भारतीय नर्स निमषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में फांसी होनी थी। परिवार परेशान था। पूरी दुनिया की नजरें इस मामले पर टिकी हुई थी कि आखिरकार निमिषा के साथ अब आगे क्या होगा। लेकिन इसी बीच खबर आई कि निमिषा प्रिया की सजा को टाल दिया गया है।
इस बात की जानकारी जेल अथॉरिटी ने खोद दी। जिसके बाद निमिषा के परिवार, भारत सरकार और मुस्लिम धर्म गुरु ने राहत की सांस ली है। नर्स निमषा प्रिया की फांसी टलवाने में निमिषा के परिवार, भारत सरकार और मुस्लिम धर्म गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लेकिन माना जा रहा है कि इस सजा को टलवाने में भारत के ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार की अहम भूमिका मानी जा रही है। क्योंकि मुस्लिम धर्म गुरु ने ही यमन से सजा रोकने का अनुरोध किया था। जिसके लिए वहां पर मीटिंग का आयोजन किया गया था और माना जा रहा है कि उसी के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया।
अब आपको बताते हैं कि आखिरकार कौन है भारत के ग्रांड मुफ्ती अबू बकर तो बता दें आपको शेख अबू बकर अहमद जिन्हें कंठपुरम एपी अबू बकर मुसलियार के नाम से भी जाना जाता है। भारत के 10वें ग्रांड मुफ्ती जो भारत में सुन्नी मुस्लिम समुदाय के एक प्रमुख लोगों में से एक हैं। अबू बकर अहमद का जन्म केरल के कोजीकोट में 22 मार्च 1931 को हुआ। 24 फरवरी 2019 को अखिल भारतीय तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम की ओर से नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित गरीब नवाज शांति सम्मेलन में ग्रैंड मुफ्ती चुना गया। जुलाई 2018 में नौवें ग्रैंड मुफ्ती मोहम्मद अख्तर रजा खान कादरी के निधन के बाद यह ग्रहण है। अबू बकर इस पद के लिए दक्षिण भारत से आने वाले पहले मौलवी हैं।
वर्ल्ड क्लास फैकल्टी कटिंग एज लैब्स एंड इमर्सिव लर्निंग अ वाइब्रेंट कैंपस लाइफ बियड द क्लास रूम एसजीटी यूनिवर्सिटी नर्चरिंग फ्यूचर लीडर्स। क्या काम करते हैं भारत के ग्रैंड मुफ्ती? भारतीय ग्रैंड मुफ्ती देश ही नहीं बल्कि दुनिया में एक खास अहमियत रखते हैं। उनकी भूमिका फतवे जारी करने और धार्मिक एवं सामाजिक मामलों पर मार्गदर्शन देने से संबंधित है। शेख अबू बकर शांति के मुखर समर्थक रहे हैं।
उन्होंने 2014 में आईएसआईएस के खिलाफ शुरुआती फतवे जारी किए थे और भारत के विविध समाज में सेुलर भावना को बढ़ावा देते रहे हैं। अबू बकर अहमद ने अरबी, उर्दू और मलयालम में 60 से ज्यादा किताबें लिखी। 12,000 से ज्यादा प्राथमिक विद्यालयों, 11,000 माध्यमिक विद्यालयों, 638 कॉलेजों सहित कई शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों का संचालन किया है। मुफ्ती अबू बकर को सामाजिक काम के लिए 2021 में यूएई के गोल्डन वीजा, 2023 में मलेशिया के तोहक मॉल हिजरा पुरस्कार, 2008 में सऊदी अरब के इस्लामिक हेरिटेज पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
आपको बता दें अबू बकर दुनिया के 500 इन्फ्लुएंसरर मुस्लिम की सूची में भी रह चुके हैं। साथ ही उन्होंने कई वैश्विक सम्मेलनों में भारतीय मुसलमानों का प्रतिनिधित्व भी किया जिनमें पोप फ्रांसिस जैसी हस्तियों के साथ बैठकें और शेख जायज अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन जैसे कार्यक्रम शामिल है। जिससे उनके कद का अंदाजा लगाया जा सकता है और माना जा रहा है कि अबू बकर की पहल से ही निमिषा प्रिया की फांसी खासतौर पर टल पाई है।
फिलहाल अब देखना होगा कि आगे इस केस में क्या कुछ होता है क्योंकि माना जा रहा है कि तलाल के परिवार वाले हैं जो ब्लड मनी के लिए तैयार नहीं है। हालांकि उनको मनाने की कोशिश लगातार जारी है।
