अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गई सुलक्षणा पंडित, बहन विजेता को क्या कुछ मिला?

सुरक्षणा पंडित हिंदी फिल्मों की बहु आया में प्रतिभाशाली अभिनेत्री व पार्श्व गायिका थी। वे संगीत परिवार से आती थी। उनके पिता पंडित प्रताप नारायण पंडित एक शास्त्रीय गायक थे और उनके चाचा पंडित जसराज महान रचनात्मक गायक एवं शिक्षक थे। उनका एक्टिंग व गायक दोनों करियर था। उन्होंने 1960 और 70 के दशक में गाने गाए।

फिल्मों में अभिनय किया और बाद में कुछ जटिल जीवन परिस्थितियों से जूझ। हाल ही में खबर आई है कि सुरक्षना पंडित का निधन हो गया है। उनके भाई ललित पंडित ने पुष्टि की है कि 6 नवंबर 2025 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और उनका निधन हो गया। उम्र लगभग 71 वर्ष बताई गई है। इस तरह एक कला जीवन समर्पित करने वाली कलाकार ने इस संसार को छोड़ दिया।

वह संपत्ति जिसका हकदार कौन होगा? उनकी बहन, विजेता पंडित, उनके बच्चे या फिर सुरक्षरा पंडित की संपत्ति किसी के हाथ नहीं लगेगी। क्योंकि उन्होंने तो संजीव कुमार के प्यार में अपना घर ही नहीं बसाया। लेकिन वह अपनी बहन विजेता पंडित के साथ रह रही थी। इसके लिए हमारी इस वीडियो में जानते हैं कि उनकी संपत्ति के बारे में। शुरुआत उन्होंने बहुत छोटी उम्र में की थी। उदाहरण स्वरूप 1967 की फिल्म तकदीर में बाल गायिका के रूप में गाना गाया था। 1970 और 80 के दशक में उनकी पार्श्व गायकी व अभिनय दोनों चर्चित रहे।

उदाहरण स्वरूप 1975 में फिल्म संकल्प में गाया गया गीत तू ही सागर है के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ महिला पारशोगाई का पुरस्कार मिला था। उन्होंने अभिनेता संजीव कुमार के साथ 1975 की फिल्म उलझन से अभिनय करियर प्रारंभ किया था। उनका करियर कुछ वर्ष बाद घटता चला गया। फिल्मों व गानों की संख्या में कमी आई। सुरक्षना पंडित का परिवार संगीत पारंपरिक था। उनके भाई बहन भी इस क्षेत्र से जुड़े थे। जतिन ललित पंडित संगीतकार जोड़ी उनके भाई है तथा उनकी बहन विजेता पंडित भी थी। उन्होंने शादी नहीं की। यह कहा जाता है कि उन्हें संजीव कुमार से गहरा लगाव था और उन्होंने विवाह प्रस्ताव भी रखा था लेकिन उनकी भावनाएं पूरी नहीं हो पाई। अपने करियर की गिरावट, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों तथा निजी दुखों के कारण उनका जीवन कठिन दौर से गुजरा। जब उन्हें फिल्मों व गानों में काम मिलने में कमी आने लगी तब वे आर्थिक रूप से कठिन दौर से गुजरी। उदाहरण के लिए एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2002 के आसपास वे एक बहुत ही टूटफूट की हालत वाले फ्लैट में रह रही थी। जिसमें कोई फर्नीचर नहीं था। इस दौरान उनके स्वास्थ्य में भी गिरावट आई। उनकी हिप की हड्डी टूट गई थी और चार सर्जरी हुई थी। संपत्ति, सिग्नेचर और बिक्री। एक रिपोर्ट में उल्लेख है कि उनके पुराने फ्लैट को बेचा गया और उसके मदद से उन्हें दो-तीन नए फ्लैट खरीदे। उदाहरण के लिए उनके बहन विजेता पंडित ने बताया है कि हमने उनकी पिछली संपत्ति बेची और उनके लिए एक लोखंडवाला में एक फ्लैट खरीदा। एक स्त्रोत्र के मुताबिक वह उन नए फ्लैट में से केवल एक ही बचा पाए क्योंकि एक बड़े भाई वो बहन ने बिक्री की। इसे स्पष्ट रूप से कानूनी साबित नहीं किया गया है।

लेकिन यह मीडिया एवं ब्लॉग्स में चर्चा में रहा है। वर्तमान में वो बहन विजेता के घर रह रही थी और अकेली स्वतंत्र संपत्ति हिस्सेदारी बहुत सीमित हो गई थी। यह भी कहा गया है कि उनकी जीवन शैली गुप्त हो गई थी। सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई देती थी। दरअसल सुरक्षाना पंडित के इलाज में इतना पैसा लगा कि उनके संपत्ति उनके घर सब कुछ बेचना पड़ा और अंत में वो अपनी बहन विजेता पंडित पर निर्भर हो गई जो पहले से अपने पति के निधन के समय पूरी तरह कंगाल हो चुकी थी। विजेता पंडित अपने पति के निधन के समय अपने पति के इलाज में इतना रुपया पैसा लगा चुकी थी कि उनका गाड़ी पर सब कुछ बिक चुका था और इसमें सुरक्षना पंडित ने भी योगदान दिया था।

लेकिन सुरक्षना पंडित भी काफी समय से और अपने शारीरिक परेशानी से जूझ रही थी और ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि ऐसे में उनके हाथ कुछ बचा भी है। सुरक्षरा पंडित संजीव कुमार के प्यार में इतनी दीवानी हो गई थी कि उन्होंने अपना घर भी नहीं बसाया और अपना मानसिक संतुलन भी खो दिया और धीरे-धीरे उनकी बीमारी में पैसा लगने लगा और उनका हाथ खाली होता चला गया और रिपोर्ट्स बताती है कि उन्होंने अपनी संपत्ति बेचकर नया निवेश किया लेकिन नियंत्रण एवं रखरखाव में समस्या आई उनका निजी जीवन दर्दनाक था। उनके प्रति प्रेम अव्यक्त रहा। करियर में गिरावट आई।

स्वास्थ्य कमजोर हुआ और इन सब ने उन्हें सामाजिक रूप से अलग थलग कर दिया। जिम्मेदारी का बोझ व पारिवारिक भूमिका परिवार ने उनकी देखभाल की लेकिन इस तरह की स्थिति यह संकेत देती है कि कलाकारों के पीछे सुरक्षा नेटवर्क हमेशा मजबूत नहीं होता। सुरक्षना पंडित ने अपनी प्रतिभा से संगीत और फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। लेकिन उनका जीवन हमें यह भी दिखाता है कि कला संसार में सफलता के बाद भी संपत्ति स्वास्थ्य सामाजिक समर्थन जैसी बुनियादी जरूरतें कितनी महत्वपूर्ण होती है।

उनका निधन इस बात की भी याद दिलाता है कि कलाकारों की प्रतिष्ठा के पीछे अक्सर संघर्ष भी होता है और उनकी संपत्ति स्थिति भी अनेक बार उजागर नहीं होती।

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