंदर ने पानी के अंदर जाकर देखने की कोशिश की। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। उसने अपने बयान में उस समय की आपबीती भी सुनाई।
1:45 पे यहां आया हूं। मैंने आके देखा है तो एसडीआरएफ वाले सिड्डी पे बैठ के बोल रहे थे कि इसमें ठंडा पानी है सरिया हम अंदर नहीं जाएंगे। तो लड़का मुझसे 10 मिनट पहले ही डूबा था। मैं बोला तुम बाहर आओ मैं जाऊंगा अंदर। वो बाहर आए। मैंने अपने कपड़े उतारे। मैंने कमर पे अपने पे रस्सा बांधा और कम से कम 50 मीटर अंदर गया मैं और कम से कम 30 मिनट मैंने वो लड़का ढूंढा अंदर। इस पानी में रात पौ:45 बजे। 30 मिनट तक मैंने वो लड़का ढूंढा। ना तो मुझे गाड़ी मिली ना मुझे लड़का मिला।
फिर ढूंढने के बाद मैं आ गया और आपने उसके बाद 5:30 बजे मैं यहां से गया हूं। 5:30 बजे तक ना ही तो लड़का लिकड़ा था ना ही गाड़ी निकली थी। उसके बाद मैं क्या कहूं कि मैं तो अपने घर चला था और मुझे कुछ नहीं पता इसके बारे में। रेस्क्यू में देरी होने की वजह से युवराज की जान चली गई। प्रशासन ने अब हादसे वाली जगह पर बैरिकेडिंग कर दी है। आज तक से जुड़े संवाददाता अरुण त्यागी जब घटना स्थल पर पहुंचे तो उन्हें लोगों ने बताया कि यहां पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।
वह सामने से रोड आ रही है। बिल्कुल यह जो सड़क आ रही है और यह बिल्कुल यहां पर आके सड़क जो जहां पे यह गड्ढा शुरू होता है जहां पे यह नाला है और गड्ढा शुरू होता है और यहां पे आकर खत्म हो जाती है।
तो जाहिर सी बात है ये ऐसी जगह पर प्राधिकरण को रिफ्लेक्टर लगाने चाहिए एरो लगाने चाहिए थे कि ये रोड यहां पे खत्म है और आप इस तरफ जा सकते हैं। लेकिन जब यह पूरा वाक्या हो गया उसके बाद से प्रशासन की तरफ से देख सकते हैं किस तरीके से बैरगेड्स लगाए गए हैं ताकि यहां पे कोई आगे ना आ सके और यही अगर काम पहले हो जाता उस शख्स की जान नहीं जाती और सबसे बड़ी बात यह है कि कुछ दिन पहले हम बता बता रहे हैं कि एक ट्रक का भी एक्सीडेंट इसी तरीके से हुआ था लेकिन किसी तरीके से उस चालक की जान बचा ली गई थी। युवराज के पिता ने एमजेड विश टाउन प्लानर और एक दूसरी डेवलपर कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि रेस्क्यू टीम के पास बोट होती तो बेटे को समय रहते बचाया जा सकता था। बेटे ने फोन किया कि 12:00 बजे मिडनाइट में कि पापा मैं नाले में गिर गया हूं। मुझे बचाओ। इतना सुनते ही मैं दौड़ पड़ा। जिस हालत में था वैसे ही मैं दौड़ पड़ा उसको बचाने के लिए और वहां बोला कि नाला के पास गिरे हैं तो नाला खोजते हुए मैं करीब 12:40 तक वहां पहुंचा स्पॉट पर इतनी लेट क्यों पहुंचे तो पास ही था मैं दूसरे सर्च करने में दूसरे नाले की तरफ चला गया था फिर वहां से पूछने पर बेटे ने बताया कि नहीं वो नाला नहीं जो सोसाइटी के नजदीक वाला नाला वहां पढ़ाना है तब मैं फिर वहां से जो भी उपलब्ध गाड़ी थी उसको पकड़ कर के वहां तो आपकी कन्वर्सेशन कैसे हो रही थी? मोबाइल से हो रही थी। वो मोबाइल से बात कर रहा था। जब स्पॉट पर पहुंचा मैंने उसको फिर फोन किया बेटे कहां हो दिखाई नहीं पड़ रहा है।
तब हो रहा इतना था कि दिखाई हां तो फिर उसने अपना मोबाइल टॉर्च ऑन कर लिया और तब वहां से देखा एक हल्का सा लाइट वहां पर नजर आ रहा था। बोले बेटा बैठना मत। तो नहीं मैं बैठा हुआ नहीं हूं। बैलेंस बिगड़ रहा था। हम लेटे हुए हैं तो गाड़ी की छत पर वो गाड़ी से निकल कर बाहर आया और हिम्मत करके छत पर लेट गया था हम और वहां से हेल्प हेल्प चिल्ला रहा था ताकि कोई राह चला भी कोई आदमी उसको हेल्प कर सके वो हाइड्रोलिक वाली मशीन भी आई काफी लंबींबी बड़ी सी लेकिन तब भी वो लोग रस्सी वहां नहीं पहुंचा सके कमी ये आखरी कि उन लोगों के पास स्विमिंग वाला कोई पर्सनल नहीं था और बोट वगैरह नहीं था ताकि बोट से बेटे तक पहुंच सके और उसको मदद कर सके। हम पूछे कोई स्विमर है आपके पास टीम में या तो भला नहीं नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने दो बिल्डर कंपनी एमजेड विश टाउन प्लानर और लोटस ग्रीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
इस घटना के संबंध में जो पीड़ित है उनकी तरफ से उनके परिवार की तरफ से दी गई तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में थाना नॉलेज पार्क में अभियोग पंजीकृत किया गया है। हादसे की जांच की जा रही है और जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कठोरतम कारवाही सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस ने मामले में की धारा 105 गैर इरादतन 106 का सब क्लॉज़ एक किसी व्यक्ति के द्वारा की गई लापरवाही या जल्दबाजी से किसी व्यक्ति की मृत्यु धारा 125 मानव जीवन या दूसरे की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने की तमाम धाराओं में केस दर्ज किया है।
घटना स्थल पर मिट्टी का ढेर और बैरिकेड लगवा दिए गए हैं। लेकिन ऐसी लापरवाही कई सवाल जरूर खड़े करती है। सेक्टर 150 टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के लोगों में इस लापरवाही को लेकर बहुत ही ज्यादा गुस्सा है। हर आदमी को है। हमें आप सभी को घटना में हुई लापरवाही के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए। कैंडल मार्च निकाले गए।
उन्होंने लापरवाही बरतने वाले बिल्डरों के खिलाफ कारवाही की मांग की है। लेकिन सवाल हैं कुछ। सवाल किए जा रहे हैं कि कंस्ट्रक्शन साइट के मालिकों की जिम्मेदारी क्या गड्ढे खुदवाने तक सीमित है? जब शहर के रिहायशी इलाके में इतना बड़ा काम चल रहा हो तो वहां एक रिफ्लेक्टर लगवाने की भी जरूरत नहीं समझी गई और फिर प्रशासन की लापरवाही भी तो है।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें जिन पर हर बड़े हादसे पर पहला भरोसा जताया जाता है। सबसे पहले इन्हीं टीमों को ऐसी घटनाओं में आगे भेजा जाता है। नोएडा जैसे शहर में तमाम सुरक्षा बल और रेस्क्यू टीम जब एक गड्ढे से शख्स को रेस्क्यू नहीं कर पाती। पानी ठंडा है जैसे जवाब सामने आते हैं तो सिस्टम के रवैया पर सवाल उठना तो लाजमी है।
