चीन का सबसे बड़ा आविष्कार: अब रोबोट देगा बच्चे को जन्म!

क्या हो अगर मैं आपसे कहूं कि भविष्य में बच्चे मां के पेट से नहीं बल्कि एक रोबोट से पैदा होंगे। क्या हो अगर मैं कहूं कि 9 महीने का पूरा प्रेगनेंसी पीरियड एक मशीन के अंदर पूरा होगा। आपको ये किसी साइंस फिक्शन मूवी की कहानी लग रही होगी। है ना? लेकिन यह अब हकीकत बनने जा रहा है। चीन के वैज्ञानिक दुनिया का पहला ऐसा रोबोट बना रहे हैं जो एक इंसानी बच्चे को जन्म दे सकेगा।

जी हां, खबर आ रही है सीधे चीन से। द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के वैज्ञानिक दुनिया के पहले जेस्टेशन रोबोट पर काम कर रहे हैं। आसान भाषा में कहें तो एक ऐसा रोबोट जो बच्चे को जन्म दे सकता है। गुआंगजू की एक कंपनी है काइवा टेक्नोलॉजी जो इस प्रोजेक्ट को लीड कर रही है और इसे हेड कर रहे हैं सिंगापुर की नान्यांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के जानेमाने साइंटिस्ट डॉक्टर झांग किफेंग। उनका दावा है कि यह टेक्नोलॉजी गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक यानी कंसेप्शन से लेकर डिलीवरी तक पूरी प्रेगनेंसी को हूबहू कॉपी करेगी। और सबसे हैरान करने वाली बात इस रोबोट का प्रोटोटाइप 2026 तक लॉन्च करने की तैयारी है। यानी अब से बस कुछ ही महीने दूर।

अब आपके दिमाग में सबसे बड़ा सवाल यही आ रहा होगा कि भाई यह होगा कैसे? एक मशीन बच्चे को कैसे पैदा कर सकती है? चलिए इसे थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं। इस टेक्नोलॉजी के दिल में है एक आर्टिफिशियल वम यानी एक कृत्रिम । यह एक तरह का हाईटेक बैग या कंटेनर होगा जिसमें बच्चे के विकास के लिए बिल्कुल मां के पेट जैसा माहौल बनाया जाएगा।

इस आर्टिफिशियल वम में बच्चा यानी बड़ा होगा। अब सवाल उठता है कि उसे पोषण कैसे मिलेगा? तो इसके लिए एक ट्यूब सिस्टम होगा जो बिल्कुल गर्भनाल की तरह काम करेगा। इसी ट्यूब के जरिए बच्चे को सारे जरूरी न्यूट्रिएंट्स, ऑक्सीजन और हर वो चीज मिलेगी जो उसे बड़ा होने के लिए चाहिए। वैज्ञानिकों ने अभी यह तो साफ नहीं किया कि वो अंडे और स्पर्म को फर्टिलाइज कैसे करेंगे। लेकिन यह माना जा रहा है कि यह आईवीएफ तकनीक की तरह ही होगा जिसमें लैब में एम्ब्रियो तैयार करके उसे इस आर्टिफिशियल वम में इंप्लांट किया जाएगा।

लेकिन यहां एक और सवाल है अगर यह सब एक मशीन में ही होना है तो फिर एक पूरे रोबोट की क्या जरूरत? तो डॉक्टर झांग कहते हैं कि यह आर्टिफिशियल वम रोबोट के पेट में लगाया जाएगा ताकि एक असली इंसान और रोबोट के बीच इंटरेक्शन हो सके। शायद वह चाहते हैं कि होने वाले माता-पिता उस रोबोट के साथ एक कनेक्शन महसूस करें। ठीक वैसे ही जैसे एक मां अपनी प्रेगनेंसी के दौरान करती है। अब आप सोचेंगे कि जब प्रकृति ने इतना बेहतरीन सिस्टम बनाया है तो इस मशीन की जरूरत ही क्या है? तो इसके पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला इनफर्टिलिटी। दुनिया भर में लगभग 15% कपल्स इनफर्टिलिटी यानी बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं। उनके लिए यह टेक्नोलॉजी एक वरदान साबित हो सकती है। जो लोग मां-बाप नहीं बन पा रहे उन्हें एक नई उम्मीद मिल सकती है। और दूसरा पर्सनल चॉइस।

कई लोग ऐसे भी होते हैं जो बायोलॉजिकल प्रेगनेंसी के दर्द और शारीरिक बदलावों से नहीं गुजरना चाहते। यह टेक्नोलॉजी उन्हें भी माता-पिता बनने का एक विकल्प दे सकती है। और हां, एक बात और इसकी कीमत बताया जा रहा है कि इस रोबोट की कीमत करीब 1 लाख युवान यानी लगभग 12 से 14 लाख भारतीय रुपए के आसपास हो सकती है। यह कीमत इसे भविष्य में बहुत से लोगों की पहुंच में ला सकती है। यह टेक्नोलॉजी सुनने में जितनी कमाल की लगती है, उतने ही बड़े सवाल भी खड़े करती है और यहीं से शुरू होती है असली बहस। पहला सवाल मां बच्चे का बॉन्ड। एक मां 9 महीने बच्चे को अपने पेट में रखती है। उसकी हर हरकत महसूस करती है। उससे बात करती है। इसी से गहरा भावनात्मक रिश्ता बनता है।

क्या एक मशीन वो बॉन्डिंग दे पाएगी? दूसरा सवाल। बच्चे का साइकोलॉजिकल इंपैक्ट। जब वो बच्चा बड़ा होगा और उसे पता चलेगा वो मां के पेट से नहीं बल्कि एक रोबोट से पैदा हुआ है तो उस पर इसका क्या मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा? समाज उसे कैसे देखेगा? तीसरा सवाल भगवान बनने की कोशिश। क्या हम इंसान प्रकृति के काम में बहुत ज्यादा दखल अंदाजी कर रहे हैं? अंडे और स्पर्म कहां से आएंगे? क्या इससे डिजाइनर बेबी बनाने का रास्ता खुल जाएगा? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब वैज्ञानिकों और समाज दोनों को मिलकर ढूंढना होगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि डॉक्टर झांग की टीम इन नैतिक और कानूनी सवालों पर चीन सरकार से बात कर रही है ताकि इसके लिए नियम और कानून बनाए जा सके। और यह कोई पहली बार नहीं है जब आर्टिफिशियल वम पर काम हुआ हो। 2017 में वैज्ञानिकों ने एक बायोबैग में मेमने को सफलतापूक विकसित किया था।

लेकिन उसे एक इंसान के लिए और वो भी एक पूरे रोबोट के रूप में बनाना। साइंस की दुनिया में एक बहुत बड़ी छलांग है। यह टेक्नोलॉजी करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की किरण हो सकती है। तो वहीं इंसानियत के भविष्य पर कई सवाल भी खड़े करती है। 2026 ज्यादा दूर नहीं है। तब हम देखेंगे कि यह रोबोट हकीकत बनता है या सिर्फ एक सपना रह जाता है। लेकिन मैं आपसे पूछना चाहता हूं आपको इस टेक्नोलॉजी के बारे में क्या लगता है?

Leave a Comment