क्या सोशल मीडिया पर आपका कंटेंट अगर कोई बच्चा देख ले तो आप पर एफआईआर हो सकती है? आगरा में सोशल मीडिया ने एक मां को एक इन्फ्लुएंसरर के खिलाफ एफआईआर करने पर मजबूर कर दिया। रूबी तोमर के बच्चे मोबाइल पर रील देख रहे थे। अचानक उनकी आंखों के सामने एक और भद्दा वीडियो आ गया। रूबी ने तुरंत मोबाइल बच्चों के हाथ से छीन लिया और यह तय किया कि इस मामले को अनदेखा नहीं किया जाएगा।
उन्होंने इंस्टाग्राम की उस यूजर आईडी के खिलाफ साइबर क्राइम थाना में एफआईआर दर्ज करा दी। रूबी ने बताया कि यह घटना 4 जनवरी को कमला नगर के एक ब्यूटी पार्लर में हुई थी। रूबी आयुर्वेदिक दवाइयों की सप्लाई करती हैं और वह 4 जनवरी को इस ब्यूटी पार्लर में दवाई की सप्लाई के लिए गई थी। पार्लर में एक महिला मोबाइल पर रील देख रही थी और तभी अचानक अश्लील वीडियो स्क्रीन पर चलने लगा। रूबी ने तुरंत वीडियो को बंद करवा दिया। लेकिन इस घटना ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि समाज और बच्चों पर सोशल मीडिया का कितना गहरा असर पड़ रहा है।
एक दिन बाद 5 जनवरी को रूबी के घर पर बच्चों के सामने वही Instagram रील फिर से सामने आ गई। उन्होंने बच्चों से तुरंत मोबाइल छीन लिया और खुद उस इंस्टाग्राम आईडी पर जाकर वीडियो और रील्स देखे। इस दौरान रूबी ने पाया कि इस आईडी पर अपलोड हर वीडियो है। महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं और अश्लील इशारे किए गए हैं।
सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेंट का प्रसार ना केवल बच्चों के मानसिक विकास के लिए हानिकारक है बल्कि समाज में नैतिक पतन को भी बढ़ावा देता है। जांच में यह भी सामने आया कि इस इन्फ्लुएंसरर की दो इंस्टाग्राम आईडी है जिनमें लगभग 4.5 लाख फॉलोवर्स हैं। फेसबुक पर भी उसके करीब 10,000 फॉलोवरर्स हैं। इसके वीडियोस को अब तक 1.5 करोड़ लोग देख चुके हैं। रूबी ने आगरा के साइबर क्राइम सेल में इस यूजर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और कानूनी कारवाई की मांग की है। यहां आपको यह भी बता दूं कि भारतीय कानून के अनुसार सोशल मीडिया पर सामग्री फैलाना गंभीर अपराध है। आईटी एक्ट 2000 के सेक्शन 67 के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री को अपलोड करना या फिर शेयर करना अपराध माना जाता है।
दोषी को 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता यानी बीएएस 2023 के तहत भी ऐसे मामलों में सख्त प्रावधान किए गए हैं। बीएएनएस की धारा 294 के अनुसार किसी भी प्रकार की सामग्री का निर्माण प्रकाशन या फिर डिजिटल माध्यम से प्रसारण अपराध है। खासतौर पर जब उसका प्रभाव सार्वजनिक नैतिकता या फिर बच्चों पर पड़ता हो। इसी तरह बीएएनएस की धारा 79 महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों इशारों या फिर दृश्य प्रस्तुतियों को दंडनीय अपराध मानती है।
ऐसे मामलों में बाल संरक्षण से जुड़े कानून विशेष रूप से बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने के सिद्धांत लागू होते हैं और पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट ट्रेस कर इन्फ्लुएंसरर के खिलाफ एफआईआर कंटेंट हटाने और आपराधिक कारवाई तक कर सकती है। तो साफ है कि अगर किसी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर या फिर अकाउंट द्वारा ऐसा कंटेंट पोस्ट किया जाता है जो कि अभद्र या फिर बच्चों के लिए इनए्रोप्रियट है और वह नाबालिगों तक पहुंच जाता है तो उस अकाउंट को चलाने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। रूबी का कहना है कि ऐसे वीडियो और रील्स बच्चों और समाज पर बहुत बुरा असर डाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं कि पुलिस इस पर तुरंत कारवाई करें। पुलिस अब इस इंस्टाग्राम आईडी को ट्रेस कर महिला की पहचान करने और कानूनी कारवाई के लिए जुटी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया की निगरानी कितनी जरूरी है? तो बता दूं कि विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के मोबाइल और टैब का समय निश्चित सीमा में रखना, पैरेंटल कंट्रोल एप्स का इस्तेमाल करना और उन्हें खेल, पढ़ाई और आउटडोर एक्टिविटीज में व्यस्त रखना जरूरी है। साथ ही परिवार के साथ समय बिताना और स्क्रीन फ्री ज़ोन बनाना भी बच्चों के मानसिक विकास और नैतिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
तो सवाल यही है कि क्या सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स और व्यूज के नाम पर किसी को भी ऐसा कंटेंट डालने की खुली छूट होनी चाहिए? बच्चों तक ऐसे कंटेंट को पहुंचने से कैसे रोका जाए? क्या ऐसे इन्फ्लुएंसर्स पर सख्त कारवाई जरूरी है या फिर जिम्मेदारी सिर्फ माता-पिता की मानी जानी चाहिए?
