बेटी ही बनी निधन का कारण, बड़े भाई ने किया चौंकाने वाला खुलासा !

मुकुल देव वो शख्स जो पर्दे पर आते ही रियल लगता था ना ओवरएक्टिंग ना ड्रामा बस एक शांत सा चेहरा और आंखों में कुछ गहराई वही शख्स अब हमारे बीच नहीं रहा और किसी को अंदाजा भी नहीं हुआ मुकुल देव एक्टर मॉडल पिता और शायद सबसे ज्यादा एक अकेला इंसान उनकी मौ मौत की खबर ऐसे आई जैसे कोई पुराने पन्ने से अचानक धूल उड़ाकर कोई अधूरी कहानी पढ़ रहा हो मीडिया बयान ना कोई लंबी बीमारी का जिक्र बस एक लाइन एक्टर मुकुल देव अब नहीं रहे पर इस एक लाइन के पीछे छुपी थी एक गहरी बेहद दर्दनाक और तन्हा जिंदगी की पूरी कहानी मुकुल देव का जन्म 30 नवंबर 1970 को दिल्ली में हुआ उनके बड़े भाई राहुल देव पहले से ही मॉडलिंग और फिल्मों में कदम रख चुके थे.

लेकिन मुकुल ने अलग रास्ता चुना शुरुआत में वह एक फ्लाइट अटेंडेंट थे फिर उन्होंने एक्टिंग सीखी और अपने करियर की शुरुआत 1996 में फिल्म दस्तक से की जिसमें मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन भी थी इसके बाद मुकुल देव ने किला क्रांतिवीर कहीं दिया जले कहीं दिल मुझे मेरी बीवी से बचाओ यमला पगला दीवाना सन ऑफ सरदार रोग कृष्णा कॉटेज ऐसी फिल्मों में काम किया टीवी में भी उनका नाम काफी एक्टिव रहा सीआईडी कहानी चंद्रकांता की और फिर कुछ रियलिटी शोज़ में उनकी उपस्थिति रही लेकिन फिर धीरे-धीरे वह पर्दे से गायब होने लगे मैं समझता हूं मुकुलदेव की शादी हुई शिल्पा नामक महिला से कुछ सालों तक सब कुछ सामान्य रहा.

लेकिन फिर उनके रिश्तों में खटास आने लगी इसका अंत हुआ एक तलाक में जो मुकुल के लिए सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं एक भावनात्मक तबाही था सबसे बड़ा झटका उन्हें तब लगा जब उनकी बेटी सिया की कस्टडी उन्हें नहीं शिल्पा को दे दी गई मुकुल जो उस बच्ची को सबसे ज्यादा प्यार करते थे अब उससे सिर्फ तस्वीरों और फोन कॉल्स में मिल सकते थे और वह कॉल्स भी धीरे-धीरे कम होती गई मीडिया ने कभी इस तलाक के बारे में ज्यादा नहीं बताया शायद इसलिए कि मुकुल देव खुद एक बेहद प्राइवेट इंसान थे लेकिन जिन्होंने उन्हें करीब से देखा वह कहते हैं तलाक के बाद मुकुल बदल गए एक समय जो मुकुल सोशल गैदरिंग्स के स्टार हुआ करते थे अब वह धीरे-धीरे अकेले रहने लगे लोगों से मिलना बंद सोशल मीडिया पर एक्टिविटी शून्य यहां तक कि जिन दोस्तों के साथ उन्होंने फिल्में की थी वह भी कहते हैं .

मुकुल अब पहले जैसे नहीं रहे थे जब उनके माता-पिता का निधन हुआ तब वह बिल्कुल अकेले पड़ गए शायद तभी से ने उन्हें जकड़ लिया था ना किसी प्रोजेक्ट की खबर ना किसी इवेंट की तस्वीर बस एक सन्नाटा जो बढ़ता गया और किसी ने नोटिस तक नहीं किया फिर एक दिन खबर आई कि मुकुल को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है और वह भी सीधे आईसीयू में किस बीमारी से जूझ रहे थे कोई नहीं जानता ना ही उन्होंने कभी किसी इंटरव्यू या मीडिया से इसका जिक्र किया उनकी हालत बिगड़ती गई और कुछ ही घंटों में वह चले गए अंतिम वक्त में उनके पास कौन था क्या बेटी सिया ने उन्हें आखिरी बार देखा क्या उन्होंने किसी को कुछ कहा इसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है मुकुल के भाई राहुल देव जो खुद इंडस्ट्री में एक जाना माना नाम है उन्होंने बाद में एक बयान जारी किया पर जो बात सबसे ज्यादा लोगों ने नोट की वह थी उनके बयान में सिर्फ बेटी सिया का जिक्र मुकुल सिया को बहुत मिस करते थे उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश यही थी कि वह एक बार खुलकर अपनी बेटी से मिल सके.

इस बयान में कहीं भी बीवी शिल्पा का नाम नहीं था ना कोई फैमिली शब्द ना ही पत्नी जैसी कोई भावनात्मक झलक बस एक पिता की तड़प जो अपनी बच्ची को देखने के लिए जिंदा था और आखिरकार उसी इंतजार में मर गया अब सवाल यह है क्या वाकई मुकुल की मौत सिर्फ एक बीमारी से हुई या वह बीमारी उस अकेलेपन का नतीजा थी जिसमें वह सालों से जी रहे थे रिश्ते टूटे पेरेंट्स चले गए और बेटी भी उनसे दूर कर दी गई हर इंसान के पास एक वजह होती है जीने की मुकुल के पास वह वजह शायद सिया ही थी और जब वह वजह भी सिर्फ यादों में रह जाए तो इंसान जिंदा कैसे रह सकता है मुकुल की कहानी किसी फिल्म की तरह नहीं है यह एक सच्ची खामोश और रुला देने वाली सच्चाई है एक आदमी जो एक्टिंग में सब कुछ था पर जिंदगी में धीरे-धीरे खाली होता गया यह सिर्फ एक इंसान की मौत नहीं यह उस सिस्टम की नाकामी है जो पिता के इमोशन को अक्सर महत्वहीन मानता है एक बच्चा सिर्फ मां का नहीं होता एक तलाक सिर्फ कानूनी दस्तावेज नहीं होता और एक पिता सिर्फ कमाने वाला नहीं होता.

आखिरी सवाल क्या मुकुल की निधन रोकी जा सकती थी शायद हां अगर उनसे कोई मिलता अगर उनकी बेटी से मुलाकातें होती अगर वह सिर्फ वीकेंड डेड नहीं बल्कि रोते हुए बाप के तौर पर सुने जाते तो शायद आज वह हमारे साथ होते मुकुल देव अब नहीं है लेकिन उनके जाने के बाद जो सवाल बचा है वह है क्या एक पिता की मौत सिर्फ दिल के दौरे से होती है या उस दिल के टूट जाने से जिसे बेटी की हंसी के बिना जीना नहीं आता।

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