यूएस प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टेरिफ के कुछ ही घंटों के बाद एक और बड़ा बयान दिया है। वाशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह तो अभी शुरुआत है। आने वाले वक्त में आप बहुत सारे सेकेंडरी सेंशंस देखने वाले हैं। सीपरी जब एक पत्रकार ने पूछा कि भारत ही क्यों टारगेट किया गया? जबकि चीन भी तो रूस से तेल खरीद रहा है।
तो इसके जवाब में ट्रंप बोले कि अभी सिर्फ आठ ही घंटे हुए हैं। आगे देखिए क्या होता है। आप बहुत कुछ और देखने जा रहे हैं। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप से पूछा गया कि क्या चीन पर भी इसी तरह के टेरिफ लगाने की कोई योजना है? तो उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
ट्रंप का अतिरिक्त टेरिफ एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन होने की डेट से 21 दिनों के बाद लागू होगा। 6 अगस्त को आर्डर पर साइन हुए हैं। यानी कि टेरिफ 27 अगस्त से लागू होगा। भारत सरकार ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकपूर्ण बताया है। विदेश मंत्रालय की तरफ से आए बयान में कहा गया कि भारत अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बाजार के हिसाब से तेल खरीद रहा है और यह पूरी तरह से वैध है। भारत ने यह भी कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत को निशाना बनाया है। जबकि दुनिया के और भी कई देश हैं जो अपने राष्ट्रीय हितों को देखते हुए रूसे तेल खरीद रहे हैं। भारत ने अमेरिका और यूरोपियन यूनियन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह देश भी रूसे एनर्जी प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के बयान में यह भी कहा गया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। भारत के इस आरोप को लेकर भी अमेरिकी सरकार के एक अधिकारी ने बयान दिया है। एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि भारत यूक्रेन युद्ध का फायदा उठाकर जानबूझकर रूस से तेल खरीद को बढ़ा रहा है। अमेरिका रूस से वही चीजें आयात कर रहा है जिनका अभी उनके पास कोई अच्छा विकल्प नहीं है। लेकिन वह तेजी से घरेलू विकल्प तैयार करने में जुटे हैं ताकि रूस पर निर्भरता खत्म की जा सके। इसके उलट भारत ने युद्ध का फायदा उठाकर जानबूझकर रूस से कच्चे तेल की खरीद को काफी बढ़ाया है। जबकि दुनिया में करीब 40 बड़े सप्लायर्स हैं जो भारत की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। यानी बात मिलाजुलाकर रूस से तेल लेने पर है। अब इस पर रूस का भी कमेंट आया है। रूस ने ट्रंप के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत का समर्थन किया है। रूसी न्यूज़ एजेंसी टीएसएस के मुताबिक क्रिमलिन के प्रवक्ता दिमत्री पेस्कोव ने कहा कि हम ट्रंप के कई ऐसे बयान देख रहे हैं जो धमकी भरे हैं। यह दूसरे देशों पर दबाव बनाने की कोशिश है ताकि वह रूस से व्यापार बंद कर दें। लेकिन हम इन्हें गैरकानूनी मानते हैं। आपको बता दें कि ट्रंप ने इसी साल अप्रैल में टेरिफ का ऐलान किया था लेकिन बाद में 90 दिनों की मोहलत दे दी गई थी। ताकि तमाम देश अमेरिका से व्यापार संधि कर सकें।
इसमें भारत का भी नाम था। लेकिन इंडिया और यूएस की ट्रेड डील अभी अटकी हुई है और अब टेरिफ आ गया है। लेकिन ट्रंप की बिना आधार वाली तलवार बस इंडिया पर नहीं चली है और भी देश हैं जो रूस से तेल लेने के चक्कर में लपेटे में आ जाएंगे। ट्रंप के आदेश के सेक्शन पांच में लिखा गया है कि जो भी देश रूस से तेल खरीद रहे हैं डायरेक्टली या फिर इनडायरेक्टली उन पर भी 25-25% का टेरिफ लगाया जाएगा।
जानकार बता रहे हैं कि मजनू भाई की इस लिस्ट में अब नाम चीन और तुर्की का भी हो सकता है। और किन-किन देशों को चुंगी लग सकती है? फिनलैंड स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के अनुसार चीन, भारत, तुर्की, यूरोपियन यूनियन, म्यांमार ये देश रूस से कच्चा तेल लेते हैं।
लेकिन कुछ देश ऐसे हैं जो दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स भी रूस से खरीदते हैं। जैसे कि ब्राजील, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, लीबिया, ताइवान, ट्यूनेशिया, मिस्र, मलेशिया, घाना, दक्षिण कोरिया और नाइजीरिया। ये देश भी ट्रंप के बांटे हुए अप्रेजल लेटर का इंतजार कर रहे होंगे।
