अहमदाबाद प्लेन हादसे के बाद DGCA की जांच, विमान कंपनियों की सच्चाई सामने आ गई।

घिसे टायरों से टेक ऑफ, धुंधली रनवे लाइंस, खराब सिमुलेटर, पुराना डाटा और लापरवाह एयरपोर्ट स्टाफ। डायरेक्टेट जनरल ऑफ सिविल एिएशन यानी डीजीसीए ने देश के कई बड़े एयरपोर्ट का औचक निरीक्षण किया जिसमें यह हैरान करने वाली खामियां सामने आई हैं। आपको बता दें डीजीसीए विमान उड़ानों पर नजर रखने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था है। बीते दिनों इनके ऑफिसर्स ने देश के कई बड़े एयरपोर्ट्स का निरीक्षण किया जिसकी जांच में सेफ्टी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

दरअसल 12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया की प्लेन संख्या AI171 हादसे का शिकार हो गई थी। जिसमें275 लोगों की मौत हो गई थी। इसी के बाद देश की हवाई उड़ानों पर नजर रखने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था डीजीसीए हरकत में आई। संस्था ने 19 जून को एक सर्कुलर जारी कर पूरे एिएशन सिस्टम की स्पेशल ऑडिट करने के निर्देश दिए। नाम दिया कॉम्प्रहेंसिव स्पेशल ऑडिट जिसके तहत पायलट से लेकर प्लेन तक, एयरलाइंस कंपनियों से लेकर फ्लाइंग स्कूल तक, एयरपोर्ट से लेकर वहां काम करने वाले ग्राउंड स्टाफ, मेंटेनेंस करने वाली कंपनियां और फ्लाइट्स को कंट्रोल करने वाले एटीसी तक सबकी सख्त और बारीकी से जांच के आदेश दिए गए।

इसी आदेशके तहत संयुक्त महानिदेशकों के नेतृत्व में डीजीसीए की दो टीमों ने दिल्ली के आईजीआई और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत कई बड़े हवाई अड्डों की जांच की। जांच में फ्लाइट ऑपरेशंस, रैंप सेफ्टी, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, कम्युनिकेशन, उड़ान से पहले की मेडिकल जांच, रखरखाव जैसी मुख्य बातों को ध्यान में रखा गया था। जांच में यह पता चला है कि एक एयरलाइन की फ्लाइट को उड़ान से पहले इसलिए रोकना पड़ा क्योंकि उसके टायर घिसे हुए थे। जब तक वह ठीक नहीं हुए तब तक प्लेन को उड़ने नहीं दिया गया। ऐसे कई प्लेन पाए गए जिनमें बार-बार तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही थी।

डीजीसीए की जांच में यह भी पता चला है कि कई एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर्स ने काम करते वक्त जरूरी सेफ्टी प्रोटोकॉल भी फॉलो नहीं किए। फ्लैप स्लैड लीवर और थ्रस्ट रिवर्सलर सिस्टम को लॉक नहीं किया गया। थ्रस्ट रिवर्सल सिस्टम वो सिस्टम होता है जो प्लेन के लैंड करने के बाद इंजन की हवा को उल्टी दिशा में मोड़कर उसे जल्दी रोकने में मदद करता है। वहीं फ्लैप स्लैट लीवर की बात करें तो यह विमान के पंखों पर लगे होते हैं और टेक ऑफ या लैंडिंग के समय प्लेन को ज्यादा लिफ्ट यानी उठाने की ताकतऔर कंट्रोल देने का काम करते हैं। इन्हें लॉक ना करने की वजह से विमान का बैलेंस बिगड़ सकता है। इसके साथ ही कई बार प्लेन में लगे ऑटोमेटिक सिस्टम ने कई गड़बड़ियां पकड़ी लेकिन उसे लॉक बुक में लिखा ही नहीं गया। यहां तक कि कुछ प्लेनों में लाइफ जैकेट भी ढंग से नहीं रखे गए थे। प्लेन के एक हिस्से पर लगी खास टेप जो जंग से बचाने का काम करती है वह भी फटी हुई मिली। टूल कंट्रोल सिस्टम भी ढीला ढाला था। यानी जरूरी औजार कहां रखे हैं इसका ठीक से रिकॉर्ड नहीं रखा गया।

एयरपोर्ट पर कुछ रनवे मार्किंग्स इतनी धुंधली हो चुकी थीकि रात में लैंडिंग करना खतरे से खाली नहीं था। यानी रनवे पर जो सफेद और पीली लाइनें बहुत हल्की हो गई थी, इसकी वजह से टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान पायलट को ठीक से दिखना मुश्किल हो सकता है। कई जगहों पर टैक्सीवे, रनवे के साथ वाली पट्टी जहां अक्सर विमान पार्क होते हैं, वहां की लाइटें काम नहीं कर रही थी। यह रात में या खराब मौसम के दौरान पायलट के लिए दिक्कत का सबब बन सकता है।

साथ ही एयरपोर्ट के आसपास जो नई इमारतें बनी हैं, उनका डाटा 3 साल से अपडेट ही नहीं किया गया। डीजीसीए ने जब एक फ्लाइट सिमुलेटर की जांच की तोपता चला कि वह पुराने सॉफ्टवेयर पर चल रहा है। सिमुलेटर का इस्तेमाल प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग के दौरान होता है। ऐसे में एक यह सवाल उठता है कि जब सॉफ्टवेयर ही पुराना होगा तो नए जमाने के प्लेन उड़ाने की ठीक से ट्रेनिंग कैसे दी जा सकती है? यही नहीं एयरपोर्ट के रिस्ट्रिक्टेड एरिया में गाड़ियां बिना स्पीड कंट्रोल के दौड़ रही थी। डीजीसीए ने इन्हें हटवाया और ड्राइवर्स के परमिट भी सस्पेंड कर दिए। अब इन सब खामियों को देखते हुए डीजीसीए ने साफ कहा है कि यह लापरवाहियां बर्दाश्त नहीं होंगी। खामियों को 7 दिन के अंदर ठीक करने का अल्टीमेटम भी दिया गया है।

साथ ही अगर आगे से ऐसी गड़बड़ियां पाई गई तो पहले वार्निंग दी जाएगी और फिर जुर्माना या लाइसेंस भी कैंसिल किया जा सकता है। अहमदाबाद हादसे के बाद से डीजीसीए एयरपोर्ट अथॉरिटीज और विमान संचालन कंपनियों को लेकर सख्ती से निपटने की तैयारी में है।

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