धर्मेंद्र का बचपन बहुत ही साधारण था। उनका जन्म 8 दिसंबर 1935 को लुधियाना जिले के नसरौली गांव में हुआ। उनके पिता केवल किशन सिंह देओल एक अनुशासन प्रिय हेड मास्टर थे। जबकि उनकी मां सतवंत कौर घर की भावनात्मक ऋण थी। इसी सादगी भरे माहौल में उनके संस्कार बने। धर्मेंद्र जी की एक बहन भी थी जसविंदर कौर। धर्मेंद्र का अपनी बहन से बेहद गहरा रिश्ता था और जसविंदर की बेटी दीपमाला आज भी देओल परिवार के हर बड़े-छोटे कार्यक्रम में शामिल होती हैं।
जसविंदर के बेटे अमरीक सिंह पंजाब में जाने-माने कारोबारी हैं और धर्मेंद्र के साथ उनका रिश्ता सिर्फ बहनोई भांजे का नहीं बल्कि पिता पुत्री जैसा माना जाता है। यह परिवार की शुरुआत से ही एक जुड़ा हुआ मजबूत रिश्ता था। जिसने धर्मेंद्र की सोच और जड़ों को हमेशा जिंदा रखा। धर्मेंद्र का मन पढ़ाई में कभी बहुत तेज नहीं रहा।
इसलिए उन्होंने सिर्फ 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई की। लेकिन फिल्मों के लिए उनका जुनून बचपन से ही अटूट था। वो अपनी पसंदीदा एक्ट्रेस सुरैया की फिल्म दिलगी को देखने के लिए कई मील पैदल चलकर सिनेमा हॉल जाते। वो इतने बड़े फैन थे कि उन्होंने यह फिल्म 40 से ज्यादा बार देखी। फिल्मों का यही जुनून उन्हें मुंबई खींच लाया। फिल्मफेयर टैलेंट हंट जीतकर जब वह पहली बार मुंबई आए तब उनके पास ना पैसे थे ना पहचान। लेकिन दिल में एक यकीन था कि एक दिन पूरी दुनिया उन्हें जानेगी। इस संघर्ष भरे दौर में 1954 में सिर्फ 19 साल की उम्र में उनकी पहली शादी प्रकाश कौर से हुई। प्रकाश कौर एक ऐसी महिला जिन्होंने कभी लाइमलाइट को अपने पास भटकने नहीं दिया। लेकिन धर्मेंद्र की सफलता के पीछे सबसे बड़ी ताकत वही थी। धर्मेंद्र जब फिल्मों में संघर्ष कर रहे थे तब घर, बच्चे और पूरे परिवार की जिम्मेदारी प्रकाश कौर ने पूरी निष्ठा से निभाई।
यही वजह है कि धर्मेंद्र बाहरी दुनिया जीतने पर पूरा ध्यान लगा सके। 1960 में उनकी पहली फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे आई। शुरुआती दौर में उन्हें अनुपमा, सत्यकाम, वंदिनी, चुपके-चुपके जैसी फिल्मों में संवेदनशील और बहुमुखी प्रतिभा वाले किरदार निभाने को मिले। इसी समय मीना कुमारी के साथ उनका नाम जुड़ा। कहा जाता है कि मीना कुमारी ने उनके करियर को संभालने में बहुत मदद की। लेकिन 1966 की फूल और पत्थर ने उन्हें हीन और गर्म धर्म की पहचान दी और उनकी लोकप्रियता आसमान छूने लगी।
धर्मेंद्र और प्रकाश कौर के चार बच्चे हुए। सनी देओल, बॉबी देओल, विजेता देओल और अजीत देओल। यह चारों बच्चे आज देओल परिवार की विरासत को एक बिल्कुल नए स्तर पर ले जा चुके हैं। सबसे पहले बात करते हैं बड़े बेटे सनी देओल की जिन्हें लोग अजय सिंह देओल के नाम से भी जानते हैं। सनी देओल अपने पिता की तरह खरे और ईमानदार स्वभाव के हैं। 1983 में धर्मेंद्र ने अपने बेटी विजेता के नाम पर विजेता फिल्म्स बनाई और उसी बैनर के तहत सनी को बेताब से लॉन्च किया। सनी की आवाज, उनकी एक्शन टाइमिंग और उनकी सादगी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। घायल, गदर, बॉर्डर जैसी फिल्मों ने उन्हें ना सिर्फ सुपरस्टार बल्कि देशभक्ति और एक्शन का प्रतीक बना दिया। सनी की पत्नी पूजा देओल लाइमलाइट से दूर रहती हैं। लेकिन परिवार के हर बड़े फैसले में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उनके दोनों बेटे करण देओल और राजवीर देओल अब सिनेमा की तीसरी पीढ़ी के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। करण ने पल-पल दिल के पास से डेब्यू किया और हाल ही में दिशा आचार्य से शादी की। राजवीर ने दोनों फिल्म से इंडस्ट्री में कदम रखा। इस तरह देओल परिवार की तीसरी पीढ़ी भी फिल्मी दुनिया में कदम जमा चुकी है। दूसरे बेटे हैं बॉबी देओल जिनका असली नाम विजय सिंह देओल है। बॉबी ने 1995 में बरसात से धमाकेदार शुरुआत की। उनकी मासूम मुस्कान और हेयर स्टाइल ने उन्हें युवाओं का चहेता बना दिया। करियर में उतार-चढ़ाव आए लेकिन उनमें हार मानने की आदत कभी नहीं थी। आश्रम और एनिमल के जरिए उन्होंने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की और आज वे इंडस्ट्री के सबसे चर्चित कलाकारों में से एक हैं। बॉबी की पत्नी तान्या देओल एक सफल इंटीरियर डिजाइनर हैं।
उनके बेटे आर्यन देओल और धर्म देओल देओल वंश की अगली पीढ़ी हैं और धर्म का नाम सीधे उनके दादा धर्मेंद्र के नाम पर रखा गया है। धर्मेंद्र की बड़ी बेटी विजेता देओल ने हमेशा फिल्मों से दूरी बनाए रखी। उनकी शादी विवेक गिल से हुई और उनके दो बच्चे बेटी प्रेरणा गिल जो कि एक जानीमानी लेखिका हैं और बेटा साहिल गिल अपनी-अपनी फील्ड में स्थापित हैं। छोटी बेटी अजीता देओल ने भी फिल्मों से दूरी रखी। वे अमेरिका में मशहूर डेंटिस्ट डॉक्टर किरण चौधरी की पत्नी हैं और खुद स्कूल साइकोलॉजिस्ट के रूप में काम करती हैं। उनकी बेटियां डॉ. निकिता मीना चौधरी और प्रियंका चौधरी अमेरिका में शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में स्थापित हैं।
धर्मेंद्र के भाई अजीत देओल भी फिल्मी दुनिया से जुड़े थे। उन्हें कुंवर अजीत सिंह के नाम से जाना जाता था। उनकी पत्नी उषा देओल और बच्चे अभय और वीरता देओल हमेशा से ही धर्मेंद्र के बेहद करीब रही हैं। अभय देओल को धर्मेंद्र ने अपनी कंपनी के तहत सोचाना था से लॉन्च किया। अभय ने अपने चाचा और पिता की तरह मुख्यधारा सिनेमा नहीं चुने बल्कि ऑफ बीट प्रयोगात्मक और कंटेंट ड्रिवन फिल्मों में अपना नाम बनाया। उनकी बहन वीरता देओल ने रम्मी ढिलो से शादी की और वह कैलिफोर्निया में रहती हैं। यह बात दिलचस्प है कि अजीत देओल और धर्मेंद्र के मौसी के बेटे वीरेंद्र सिंह ने एक ही दिन दो सगी बहनों उषा और पम्मी से शादी की थी। धर्मेंद्र के मौसी के बेटे वीरेंद्र सिंह का नाम इस रिशेदारी में सबसे खास है।
मीम वीरेंद्र दिखने में धर्मेंद्र के हम शक्ल थे और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारे थे। उन्हें पंजाबी सिनेमा का धर्मेंद्र भी कहा जाता था। उनकी पत्नी पम्मी सिंह एक निर्देशक थी और उनके बेटे रमिंदर सिंह और रमनदीप आर्य आज पंजाबी फिल्मों में निर्माता और अभिनेता के रूप में सक्रिय हैं। वीरेंद्र की 1988 में शूटिंग के दौरान दुखद हत्या हो गई थी। लेकिन धर्मेंद्र ने उनके परिवार का हाथ कभी नहीं छोड़ा और हमेशा उनका सहारा बने रहे। धर्मेंद्र की जीवन कहानी का सबसे भावुक अध्याय तब शुरू हुआ, जब उनकी मुलाकात हेमा मालिनी से हुई। हेमा जिन्हें दुनिया ड्रीम गर्ल कहती है और धर्मेंद्र की जोड़ी पर्दे पर इतनी खूबसूरत थी कि लोग उन्हें वास्तविक जीवन में भी एक दूसरे के साथ देखना चाहते थे। 1979 में धर्मेंद्र ने इस्लाम धर्म कबूल कर दिलावर खान नाम से हेमा मालिनी से शादी की। इस रिश्ते पर विवाद हुए आलोचना भी हुई लेकिन हेमा ने हमेशा कहा कि धर्मेंद्र ने उन्हें और उनकी बेटियों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी।
हेमा ने फिल्मों के बाद राजनीति में कदम रखा। धर्मेंद्र और हेमा की बेटियां ईशा और आना देओल दोनों परिवार की बेहद करीबी हैं। ईशा ने फिल्मों में अच्छा काम किया और उनकी शादी भरत तक्तानी से हुई है। ईशा की बेटियां आराध्या और मिराया। अब देओल परिवार की चौथी पीढ़ी की शुरुआत है। आना देओल ने अभिनय से दूरी रखकर डांस और फिल्म मेकिंग में अपना करियर बनाया। उन्होंने वैभव बोहरा से शादी की। उनके बेटे डेरियन और जुड़वा बेटियां एस्ट्राया और एडिया इस परिवार की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं। धर्मेंद्र की सबसे बड़ी सफलता यह है कि उन्होंने अपने दोनों परिवारों प्रकाश कौरवाला और हेमा मालनेवाला दोनों को बराबर सम्मान बराबर स्नेह बराबर पहचान दी। उन्होंने अपने बेटों को लॉन्च किया।
अपनी बेटियों के करियर को सपोर्ट किया। अपने भतीजे को मदद की। अपने बहन के परिवार को जोड़े रखा और अपने परिवार की हर शाखा को एक ही जड़ से बांधे रखा। उन्होंने 2007 में अपने बेटों सनी और बॉबी के साथ फिल्म अपने में काम किया और 2011 में अपनी बेटी ईशा के साथ फिल्म टेल मी खुदा में भी दिखे।
भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण दिया। जनता ने उन्हें प्यार दिया और परिवार ने उन्हें वह सम्मान दिया जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। धर्मेंद्र ने सिर्फ एक करियर नहीं बनाया। उन्होंने एक साम्राज्य खड़ा किया जिसमें दो पत्नियां, छह बच्चे, पोते-पोतियां, नाती नातिनों, भाई-बहन, कजिंस, भतीजे, भांजे और आने वाली पीढ़ियां शामिल हैं। यह परिवार गांव की सादगी, पंजाबी धरती की खुशबू और बॉलीवुड की चमक को साथ लेकर चलता है।
धर्मेंद्र का नाम सिर्फ पर्दे पर नहीं बल्कि अपने पूरे वंश की धड़कनों में दर्ज है। यही उनकी असली विरासत है। एक ऐसा परिवार जो आने वाले 50 सालों तक भी बॉलीवुड और समाज में अपनी उपस्थिति को महसूस करवाता रहेगा। ओम
