आज एक राहत देने वाली खबर यमन से भी आई। यमन में कल केरल की नर्स निमशा प्रिया को सजा-ए-मौत दी जानी थी। लेकिन आज निमषा प्रिया की सजा के एग्जीक्यूशन को टाल दिया गया। भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कल कहा था कि निमिषा को मौत की सजा से बचाने के लिए डिप्लोमेटिक तौर पर कोशिश की जा रही है। लेकिन यमन के साथ डिप्लोमेटिक रिलेशन ना के बराबर है। वह हमारा दूतावास भी नहीं है। इसलिए सरकार के पास बहुत ही लिमिटेड ऑप्शन है।
लेकिन आज शशि थरूर ने खुलासा किया कि डिप्लोमेटिक कंस्ट्रेंट के बीच रिलीजियस लीडर के रिलेशंस काम आए। इस मामले में ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत उलमा के महासचिव और भारत के ग्रैंड मुफ्ती एपी अबू बकर मुसलियार ने यमन के सूफी स्कॉलर शेख हबीब उमर से मदद मांगी। शेख हबीब उमर बिन हाफिज यमन की शूरा काउंसिल के मेंबर हैं। और उनका यमन पर काफी प्रभाव है। मुसलियार की पहल काम आई। हबीब उमर बिन हाफिज की अपील का असर हुआ। यमन की सरकार ने एग्जीक्यूशन से 24 घंटे पहले निमिषा की सजाए मृत्यु को टाल दिया। निमिषा प्रिया को यमन के कारोबारी तलाल अब्दुल महदी की के जुर्म में 2020 में आखरी सजा सुनाई गई थी।
यमन की सुप्रीम जुडिशियल काउंसिल ने 2023 में निमिशा की माफी की अर्जी खारिज कर दी थी। निमिषा को 16 जुलाई यानी कल मौत की सजा दी जानी थी। वक्त कम था। बेचैनी ज्यादा थी। निमिषा प्रिया 2012 में यमन गई थी। 2014 में उन्होंने यमन के नागरिक तलाल अब्दुल मेहंदी के साथ मिलकर यमन की राजधानी सना में क्लीनिक खोला। तलाल ने फर्जी डॉक्यूमेंट बनाकर खुद को निमिषा का पति डिक्लेअ कर दिया। उसका पासपोर्ट अपने पास रख लिया और उसे हॉस्टेज बना लिया। तलाल के चंगुल से छूटने के लिए 2017 में निमिषा ने तलाल को बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया। ओवरडोज़ के कारण तलाल का निधन हुआ गई और इसके बाद 2017 में तालाल का शरीर एक अंडरग्राउंड वाटर टैंक में मिला। इसके बाद निमषा प्रिया को सऊदी अरब और यमन के बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया। हालांकि निमिषा ने यमन की कोर्ट में अपनी मजबूरी बताई।
निमिषा ने कहा कि उसने तलाल को सिर्फ बेहोशी का इंजेक्शन दिया था। वो सिर्फ अपने मुल्क अपने परिवार के पास वापस आना चाहती थी। उसका इरादा तलाल को मारने का नहीं था। लेकिन यमन में शरीयत कानून लागू है। शरीयत के मुताबिक जान के बदले जान लेने के नियम के हिसाब से निमशा को भी की सजा सुनाई गई। अब निमषा प्रिया को बचाने के लिए भारत के ग्रैंड मुफ्ती ने यमन के सूफी स्कॉलर से बात की।
ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार ने कहा उन्होंने वही किया जो इंसानियत के लिहाज से किया जाना चाहिए। कल कत्ल का दिन मुकरर किया था। वो चंद दिन के लिए ये काली यमन का काली चेंज किया। उसके बाद 14 दिन के लिए वो त कर दिया हुकुम को। हम तो एक इंसान की हैसियत से। यह करने की तलब किया। वहां ऐसा तलब कबूल किया तो इंडिया में निमिषा प्रिया इस वक्त यमन की राजधानी सना की सेंट्रल जेल में कैद है क्योंकि यमन में सिविल वॉर की वजह से कोई एक सरकार नहीं है।
राजधानी सना परतियों का कब्जा है और हमारी सरकार का हूं बागियों से कोई डायरेक्ट कांटेक्ट नहीं है। इसलिए विदेश मंत्रालय सऊदी अरब में अपनी एंबेसी के जरिए सनामेतियों से बातचीत कर रहा था। सिविल वॉर की वजह से भारत ने 2015 में अपनी एंबेसी बंद कर दी थी और 4000 से ज्यादा भारतीयों को बाहर निकाल लिया था। निमिषा के पति और उनकी बेटी भी सुरक्षित भारत लौटे थे। लेकिन निमिषा प्रिया वहीं रुक गई थी।
2015 में राजधानी सना समेत देश के बड़े हिस्से परतियों ने कब्जा कर लिया। इसके बाद सरकार ने भारतीय नागरिकों के यमन जाने पर रोक लगा दी थी। इसीलिए 2017 में निमषा प्रिया की मां प्रेमा कुमारी यमन नहीं जा सकी थी। लेकिन सेव निमषा प्रिया इंटरनेशनल काउंसिल के नाम की गैर सरकारी संस्था ने निमषा को बचाने की मुहिम शुरू की। तलाल अब्दुल महदी के परिवार को ब्लड मनी ऑफर किया।
शरीयत के कानून के मुताबिक जिस शख्स की हत्या की जाती है, वह ब्लड मनी लेकर जान लेने वाले की सजा माफ कर सकता है। अब तक तो तलाल का परिवार ब्लड मनी के बदले निमशा को माफ करने के लिए तैयार नहीं था। लेकिन ग्रैंड मुफ्ती मुसिलियार की पहल के बाद यमन के सूफी स्कॉलर शेख हबीब उमर बिन हाफिज ने एक बार फिर से तलाल अब्दुल महदी के परिवार से बातचीत शुरू की। क्योंकि शेख हबीब उमर यमन की शुरा काउंसिल के मेंबर हैं। इसलिए निमिषा प्रिया की सजा माफ कराने में उनकी बड़ी भूमिका हो सकती है। हालांकि निमिषा की मौत की सजा माफ होगी या बरकरार रहेगी। यह बहुत कुछ तलाल अब्दुल महदी की फैमिली पर निर्भर करेगा कि वह ब्लड मनी के बदले माफी देने को तैयार होते हैं या नहीं। सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल काउंसिल ने निमिषा प्रिया की माफी के बदले ब्लड मनी के तौर पर $1 करोड़ देने का ऑफर दिया है।
ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर मुसलियार ने बताया कि तला रद्दू की फैमिली के कुछ मेंबर ब्लड मनी के लिए राजी हैं। लेकिन परिवार के कुछ मेंबर्स ऐसे हैं जो अभी इसके लिए तैयार नहीं है। उनको मनाने की कोशिश की जा रही है। इस्लाम में कत्ल के बजाय दयत देना कव देना यह भी है। ऐसा नियत कबूल फरमाएगा या करेगा या नहीं करेगा या के अगर नियत कबूल होना हो तो वो देने के लिए इधर पार्टी तैयार है। यह बात तो क्लियर है कि निमषा के साथ यमन में धोखा हुआ। निमष के बिजनेस पार्टनर ने उसका पासपोर्ट रख लिया। बिजनेस का सारा पैसा हजम कर लिया। निमषा को होस्टेज बना लिया। निमिषा ने अपना पासपोर्ट हासिल करने के लिए परिवार के पास वापस लौटने की नियत से तलाल को बेहोशी का इंजेक्शन दिया। लेकिन ओवरडोज के कारण उसकी जान गई। यानी मामला गैर इरादतन हत्या का है। लेकिन शरीयत कानून में तो खून के बदले खून, आंख के बदले आंख का नियम लागू होता है। यमन से बात करने के लिए भारत के पास कोई डिप्लोमेटिक चैनल भी नहीं है। इसलिए सारे रास्ते बंद हो चुके थे। लेकिन हमारे देश में तो मान्यता है कि जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तो ईश्वर का सहारा काम आता है।
ग्रैंड मुफ्ती निमशा के लिए फरिश्ता बनकर आए। उनकी कोशिश से निमशा की मौत की सजा टल गई है लेकिन रद्द नहीं हुई है। भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि ग्रैंड मुफ्ती की कोशिश कामयाब हो। तलार के परिवार वाले ब्लड मनी लेकर निमशा को माफ करने के लिए तैयार हो जाए और भारत की बेटी फिर अपने वतन लौट आए।
