दूल्हे का सहरा सुहाना लगता है.ये गाना तो आपने अक्सर बेटी की बिदाई मे सुना ही होगा लेकिन क्या आप जानते हो ये गाना रिकॉर्ड करते वक्त एक या दो बार नही तेकरीबन डेढ़ सो बार आधे में ही रिकॉर्डिंग रोक दी जाती थी।
हाल ही में ललनटॉप न्यूज से इंटरव्यू में गाने के लेखक समीर ने इस गाने से जुड़ा बेहद भावविभोर करने वाला रोचक किस्सा सुनाया।समीर ने कहा की नदीम जी नुसरत फतेह अली खान के बहुत बड़े चाहक थे जब भी उन्हे कोई रोमेंटिक गाना बनाना होता तो वह पहले नुसरत साहब को सुनते थे। उन्होंने आगे कहा की जब धड़कन फिल्म बन रही थी उस वक्त नुसरत साहब खुद मुंबई आए हुए थे। फिल्म के सारे गाने बन चुके थे, लेकिन क्योंकि नदीम श्रवण नुसरत फतेह अली खान से एक गाना रिकॉर्ड करवाना चाहते थे उन्होंने दूल्हे का सहरा सुहाना.. गीत लिखवाया था।
समीर ने आगे बताया की जब नुसरत साहब इस गाने को रिकॉर्ड कर रहे थे तो वो बार बार मैं तेरी बाहों में पली बाबुल. लाइन तक आकर रुक जाते तकरीबन डेढ़ सो बार ये होने के बाद जब उनसे इसकी वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा की इस लाइन को पढ़ते ही उन्हे अपनी बिटिया याद आ जाती है। हालांकि सब जानते है की ये गाना कितना हिट रहा और आज भी लोग इस गाने को सुनते वक्त भावुक हो जाते है।
