पंजाब की बाढ़ में सब डूबा मगर इंसानियत ज़िंदा रही।

जो अभी फसल लगी होगी वह तो बिल्कुल तबाह हो गई होगी खत्म हो गया ये फसल तो तकरीबन कोई माड़ी मोटी बची भी है ना वो भी तकरीबन खत्म हो गई है वो भी कोई फायदा नहीं हुआ जमीन का जो पानी उतरेगा बीमारी भी फैलेगी और डॉक्टरों को सहूलत भी चाहिए और डीजल और अपने ट्रैक्टर गाड़ी सारा सामान चाहिए तब जाके जमीन पदरी होगी तब जाके फसल उगाई जाएगी गलत बंदे ना फायदा ज्यादा चीज वो तकरीबन सही बंदे चलो सु खाना पानी पहुंच तो चलो कोई चीज तकरीबन जीरो हो गया काम कोई फायदा नहीं खत्म हो गई तो की टीम इस समय पंजाब में मौजूद है जैसा कि आप लोग जानते हैं हफ्ते 10 दिन से पिछले हफ्ते 10 दिन से पंजाब में बाढ़ के हालात बने हुए हैं और आज जो सुबह खबर आई कि पंजाब के सभी जिलों को बाढ़ प्रभावित जिला घोषित कर दिया गया है।

इस समय हम कपूरथला डिस्ट्रिक्ट के एक इंटीरियर गांव में हैं। मैं जिस जगह खड़ा हूं यहां से आगे 16 गांव हैं जो इस समय फंसे हुए हैं। टापू बन गए हैं। क्यों? क्योंकि पीछे भी ब्यास नदी का पानी उफान पर है और यह जो आप यहां पर पानी देख रहे हैं भरा हुआ पानी। यह भी इस साइड से भी पानी भरा हुआ है। तो जो कनेक्टिविटी है दोनों उन 16 गांव की जिला मुख्यालय से वह कनेक्टिविटी टूट चुकी है। लोगों को आप देख रहे होंगे कि यहां पर नाव से आ रहे हैं। ये वो लोग हैं जो यहां पर तमाम एनजीओस, तमाम संगठनों की ओर से मदद पहुंचाई जा रही है। उन गांव वालों को उन 16 गांव वालों को जो वहां फंसे हुए हैं।

उनमें से कुछ लोगों को वापस भी लाया जा रहा है जो वहां से आने के इच्छुक हैं या जिनके घर पूरी तरीके से पानी में डूब चुके हैं वो अपने मवेशियों के साथ वो अपने हाउसहोल्ड के साथ जो घर में रोजमर्रा का सामान होता है वो सभी चीजें लेकर यहां पर आ रहे हैं और मदद लगातार यहां से वहां पहुंचाई जा रही है और यहां पर एक सबसे इंटरेस्टिंग चीज हमें जो लगी कि जब पंजाब का जिक्र आता है और जब हम पंजाबियत एक शब्द का इस्तेमाल करते हैं वो शब्द शब्द यहां सार्थक होता नजर आ रहा है। दूर-दूर से लोग मदद करने के लिए यहां पे आ रहे हैं। अड़ोस पड़ोस के जिलों से लोग यहां पर मदद करने के लिए आ रहे हैं। जो शहरों में रहते हैं जहां पर बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है वो भी यहां पे मदद करने के लिए आ रहे हैं। कोई एक पेटी लेकर आ रहा है तो कोई ट्रैक्टर ट्रॉली भरकर सामान लेके आ रहा है।

मदद करने के लिए। कुछ स्थानीय लोग हैं उनसे पूछते हैं कि यहां अभी तक के क्या हालात रहे हैं। बातचीत जो है वो अपनी ही भाषा में करेंगे। हम आपको उसका हिंदी तर्जुमा बता देंगे। और वैसे आप कोशिश करेंगे बड़ी मीठी सी भाषा है। आपको समझ में भी आएगी। हां जी की नाम है जी जसबीर सिंह। जसबीर जी कितने दिन से यहां पर ये हाल आपको हिंदी समझ में आती है? पंजाबी समझ। अच्छा मैं जो बोलूंगा वो समझ जाओगे ना थोड़ी-थोड़ी। मैं आपकी भाषा को समझा दूंगा और कोशिश करूंगा कि अपनी भाषा भी आपको समझाऊं।

तो कितने दिनों से ये हालात बने हुए हैं यहां पे? ये हालात बने तकरीबन कोई 11 तारीख का पानी इधर आया। कि 11 तारीख महीना तकरीबन हो जाना। पानी तकरीबन पानी महीना तकरीबन हो गया पिंड काफी पिंड बन ये पिंड तकरीबन इधर गुर्जरपुरा मुंडा पिंड कड़का करू वाला ये सारे टाई वाले पिंड बन गाड़ी फिर पिंड आ ये बाऊपुर चुगिया सा ये सारे पिंड तकरीबन काफी पिंड 16 17 पिंड पानी घेर आए ये पिंड तकरीबन पिंड ज्यादा पिंड ज्यादा मार पानी जी मार तो यहां पर जितने आप बता रहे हैं 15 16 जो गांव हैं वो वहां पर पानी घुस गया है तो वहां के लोगों को मदद यहां से पहुंचाई जा रही है।

मतलब बथरी अपने वीर बरी मतद के डॉक्टर टीमा भी जरी पूछ के सारी पूछ कर बाकी कई जिन घर गए हो गया वो तकरीबन का कूट के सारे इधर बाहर लखा हो गया अभी जब हम लोगों से बात कर रहे थे तो ये चीज समझ समझ में आ रही थी कि मदद तो सब तक पहुंच गई। कोई भूखा नहीं है लेकिन जब पानी उतरेगा उसके बाद असली संकट मदद ना मदद चलो पहुंच है मदद फायदा गलत बंदे बहुत उठ गलत बंदे हैं ना वो फायदा ज्यादा इस चीज वो तकरीबन सही बंदे वो तो चलो आ सु खाना पानी पहुंच हो तो चलो कोई चीज तकरीबन पानी लेगा पानी लेन तो बाद आपु ज चीज बाद मतलब तेल दी लोड डीजल दी लोड ट्र दी लोड हर एक चीज चीज लोड जिन पै हो ज बाद पैलियां करा के देनी लोड कोई ज्यादा लोड नहीं है तकरीबन पानी लेगा उ लोड ज्यादा है पानी धीरे-धीरे उतर रहा है पानी अभी कल दो मतलब डेढ़ दो फुट कल ल आगे पानी तकरीबन ज्यादा है आगे दो तीन फुट ही पानी कट गया आगे यहां पे मैं एक चीज देख रहा हूं कि जिला प्रशासन से ज्यादा मतलब सरकार की जो नुमाइंदे होते हैं उनसे ज्यादा स्थानीय लोग मौजूद हैं मदद के लिए क्या ये किस तरीके का है यहां पे सर मजे की बात है सर ये जैसा कि जो सरकारी लोग हैं वो क्या करते हैं आते हैं फोटो खचा के पीछे मुड़ जाते हैं जो जहां अन्य मेरे अपने भाई है वो आते हैं जितना हो सके वहां घर पहुंच के सामान पहन जाते हैं ठीक है सर दूसरा नंबर सर ये है कि कुछ लोग ऐसे हैं कि जिन कि अपने कह लो कि त भी आते हैं और आके मतलब सब कुछ देते हैं।

चाय पानी राशन और अपना क्या दूध का सहूलत है पशु का दूध है, पशुओं का चारा है। सभी सामान देते हैं। ठीक है सर। तो ये जो 16 गांव के लोग जो फंसे हुए हैं इनके लिए तो अभी बहुत ही टफ लाइफ है। तो यहां से जो उनके भाई लोग हैं, मित्र लोग हैं वो मदद वहां पर भेज रहे हैं और उम्मीद करते हैं हम धीरे-धीरे पानी उतरेगा। चीजें सामान्य होंगी और सरकार भी फिर सोचेगी जिन लोगों के घर डूबे हैं उनको भी आर्थिक सहायता। अच्छा सर ऐसा है ना कि जैसा कि अभी तो बड़ी लोड तो नहीं हैगी। उन्हें लोड पड़ेगी जब पानी उतरेगा बीमारी भी फैलेगी और डॉक्टरों को सहूलत भी चाहिए और डीजल और अपने ट्रैक्टर गाड़ी सारा सामान चाहिए तब जाके जमीन वो पधरी होगी तब जाके फसल उगाई जाएगी क्योंकि जो अभी फसल लगी होगी वो तो बिल्कुल तबाह हो गई होगी खत्म हो गया ये फसल तो खत्म हो गई है ये फसल तो तकरीबन ये कोई माड़ी मोटी बची भी है ना वो भी तकरीबन खत्म हो गई है वो भी कोई फायदा नहीं जमीन दा ते वो भी तकरीबन फसल सारी ख़ हो गई है उदा कोई फायदा नहीं आप कहां से आए हैं वीर जी? गांव तंडी चौधरी। अच्छा तो यहां मदद करने लोगों की पहुंचे। हां मदद आगे भी करके गए। फिर देखना है जो जो चाहिए ज चीज कोई तो वो भेजेंगे अभी तो खाना राशन पानी तो बहुत वीडियो पे रहे लोग भी अभी रुक जाए। मत भेजो। बहुत मदद हो गई है।

अब लोड नहीं खराब हो रहा है। माल मी पे रहा तो की फायदा नहीं। मतलब हर जरूरतमंद तक मदद पहुंच रही है और ये अपील भी की जा रही है कि बहुत हो गया है। काफी चुकी हैं। अभी रुक जाए थोड़े। जो पानी थोड़ी प्रॉब्लम होनी मिट्टी या रेत टो गया परी कर वास्ते डीजल दी लोड खाद पानी जो क एक चीज भाई साहब बताइए आपने इससे पहले ऐसा माहौल कब देखा था ये माहौल 23 आया 2023 में ओ पानी तकरीबन थोड़ी देर ही ते ले गया पानी कुछ ना कुछ झोने ही बच गए ही ते कोई एक जीरो% भी बचन आस नहीं तकरीबन जीरो हो गया काम कोई फायदा नहीं उनको यहां खत्म हो गया। बड़े स्तर पर पानी जैसे भर गया है। 16 के 16 गांव टापू बन गए हैं। ये आप लोगों ने जब से आप होश संभाला है बड़े हुए हैं तब से आप लोगों ने देखा तकरीबन 88 पानी आया है।

हां वही 88 पानी आया। 88 तकरीबन जन्म मेरा 88 दस पानी आया 90 95 थोड़ा पानी देखी सूरत समली होगी 95 95 शायद पानी थोड़ा देख होगा नहीं तो बाद क जिंदगी पानी नहीं ना वो पानी चढ़दा थोड़ा चढ़दा लेना पानी नहीं क जिंदगी देख आ पानी तो ते टप गया ये तो बहुत ज्यादा ये तो बहुत ज्यादा नुकसान बहुत ज्यादा होया चलिए हम उम्मीद करते हैं कि चीजें धीरे-धीरे सुधरेंग क्योंकि हर कोई साथ है यह सबसे बड़ी बात है कि यहां पर हर कोई एक दूसरे की मदद कर रहा है।

किसी को भी किसी चीज की जरूरत है तो वह मदद लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। तो यह है रियल पंजाब और जिसकी तस्वीर हम आपको दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। कमेंट सेक्शन में आप अपने भी जिले और गांव का नाम बता सकते हैं। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि हम आप लोगों तक पहुंचे और आपकी कहानी ललन टॉप के जरिए हम देश और दुनिया के लोगों को दिखाएं। इस समय कैमरे के पीछे हमारे साथी रूहानी हैं। मेरा नाम विकास वर्मा है।

Leave a Comment