भारत की राजनीति में पांच दशक से ज्यादा समय तक एक मजबूत और संतुलित आवाज बनाए रखने वाले पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनके जीवन का सफर, उनकी राजनीतिक यात्रा और उनका पारिवारिक बैकग्राउंड आज भी लोगों की दिलचस्पी का बड़ा विषय बना हुआ है।
12 दिसंबर 2025 को 90 साल की उम्र में लातूर स्थित अपने आवास पर शिवराज पाटिल का निधन हो गया। लंबे वक्त से तबीयत ठीक नहीं चल रही थी और परिवार के बीच उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पीछे उनका बेटा शैलेश पाटिल, बहू अर्चना और दो पोतियां हैं। आइए जानते हैं कि शिवराज पाटिल किस जाति से थे?
उनका परिवार कैसा था और किस तरह उन्होंने एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को महाराष्ट्र के लातूर में हुआ था। उनके पिता का नाम विश्वनाथ पाटिल और मां का नाम शारदा पाटिल था। पिता किसान थे और परिवार पूरी तरह से मध्यम वर्गीय पृष्ठभूमि से आता था। इसके बावजूद शिवराज ने पढ़ाई और कर्म के बल पर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। शिवराज पाटिल पंचमशाली लिंगायत समुदाय से संबंध रखते थे जो महाराष्ट्र और कर्नाटक में प्रभावशाली सामाजिक समूह माना गया है। यही समुदाय उन्हीं के सामाजिक आधार का मुख्य हिस्सा भी रहा। उनका विवाह 1963 में विजय पाटिल से हुआ।
दंपत्ति के दो बच्चे हुए। एक बेटा शैलेश और दूसरी संतान बेटी स्वप्ना। उनकी बहू डॉक्टर अर्चना भी राजनीति में सक्रिय हैं। उनकी दो पोतियां भी हैं। परिवार के बाहर भी पाटिल को आध्यात्मिक झुकाव के लिए जाना जाता था और वह सत्य साईं बाबा के बेहद करीबी अनुयाई रहे हैं। वहीं उनके बेटे बिजनेसमैन हैं। उनकी निजी जिंदगी बेहद सादगी भरी और परिवार से उनका रिश्ता गहरा था। पढ़ाई में शुरू से रुचि रखने वाले शिवराज ने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक किया और उसके बाद मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली।
लगभग 2 वर्ष वह लातूर नगर पालिका में अपनी पहली जिम्मेदारियों का निर्वहन भी कर रहे थे। स्थानीय पहचान मजबूत होते ही उन्होंने बड़ी राजनीति की तरफ बढ़ने का मौका मिला। लातूर के प्रभावशाली नेता केशवराव सोनवड़े और माणिक राव सोनवड़े ने पाटिल को पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का अवसर दिया और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शिवराज पाटिल का राजनीतिक कद इतना बड़ा था कि उन्होंने कांग्रेस की लगभग हर बड़ी सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
