कभी-कभी खबरें सिर्फ खबरें नहीं होती। वो किसी की आखिरी पुकार होती। किसी मां की टूटी उम्मीद होती है और उस दर्द की चीख जिसे समाज अक्सर दहेज, रंग और खूबसूरती के तराजू में तौल देता है। आज की यह कहानी केरल की 32 साल की विपंजिका मणि की है जो जीतेजीते टूटी रही। और मरने से पहले भी इंसाफ की उम्मीद छोड़ नहीं पाई। 8 जुलाई शारजा के अलनेहदा इलाके में एक दर्दनाक खबर सामने आई।
विपंजिका और उसकी डेढ़ साल की बेटी वैभवी की लाश उनके फ्लैट से बरामद हुई। पुलिस को लगा यह आत्महत्या है। लेकिन इसके पीछे की कहानी उसे कई ज्यादा दिलदहला देने वाली है। कोल्लम की कुंद्रा पुलिस ने इस मामले में विपंजिका की मां शैलजा की शिकायत पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि विपंजिका को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से तकलीफ किया जा रहा था। सिर्फ इसलिए क्योंकि शादी में दहेज कम मिला।
क्या शादी किसी सामान के सौदे से ज्यादा कुछ नहीं? शिकायत में कहा गया कि उसके बाल काट दिए गए ताकि वह बदसूरत लगे क्योंकि वह अपने पति और ससुराल वालों से ज्यादा गोरी थी। उसके पति निधीश, बहन नीतू और ससुर तीनों पर दहेज का केस दर्ज हुआ है। वो कहती रही मैंने सिर्फ एकपरिवार चाहा था। प्यार चाहा था लेकिन मिला क्या? , अपमान, धोखा और सन्नाटा।
अपने आखिरी नोट में विपंजिका ने लिखा उसने कहा था कि मैंने तुमसे शादी अपने पापा के लिए की है। वो बिस्तर पर अजीब वीडियो दिखाकर मुझे मजबूर करता था। मैं अब और नहीं सह सकती। प्लीज उन्हें मत बखशना।
विपंजिका अब नहीं है। लेकिन उसकी मां शैलजा की आंखें आज भी इंसाफ ढूंढ रही है। और यह सिर्फ एक परिवार का मामला नहीं है। यह सवाल है उस समाज का जहां बेटी की कीमत दहेज, रंग और सहनशीलता से तय होती है। जब तक ऐसे मामलों में सख्त कार्यवाही नहीं होगी, विपंजिकाएं मरती रहेंगी और समाज खामोश देखता रहेगा।
