नमस्कार, न्यूज़ 24 देख रहे हैं आप और मैं हूं आपके साथ मुस्कान शास्त्री। यूपी के एक पिता की 48 औलादें हैं और ऐसा हम नहीं ऐसा एक वोटर लिस्ट में दिखाई दे रहा है। जरा आपको वो वोटर लिस्ट दिखाते हैं जिसमें एक पिता के 48 बच्चे हैं और इन सबके नाम वोटर लिस्ट में है पर इनका पिता एक ही है। दरअसल सोशल मीडिया पर एक चुनावी वोटर लिस्ट की तस्वीर वायरल हो रही है।
दावा किया जा रहा है कि चुनाव आयोग के इस डाटा के अनुसार उत्तर प्रदेश में राम कमल दास नाम के एक व्यक्ति के 43 बेटे हैं। यानी कि 43 जो सभी एक ही घर में रहते हैं। इनमें से 13 बेटे एक ही समय पर पैदा हुए हैं और सभी की उम्र 37 साल है। सोशल मीडिया पर एक यूजर संदीप यादव ने इसे साझा किया है और लिखा है उत्तर प्रदेश के रामकमल दास जी अपने घर में 43 बेटों के साथ रहते हैं। उनके 13 बेटों का जन्म एक ही समय में हुआ।
सभी की उम्र 37 साल है। इसके अलावा तीन-तीन बेटों का जन्म तीन-चार बार में हुआ। जिनकी उम्र क्रमशः 35, 36 और 47 साल है। बाकी बेटों में से कोई 48 साल का, एक दो 49 साल का और कोई 37 से 49 साल के बीच का है। भारत के कर्मठ, निष्पक्ष और ईमानदार चुनाव आयोग इस मामले को स्पष्ट कर रहा है। इस पोस्ट के बाद लोगों ने इसे रिशेयर कर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी और इलेक्शन कमीशन एक बार फिर सवालों को घेरे में आ गया है। अब राहुल गांधी के सारे सबूतों और सवालों के बाद सवाल यह है कि आखिर यह हो क्या रहा है?
क्या चुनाव आयोग सच में मतदाता सूची को लेकर इतनी ज्यादा लापरवाह है? राहुल गांधी के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब अलग-अलग जगहों से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं और अब इस खबर के बाद कांग्रेस के नेता फिर से विरोध करते नजर आ रहे हैं। आप जरा वो तस्वीरें देखें जिसमें कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। छोड़ छोड़ छोड़ छोड़ तो देखा आपने लेकिन जब हमने इस मामले की जांच की तो पाया कि यह जो लिस्ट वायरल हो रही है दरअसल इसे कई मीडिया पोर्टल्स ने साझा किया है और ये खबर 2023 में सामने आई थी जिसमें ये लिस्ट जारी की गई थी लेकिन अब इस मुद्दे को फिर से उजागर किया गया है और पूछा जा रहा है कि क्या ये गड़बड़ी क्यों की जा रही है और यह गड़बड़ी अब सामने आ रही है तो हमें हमें एक रिपोर्ट मिली और उस रिपोर्ट में चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई वोटर लिस्ट की एक कॉपी भी मिली जो वायरल हो रही है। यह लिस्ट वाराणसी के वार्ड नंबर 51 की है जहां एक व्यक्ति को 48 मतदाताओं का पिता बताया गया है।
यह व्यक्ति स्वामी रामकमल दास वेदांती हैं। जो खोजवा स्थित राम जानकी मठ के महंत है। लेख के अनुसार स्वामी रामकमल दास के सचिव ने बताया कि उनके आश्रम में गुरु शिष्य परंपरा का पालन किया जाता है। इसी वजह से आश्रम में पढ़ने वाले बच्चे अपने गुरु को अपना पिता मानते हैं। यही वजह है कि मतदाता सूची में आश्रम में पढ़ने वाले छात्रों के नाम उनके पिता के रूप में स्वामी रामकमल दास के नाम से दर्ज है। वाराणसी की इस अनूठी मतदाता सूची में गुरु शिष्य परंपरा का भी जिक्र है। मठ के प्रमुख राम भरत शास्त्री ने बताया कि गुरु शिष्य परंपरा में शामिल होने के बाद शिष्यों का नाम बदल दिया जाता है और पिता के नाम की जगह गुरु का नाम दर्ज कर दिया जाता है। पहले 150 लोगों ने स्वामी जी का नाम अपने पिता के रूप में दर्ज कराया था, लेकिन अब यह संख्या घटकर 48 रह गई है। निष्कर्ष यह है कि चुनाव आयोग की मतदाता सूची जिसमें राम कमल दास का नाम 48 लोगों के पिता के रूप में दर्ज है। भ्रामक दावे के साथ प्रसारित की जा रही है। रामकमल दास एक धार्मिक गुरु हैं और अविवाहित हैं। उनके आश्रम में गुरु शिष्य परंपरा का पालन होता है। जिसके कारण वहां पढ़ने वाले बच्चों के नाम उनके पिता के स्थान पर रामकमल दास का नाम दर्ज होता है।
मतदाता सूची में जो नाम है जिसमें पिता के खंड में स्वामी जी का नाम अंकित है वे सभी उनके शिष्यों के नाम है। पर इस वायरल सूची ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया और वो सवाल यह है कि क्या कोई ऐसा कानून है या कोई रूल है जो यह बताता है कि यह प्रक्रिया सही है या गलत है?
