जब भी हम अमीर फिल्मी सितारों के बारे में बात करते हैं तो अक्सर संजय खान, शाहरुख खान, सैफ अली खान और विवेक ओवरॉय जैसे कलाकारों का नाम लिया जाता है। यही कहकर चर्चा खत्म हो जाती है कि इन चार-प परिवारों के पास इतना धन है जितना पूरे बॉलीवुड में किसी के पास नहीं होगा। लेकिन ठहरिए। इन लोगों की दौलत का बॉलीवुड से कोई सीधा लेना देना नहीं है। असल में इनकी संपन्नता को बॉलीवुड के नजरिए से आंकना ही गलत होगा। मगर एक ऐसा परिवार भी है जो अपार संपत्ति का मालिक होने के बावजूद पूरी तरह से बॉलीवुड पर केंद्रित रहा है। इस परिवार का धन हर वक्त बॉलीवुड की फिल्मों पर लुटाया जाता रहा है।
यकीन मानिए अगर आपको पता चले कि नाडियाट वाला परिवार के पास कुल मिलाकर ₹13,000 करोड़ की संपत्ति है, तो आपके होश उड़ जाएंगे। और दिलचस्प बात यह है कि यह सारा पैसा उनकी आने वाली फिल्म में लगाया जाने वाला है। राज चोपड़ा ने जरूर स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत लोकेशन पर शूटिंग करने की परंपरा शुरू की थी। लेकिन पूरी की पूरी फिल्म विदेश में फिल्माने का श्रेय साजिद नाडियार्ड वाला और फिरोज नाडियाडवाला इन दोनों भाइयों को जाता है। नाडियार्ड वाला परिवार की फिल्मी विरासत। नाडियार्ड वाला परिवार तीन पीढ़ियों से फिल्म जगत में राज करता आ रहा है।
लेकिन हकीकत यह है कि बहुत कम लोग जानते हैं कि इस परिवार को शानो शौकत तक पहुंचाने वाले अब्दुल करीम नाडियार्ड वाला खुद फिल्मी दुनिया से पूरी तरह अनजान थे। अब्दुल करीम गुजरात के खेड़ा जिले के नाडियार्ड इलाके से ताल्लुक रखते थे। और जब वे 50 के दशक में मुंबई आकर बसे तो उनके नाम के साथ नाडियाडवाला जुड़ गया। बड़ौदा और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में व्यापार करने के बाद उनका मुंबई से नाता जुड़ा। वे गुजरात से कच्चा माल लेकर मुंबई में बेचने लगे और धीरे-धीरे उनका मुनाफा बढ़ता गया। उनकी शोहरत इतनी बढ़ गई कि उन्होंने मुंबई के मलाड इलाके में बड़ी मात्रा में जमीन खरीद ली। उस समय मलाड में शहरीकरण की शुरुआत हो रही थी और इस मौके का फायदा उठाते हुए उन्होंने वहां एक थिएटर भी खोल लिया।
जैसे-जैसे उस इलाके में आबादी बढ़ी, वह जगह नाडियाडवाला कॉलोनी के नाम से जानी जाने लगी। अब आप सोच सकते हैं कि अकेले अब्दुल करीम के पास बड़ौदा, खेड़ा और मुंबई जैसे बड़े शहरों में करोड़ों की संपत्ति फैली हुई थी। आज के समय में उन प्रॉपर्टीज की कीमत इतनी अधिक है कि उनके परिवार के लिए करोड़ों रुपए कमाना कोई बड़ी बात नहीं है। शायद यही वजह है कि अगर आज साजिद नाडियावाला की कोई फिल्म फ्लॉप हो जाती है तो वे तुरंत अगले प्रोजेक्ट पर शिफ्ट हो जाते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि नाडियाडवाला परिवार का फिल्मों से जुड़ाव आखिर कैसे हुआ? असल में थिएटर खोलने के बाद अब्दुल करीम की मुलाकात बड़े-बड़े फिल्मकारों से होने लगी। दिलचस्प बात यह थी कि वे ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे।
लेकिन फिल्मकारों ने उन्हें यकीन दिलाया कि अगर वे उनकी फिल्मों में निवेश करें तो उन्हें कई गुना मुनाफा होगा। इस पर विचार करने के बाद अब्दुल करीम ने फिल्म प्रोडक्शन में कदम रखा और उनके नाम से पहली फिल्म ताजमहल रिलीज हुई। किस्मत का खेल देखिए। 1963 में रिलीज हुई इस फिल्म ने प्रदीप कुमार और बीना रॉय की जोड़ी को एक बार फिर दर्शकों के सामने ला दिया। इससे पहले वे अनारकली 1953 में साथ काम कर चुके थे। हालांकि उनके बाद की दो फिल्में घूंघट और दुर्गेश नंदिनी बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी। लेकिन ताजमहल की सफलता ने अनारकली की यादों को ताजा कर दिया और वही इसकी कामयाबी का बड़ा कारण बनी। इसके बाद नारियाडवाला परिवार ने यह ठान लिया कि चाहे फिल्म की कहानी कितनी भी कमजोर क्यों ना हो, लेकिन हीरो हीरोइन की जोड़ी जरूर चर्चित होनी चाहिए। यही वजह है कि आज भी जब नाडियार्ड वाला परिवार कोई फिल्म बनाता है तो उसमें हीरो हीरोइन की जोड़ी को लेकर खूब चर्चाएं होती हैं।
उनकी फिल्मों में भव्यता और विदेशी लोकेशनेशंस पर इतना पैसा लगाया जाता है कि दर्शक बस चकित रह जाते हैं और कहानी पर ज्यादा ध्यान नहीं जाता। खैर, अब फिर लौटते हैं अब्दुल करीम पर। ताजमहल फिल्म के लिए उन्होंने जब अपना खजाना खोला तो फाइनेंसर बनने के बजाय प्रोड्यूसर बनने का बड़ा कदम उठाया। इसके साथ ही उन्होंने पुष्प पिक्चर्स नामक एक प्रोडक्शन हाउस भी खरीद लिया जो 1953 में रिलीज हुई अनारकली फिल्म के निर्देशक नंदलाल जसवंत लाल की कंपनी थी। इसलिए जब अब्दुल करीम ने ताजमहल बनाई तो उन्होंने इसे नंदलाल जसवंत लाल को एक श्रद्धांजलि के रूप में भी समर्पित किया क्योंकि 1961 में उनका आकस्मिक निधन हो गया था। खैर ताजमहल फिल्म के बाद अब्दुल करीम नाडियाडवाला के सपने और भी बुलंद होते गए। उन्होंने अपने दोनों बेटों को भी फिल्मी दुनिया में पहले से उतारा हुआ था। उनके दो बेटे थे अब्दुल गफ्फार और सुलेमान। अब्दुल करीम नाडियाडवाला की पत्नी का नाम था फातिमा। दोनों बेटों में बड़े थे अब्दुल गफ्फार जिनका जन्म 1931 में हुआ था और छोटे बेटे सुलेमान का जन्म 1936 में हुआ था।
अगर नाडियार्ड वाला परिवार के फिल्मी सफर को आकार देने वाले सबसे अहम शख्स की बात करें तो वे थे अब्दुल गफ्फार। उन्होंने 1955 से लेकर अब तक 200 से भी अधिक फिल्मों में पैसा लगाया। लेकिन बतौर प्रोड्यूसर उनका नाम गिनी चुनी फिल्मों में ही दर्ज हुआ। जैसे महाभारत 1965, झूठा सच 1984, लहू के दो रंग 1997, हेराफेरी 2000 और वेलकम 2007। असल में फिल्म जगत में पहला कदम अब्दुल गफ्फार ने ही रखा था। उसके बाद उनके पिता अब्दुल करीम ने पुष्पा पिक्चर नामक प्रोडक्शन कंपनी खरीदी। अब्दुल गफ्फार के फिल्मी सफर की शुरुआत इंस्पेक्टर 1955, अयोध्यापति 1956, हिल स्टेशन 1957 और मेहंदी 1957 जैसी फिल्मों से हुई थी। पारिवारिक जानकारी देते हुए उनके व्यक्तिगत जीवन की चर्चा ना करना ही बेहतर होगा। लेकिन इतना जरूर बताना चाहूंगी कि उन्होंने अभिनेत्री शीला कश्मीरी से शादी की थी। इस शादी से तीन संताने हुए।
मुश्ताक, फिरोज और बेटी मेहनाज। इनमें सबसे चर्चित नाम फिरोज नाडियाडवाला का है। जिनका जन्म 30 मार्च 1965 को हुआ था। फिरोज वही फिल्मकार हैं जिन्होंने पूरी की पूरी फिल्म दुबई में शूट करने की हिम्मत दिखाई थी। हालांकि आज वे कॉमेडी फिल्में बनाते हैं। लेकिन जब उन्होंने 1983 में फिल्मी सफर शुरू किया था तब उनकी फिल्में गंभीर विषयों पर आधारित होती थी। एक दिन बहू का झूठा सच, घर हो तो ऐसा, कारतूस, हंसते-खेलते जैसी फिल्में इसी दौर की हैं। धीरे-धीरे उन्होंने कॉमेडी की ओर रुख किया और जब हेराफेरी सुपरहिट हुई, तो उन्होंने अक्षय कुमार को लेकर कई कॉमेडी फिल्में बनाई, जिनमें आवारा पागल दीवाना, दीवाने हुए पागल, फुल एंड फाइनल और वेलकम जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। फिरोज़ के भाई-बहन भी फिल्म और सामाजिक जगत में सक्रिय हैं। उनकी बहन मेहनाज़ एक जानी मानी लेखिका हैं और मानव अधिकार कार्यों में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया है।
इतना ही नहीं उन्हें डॉक्टर की उपाधि भी मिली हुई है। उनके बड़े भाई मुश्ताक के बारे में लोग कम जानते हैं जबकि वे भी एक प्रतिष्ठित हस्ती हैं। स्टूडियो वन कंपनी के मालिक मुश्ताक शुरू से ही पोस्ट प्रोडक्शन के काम में दिलचस्पी लेते रहे। इसके अलावा उनका ग्राफिक्स, एनिमेशन और विज्ञापन क्षेत्र में भी एक बड़ा नाम है। अब बात करें अब्दुल गफ्फार और उनके परिवार की तो इस सिलसिले को यहीं खत्म करते हुए एक आखिरी महत्वपूर्ण बात जरूर बताना चाहूंगी। फिरोज नाडियाडवाला की पत्नी शबाना सईद को 2020 में नारकोटिक्स विभाग ने ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार किया था। दिलचस्प बात यह थी कि दो दिन बाद ही कोर्ट में पेशी के दौरान जज ने उन्हें जमानत दे दी। शबाना की वकील ने नारकोटिक विभाग की चार्जशीट का हवाला देते हुए साबित कर दिया कि उनके पास से बहुत ही कम मात्रा में ड्रग्स बरामद हुआ था। इस घटना से यह भी सामने आया कि शबाना और फिरोज एक साथ नहीं रहते थे। आखिर में यह बताना जरूरी है कि फिरोज के पिता और अब्दुल करीम के बेटे अब्दुल गफ्फार का 22 अगस्त 2022 को निधन हो गया था। अब बात करते हैं।
नाडियाडवाला परिवार के दूसरे बेटे सुलेमान की। सुलेमान अब्दुल गफ्फार के छोटे भाई थे और उन्होंने अपने बड़े भाई से बहुत कुछ सीखा था। हालांकि इंटरनेट पर उनके नाम से शायद ही कोई फिल्म उपलब्ध हो लेकिन वे भी अपने पिता और भाई की तरह फिल्मों में निवेश करते थे। शायद कम ही लोग जानते होंगे कि सुलेमान के बेटे साजिद 80 के दशक में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट रह चुके थे। उन्होंने एक बार कहा था कि उनका सपना आईएएस अफसर बनने का था। साजिद पर चर्चा करने से पहले यह बता दें कि सुलेमान की पत्नी का नाम शफाकत था। दुर्भाग्य से 2007 में सुलेमान का निधन हो गया और वे अपने बेटे की पूरी सफलता देख नहीं पाए। साजिद का जन्म 18 फरवरी 1966 को हुआ था। चार्टर्ड अकाउंटेंसी और वकालत की पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने फिल्म जगत में बतौर स्पॉटबॉय अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने अपने चाचा गफ्फार के साथ रहकर फिल्म मेकिंग की बारीकियां सीखी और नई-नई जोड़ियों को लेकर फिल्में बनाने का सिलसिला जारी रखा। अब अगर संपत्ति की बात करें तो अब्दुल करीम की जायदाद सुलेमान और गफ्फार के बच्चों के बीच बढ़ चुकी है। क्योंकि साजिद अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे इसलिए उन्हें इसका बड़ा हिस्सा मिला। हैरानी की बात नहीं कि अब्दुल करीम की 50% जायदाद पर आज साजिद अकेले ही हक जताते हैं। मलाड क्षेत्र में उनके पास कई जमीनें हैं। जहां उन्होंने कई इमारतें भी बनवाई हैं।
नाडियाडवाला परिवार में सबसे चर्चित शख्सियत बनने के पीछे साजिद की जिंदगी में दिव्या भारती की कहानी बेहद महत्वपूर्ण है। यह जगजाहिर है कि साजिद ने दिव्या से चोरी छिपे शादी कर ली थी। और जब दिव्या की रहस्यमई परिस्थितियों में मौत हुई तो लोगों ने साजिद को इसका जिम्मेदार ठहराया। कई लोगों का मानना था कि नाडियाडवाला परिवार के अंडरवर से संबंध थे और इसी वजह से कुछ लोग यह भी कहते हैं कि दिव्या की मौत किसी साजिश का हिस्सा थी। हालांकि इतने साल बीत जाने के बावजूद कहा जाता है कि साजिद आज भी दिव्या भारती को नहीं भूल पाए हैं और हमेशा उनकी तस्वीर अपने जेब में रखते हैं। दिव्या की मौत के बाद साजिद की जिंदगी में तब्बू आए। लेकिन किसी कारणवश दोनों की शादी नहीं हो पाई और तब्बू आजीवन अविवाहित रह गई। हालांकि साजिद ने पत्रकार वर्दा खान से शादी की और आज उनका एक खुशहाल परिवार है। उनके दो बेटे हैं सुभान और सुफियान। वर्तमान में साजिद अपने परिवार के साथ मुंबई के अंधेरी वसोवा इलाके में रहते हैं। उनके पास करीब ₹1,000 करोड़ की संपत्ति है। वीडियो के अंत में हम यह कहना चाहेंगे कि नाडियाडवाला परिवार कभी भी सामाजिक या गंभीर विषयों पर आधारित फिल्में बनाने में रुचि नहीं रखता। अगर फिरोज नाडियाडवाला की कुछ फिल्मों को छोड़ दें तो साजिद की अधिकतर फिल्में ऐसी होती हैं जिनमें ठोस कहानी का अभाव होता है।
दुर्भाग्य से फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा इकोसिस्टम बन चुका है कि यदि किसी बड़े कलाकार ने नामी सितारों के साथ फिल्म बनाई और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया तो वह फिल्म भले ही फ्लॉप हो लेकिन फिर भी सैकड़ों करोड़ रुपए कमा ही लेती है। साजिद नाडियाडवाला की फिल्में इसी रणनीति पर आधारित होती हैं।
