भारत की आर्मी ऑफिसर सोफिया कुरैशी की असली कहानी।

कर्नल सूफिया कुरैशी नाम तो अब तक आप लोगों ने सुन ही लिया होगा सुनेंगे भी क्यों ना क्योंकि यह नाम और यह चेहरा पिछले कुछ वक्त से इंडिया के मीडिया और सोशल मीडिया दोनों ही जगह पर सबसे ज्यादा छाया हुआ है और इसकी मेन वजह है 7 मई 2025 की रात में इंडिया की तरफ से पाकिस्तान के अंदर किया गया वो मिलिट्री ऑपरेशन कि जिसको ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया गया है वैसे तो बीच रात में ही जैसे ही इंडिया ने पाकिस्तान में लगभग अलग-अलग नौ ठिकानों पर मिसाइल स्ट्र्राइक्स की तो फौरन ही दुनिया में गदर मच गया था भूचाला गया था मगर फिर भी देश विदेश के तमाम लोगों को इंडिया की तरफ से की जाने वाली उस एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतजार था कि जिसके जरिए से वह इस ऑपरेशन से जुड़ी हुई तमाम इंफॉर्मेशन तमाम बारीक चीजें तमाम बारीक जानकारियां जान और समझ सकें.

वक्त गुजरा रात गुजरी सुबह हुई तो 10:00 से 11:00 बजे के वक्त जाकर फाइनली उस प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतजार खत्म भी हो गया लेकिन जैसे ही यह प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हुई तो लोग काफी हैरान हुए क्योंकि लोगों को कुछ ऐसा दिखा कि जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी मतलब कि यह एक अपने आप में हिस्टोरिकल मंजर था मैं कर्नल सोफिया कुरैशी और मेरे साथ विंग कमांडर वमिका सिंह आज आपको 6 से 7 मई 2025 की रात क्योंकि इतने बड़े ऑपरेशन की ब्रीफिंग के लिए उसको एक्सप्लेन करने के लिए वहां पर जो तीन लोग आए थे उनमें से बीच में तो फॉरेन सेक्रेटरी विक्रम मिश्री थे जबकि उनकी दोनों तरफ कोई मेल नहीं बल्कि फीमेल ऑफिसर्स थी.

एक तरफ थी कर्नल सूफिया कुरैशी जिन्होंने ही बाद में इस पूरे ऑपरेशन की तमाम जानकारियां मीडिया के सामने रखी कि किस तरह से ये ऑपरेशन किया गया पाकिस्तान में किन-किन जगहों को निशाना बनाया गया और क्यों बनाया गया जबकि दूसरी तरफ थी विंग कमांडर व्यूमिका सिंह अब विंग कमांडर व्यूमिका सिंह और उसमें भी खासतौर से कर्नल सूफिया कुरैशी का इस ऑपरेशन की ब्रीफिंग के लिए आना कोई आम बात नहीं थी बल्कि इसके अंदर तो एक बड़ा और गहरा मैसेज छिपा हुआ था वो मैसेज कि जो सिर्फ बाहर के गुनहगार या दुश्मनों के लिए ही नहीं था बल्कि खुद इंडिया के अंदर बैठे हुए कुछ नफरती चिंटुओं के लिए भी था वो इस तरह से कि आपको याद ही होगा कि अभी कुछ दिन पहले ही इंडिया में कश्मीर के अंदर जो दर्दनाक एक हादसा हुआ था तो उसमें जानबूझकर गुनहगार ने लोगों का धर्म पूछ-पूछ कर उनको टारगेट किया था उनको से किया था ताकि इस तरह से इंडिया के अंदर हिंदू मुस्लिम का माहौल बन जाए और वो लोग इस तरीके से इंडिया को तोड़ने और उसको कमजोर करने में कामयाब हो जाएं वैसे तो वो ओवरऑल अपने इन मंसूबों में कामयाब ना हो सके क्योंकि इंडिया पूरी तरीके से यूनाइट नजर आया।

लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर और खासतौर से एक्स के जो पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था वहां पर कुछ लोग ऐसे थे कि जो अपने इन दुश्मनों के ही मसूबों को आगे बढ़ा रहे थे खुलकर धार्मिक नफरत फैला रहे थे और खासतौर से एक कम्युनिटी को ही टारगेट कर रहे थे मानो वो यह मैसेज दे रहे थे कि सारा बदला इनसे ही ले लिया जाए और तो और इन नफरती लोगों ने उन हिमांशी नरवाल को भी नहीं छोड़ा कि जिन्होंने इसी हादसे में अपने पति के जो नेवी ऑफिसर हुआ करते थे उनको खोया था वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि इन्होंने मीडिया की तरफ से पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह कह दिया कि हमको इन तमाम चीजों की वजह से कश्मीरियों को या फिर इंडिया के बाकी मुसलमानों को टारगेट नहीं करना चाहिए बल्कि हमको सिर्फ इंसाफ चाहिए मतलब कि जो असली गुनहगार हैं जो आतंकवादी हैं जो असली दुश्मन हैं उनके पीछे जाना चाहिए बस फिर क्या था इन नफरती चिंटुओं ने उनको ही निशाने पर ले लिया बावजूद इसके कि उन्होंने अभी इसी हादसे ही अपने पति को खोया था और फिर इनके बारे में सोशल मीडिया के ऊपर ऐसी-ऐसी चीजें लिखी गई ऐसी-ऐसी टिप्पणियां की गई कि जिनको देखकर या सुनकर आप अपनी आंखों और कानों पर हाथ रखने के लिए मजबूर हो जाएंगे तो अब इस बड़े ऑपरेशन की ब्रीफिंग के लिए बाद में दो महिलाओं को ही जो मीडिया के सामने लाया गया ।

उसका एक मोटिव तो यह भी हो सकता है कि क्योंकि उस हादसे में मेनली औरतों को ही साइकोलॉजिकली टारगेट किया गया था मतलब बहुत सारी जवान औरतों के सामने उनके जवान शौहरों को ही कत्ल कर दिया गया था जबकि जो दूसरा मेन मोटिव था और जो दूसरा मेन मकसद था वो यह दिखाना था कि जब बात देश की आती है तो इंडिया पूरी तरीके से यूनाइटेड है अब भले ही एक तरफ बैठी हुई आर्मी ऑफिसर का नाम सुफिया कुरैशी हो और दूसरी तरफ बैठी हुई जो विंग कमांडर हैं उनका नाम व्युमिका सिंह हो और जाहिर है इस यूनिटी को देखकर इस मंजर को देखकर जितनी चोट बाहर बैठे हुए दुश्मनों को लगी होगी शायद उतनी ही चोट अंदर बैठे हुए उन नफरतियों को भी लगी होगी कि जिनके पिछले कई दिन सिर्फ और सिर्फ देश में धार्मिक नफरत फैलाने या देश को धर्म के नाम पर तोड़ने में ही गुजरते रहे अब रहा सवाल कर्नल सुफिया कुरैशी का तो आपको पता होना चाहिए कि यह भी अपने आप में कोई आम आर्मी ऑफिसर नहीं है बल्कि इनके नाम तो बड़े-बड़े रिकॉर्ड्स हैं और इनकी इंडियन आर्मी में एक अलग ही पहचान है इनकी पैदाइश सन 1981 में भारत की गुजरात स्टेट में हुई थी और खास बात यह है कि जिस फैमिली में या कहें तो जिस खानदान में यह पैदा हुई हैं उस खानदान का इंडियन आर्मी के साथ पुश्तैनी रिश्ता है मतलब इनके दादा भी भारतीय सेना में हुआ करते थे इनके खुद के हस्बैंड ताजुद्दीन भी इंडियन आर्मी में है जबकि ये खुद भी 1999 से मतलब कि उस वक्त से इंडियन आर्मी में है कि जब इनकी उम्र बमुश्किल 17 साल थी आपको जानकर शायद हैरानी होगी कि कर्नल सुफिया कुरैशी भारत के इतिहास की वो पहली महिला ऑफिसर थी कि जिन्होंने एक मल्टीीनेशनल एक्सरसाइज में अपनी टीम को लीड किया था।

मतलब कि एक 40 मेंबर्स की जो फौज थी उसको कमांड किया था और यह हुआ था सन 2016 में और उस एक्सरसाइज में कि जिसको दुनिया में एक्सरसाइज फोर्स 18 के नाम से जाना जाता था मतलब यह एक तरीके का ऐसा इवेंट था कि जहां पर दुनिया भर के देश अपनी-अपनी आर्मी को एक्सरसाइज के लिए भेजा करते थे वहां पर ही यह पूरी दुनिया के सामने अपनी टीम को कमांड करने वाली अपनी टीम को लीड करने वाली पहली भारत की महिला आर्मी ऑफिसर बनी थी यह 2006 में उस वक्त भी चर्चाओं में आई थी कि जब यह यूएन के पीस कीपिंग मिशन का हिस्सा बनी थी मतलब इनको यूएन के इस मिशन के अंडर में अफ्रीका के देश कांगो भेजा गया था जहां पर इन्होंने शांति स्थापित करने में बड़ा योगदान दिया था बाकी सुफिया कुरैशी ने एक आर्मी इंस्ट्रक्टर के तौर पर भी काम किया है अगर आप लोगों को नहीं समझ आया तो मैं आपको बता दूं कि जितने भी नए लोग आर्मी में जाते हैं तो उनको ट्रेन करने का या उनको तैयार करने का जो काम होता है जो जिम्मेदारी होती है वो एक इंस्ट्रक्टर की ही होती है मतलब यह एक तरीके का टीचर होता है अब चाहे नॉर्थ ईस्ट इंडिया के इलाके में खतरनाक बाढ़ से निपटने के लिए एक ऑपरेशन चलाना हो या फिर अफ्रीका के अंदर यूएन के मिशन के अंडर में अपना एक अनोखा योगदान देना हो इन सभी की वजह से कर्नल सुफिया कुरैशी को वक्त-व पर बहुत सारे अवार्ड्स और सर्टिफिकेट्स भी मिल चुके है।

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